दिल्ली में प्रदूषण रोकने के लिए एमसीडी ने तेज किए धूल नियंत्रण के उपाय

 


नई दिल्ली, 21 अक्टूबर (हि.स.)। दिल्ली में वायु प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने धूल नियंत्रण, सड़कों की गहन सफाई और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई तेज कर दी है। निगम ने सभी 12 जोनों में धूल प्रभावित सड़कों की सफाई शुरू करने के साथ ही अवैध मलबा डंपिंग, खुले में कचरा जलाने और निर्माण गतिविधियों से होने वाले प्रदूषण पर निगरानी बढ़ा दी है। इसके लिए संयुक्त प्रवर्तन टीमों का गठन किया गया है।

निगम ने अवैध डंपिंग पर रोक लगाने के लिए सभी 250 वार्डों में निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट के निस्तारण के लिए निर्धारित स्थल चिह्नित किए हैं। इन स्थलों पर धूल नियंत्रण के लिए मानक संचालन प्रक्रिया लागू की गई है। इसके तहत अपशिष्ट के ढेर से कम से कम तीन मीटर ऊंची धूलरोधी दीवारें बनाना, डंप की गई सामग्री को ढकना या नियमित रूप से गीला रखना और फाइन-नोजल जल छिड़काव प्रणाली चालू रखना अनिवार्य किया गया है। मलबा ले जाने वाले वाहनों को भी पूरी तरह ढकना होगा।

निगरानी मजबूत करने के लिए सभी 125 निर्धारित स्थलों पर 360 डिग्री पीटीजेड कैमरे लगाए गए हैं। इन कैमरों की सीधी फीड दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) को उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे स्थलों पर चौबीसों घंटे निगरानी की जा सकेगी।

नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए गठित संयुक्त टीमें खुले में जैविक कचरा जलाने, निर्माण एवं विध्वंस गतिविधियों से फैलने वाली धूल, प्रतिबंधित ईंधनों के इस्तेमाल और मलबे तथा कचरे की अवैध डंपिंग पर नजर रखेंगी। टीमें निगम के निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट भंडारण और डंपिंग स्थलों का निरीक्षण भी करेंगी। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के निर्देशों के अनुरूप निर्माण एवं विध्वंस गतिविधियों को मलबा पोर्टल के दायरे में लाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

धूल प्रदूषण कम करने के लिए निगम ने सड़कों पर 167 वाटर स्प्रिंकलर और 40 एंटी-स्मॉग गन तैनात की हैं। इनका संचालन ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (ग्रैप) के विभिन्न चरणों के अनुरूप किया जा रहा है। इसके अलावा निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट प्रसंस्करण संयंत्रों, डंपिंग स्थलों और कचरे से ऊर्जा बनाने वाले संयंत्रों में 20 एंटी-स्मॉग गन स्थापित की गई हैं। निगम की ऊंची इमारतों पर भी 20 एंटी-स्मॉग गन लगाई गई हैं।

डीपीसीसी की प्रवर्तन टीमों के क्षेत्रीय निरीक्षण को प्रभावी बनाने के लिए सभी जोनों में वाहन तैनात किए गए हैं। इसके लिए प्रत्येक जोन को अंतरिम व्यवस्था के तहत पांच लाख रुपये का बजटीय प्रावधान जारी किया गया है। जरूरत पड़ने पर लिटर-पिकर संचालन के लिए उपलब्ध कराए गए वाहनों का इस्तेमाल भी प्रवर्तन कार्यों में किया जाएगा। सभी जोनल अधिकारियों को नियमित निरीक्षण करने, प्रदूषण के स्रोतों की पहचान करने और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

निगमायुक्त संजीव खिरवार ने कहा कि वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए निरंतर प्रयास, सख्त प्रवर्तन और प्रभावी निगरानी जरूरी है। निगम सड़कों की गहन सफाई, धूल नियंत्रण उपकरणों की तैनाती और प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है। उन्होंने सभी जोनल अधिकारियों को धूल नियंत्रण उपायों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने और नियमित क्षेत्रीय निरीक्षण कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि समन्वित और समयबद्ध कार्रवाई के माध्यम से दिल्ली की वायु गुणवत्ता में ठोस और स्थायी सुधार लाना निगम का उद्देश्य है।

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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी