संपत्ति कर बढ़ाने और शहरी प्रशासन के लिए एमसीडी ने चार एजेंसियों से किया एमओयू

 

नई दिल्ली, 02 जून (हि.स.)। दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने संपत्ति कर प्रशासन को सुदृढ़ करने और शहरी नियोजन को आधुनिक तकनीक से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए चार एजेंसियों के साथ ड्रोन-आधारित जियोस्पेशियल सर्वे एवं डिजिटल ट्विन परियोजनाओं के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं।

एमसीडी अधिकारियों के अनुसार, इन पायलट परियोजनाओं के तहत ड्रोन आधारित हवाई सर्वेक्षण, लिडार मैपिंग, डिजिटल ट्विन तकनीक, थ्री-डी सिटी मॉडलिंग, जीआईएस आधारित एसेट मैपिंग और आधुनिक डेटा एनालिटिक्स जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। इन तकनीकों के माध्यम से उन संपत्तियों की पहचान की जा सकेगी जिनका अब तक मूल्यांकन नहीं हुआ है या जिनका मूल्यांकन वास्तविक स्थिति की तुलना में कम दर्ज है।

नगर निगम का मानना है कि यह पहल संपत्ति कर संग्रहण को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के साथ-साथ शहरी प्रशासन की दक्षता बढ़ाने में भी सहायक होगी। परियोजना के तहत तैयार होने वाला जियोस्पेशियल डेटा विभिन्न विभागों को शहरी नियोजन, अवसंरचना विकास और नागरिक सेवाओं के बेहतर प्रबंधन में मदद करेगा।

एमसीडी ने कहा कि इन पायलट परियोजनाओं को निगम पर किसी अतिरिक्त वित्तीय बोझ के बिना पूरा किया जाएगा। भाग लेने वाली एजेंसियां अपने संसाधनों और तकनीकी क्षमता का उपयोग करते हुए सर्वेक्षण एवं संबंधित कार्यों को अंजाम देंगी।

अतिरिक्त आयुक्त (वित्त) ने बताया कि पायलट परियोजनाओं के सफल क्रियान्वयन और उनके मूल्यांकन के बाद निगम इस पहल को पूरे दिल्ली क्षेत्र में लागू करने पर विचार कर सकता है। इसके माध्यम से शहर की सभी संपत्तियों और नागरिक परिसंपत्तियों का एक व्यापक, अद्यतन और डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा सकेगा।

अधिकारियों के अनुसार, इस पहल से पारदर्शिता बढ़ेगी, शहरी नियोजन को नई दिशा मिलेगी और नागरिक-केंद्रित प्रशासन को मजबूती मिलेगी। एमसीडी ने कहा कि वह दिल्लीवासियों को बेहतर सार्वजनिक सेवाएं उपलब्ध कराने और निगम प्रशासन को तकनीक आधारित बनाने के लिए आधुनिक समाधानों को अपनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी