संविदा कर्मचारियों के हितों की रक्षा एवं नियमितीकरण की दिशा में ठोस पहल, महापौर ने निगमायुक्त को लिखा पत्र

 


नई दिल्ली, 31 जुलाई (हि.स.)। दिल्ली के महापौर प्रवेश वाही ने निगमायुक्त संजीव खिरवार को पत्र लिखकर दिल्ली नगर निगम में ए, बी एवं सी श्रेणी के रिक्त एवं स्वीकृत पदों के विरुद्ध प्रत्यक्ष रूप से कार्यरत निगम द्वारा सीधे भर्ती संविदा कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा एवं उनके नियमितीकरण की संभावनाओं पर प्राथमिकता के आधार पर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

महापौर प्रवेश वाही ने अपने पत्र में कहा कि दिल्ली नगर निगम में बड़ी संख्या में ऐसे संविदा कर्मचारी हैं जिन्हें निगम द्वारा सीधे भर्ती किया गया है वे वर्षों से निरंतर सेवाएं दे रहे हैं, जो नियमित पदों के अनुरूप कार्य कर रहे हैं तथा संबंधित भर्ती नियमों के अनुसार आवश्यक शैक्षणिक एवं अन्य योग्यताएं भी रखते हैं। इनमें से अनेक कर्मचारी अपनी आयु का महत्वपूर्ण हिस्सा निगम की सेवा में समर्पित कर चुके हैं और कई कर्मचारी अन्य सरकारी सेवाओं के लिए निर्धारित अधिकतम आयु सीमा भी पार कर चुके हैं अथवा उसके निकट पहुंच चुके हैं।

महापौर ने कहा कि निगम द्वारा सीधे भर्ती ऐसे संविदा कर्मचारियों के अनुभव एवं योगदान को देखते हुए निगम की यह नैतिक एवं प्रशासनिक जिम्मेदारी है कि उनके भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में गंभीरतापूर्वक विचार किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पूरी प्रक्रिया सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित संवैधानिक एवं वैधानिक सिद्धांतों तथा प्रचलित भर्ती नियमों के अनुरूप ही संचालित की जाएगी, जिससे किसी प्रकार की कानूनी बाधा उत्पन्न न हो। हरियाणा सरकार व नई दिल्ली नगरपालिका परिषद द्वारा भी इसी प्रकार अपने संविदा कर्मचारियों के हितों में निर्णय लिया गया है जिसका भी अवलोकन किया जाए।

पत्र में महापौर ने निगमायुक्त को निर्देश दिया है कि सभी विभागों में कार्यरत पात्र संविदा कर्मचारियों की विभागवार पहचान एवं परीक्षण किया जाए तथा यह सुनिश्चित किया जाए कि कर्मचारी स्वीकृत एवं रिक्त पदों के विरुद्ध कार्यरत हों, संबंधित पदों के भर्ती नियमों के अनुरूप योग्य हों तथा उनकी प्रारंभिक नियुक्ति किसी अवैध प्रक्रिया के माध्यम से न हुई हो।

महापौर ने यह भी सुझाव दिया है कि जहां संबंधित नियमित पद उपलब्ध न हों, वहां विधि एवं वित्तीय स्वीकृति के अधीन एकमुश्त उपाय के रूप में सुपरन्यूमरेरी पद सृजित किए जाने की संभावनाओं का भी परीक्षण किया जाए।

महापौर प्रवेश वाही ने प्रस्तावित योजना में यह भी सुझाव दिया है कि पात्र संविदा कर्मचारियों को एकमुश्त नियमितीकरण का लाभ दिया जाए अथवा कम से कम उन्हें संबंधित नियमित पद की सेवानिवृत्ति आयु तक सेवा में बनाए रखने की व्यवस्था की जाए। साथ ही समान कार्य के लिए समान वेतन के सिद्धांत के अनुरूप उन्हें नियमित कर्मचारियों के समकक्ष प्रवेश स्तर का वेतन, महंगाई भत्ता तथा विधि सम्मत सेवा लाभ उपलब्ध कराने की संभावनाओं पर भी विचार किया जाए।

इसके अतिरिक्त उन्होंने पात्र कर्मचारियों को अवकाश संबंधी सुविधाएं, कर्मचारी कल्याण योजनाओं का लाभ तथा अन्य अनुमेय सेवा लाभ उपलब्ध कराने का भी सुझाव दिया है। महापौर ने यह भी कहा कि वर्तमान में जिन रिक्त पदों पर संविदा कर्मचारी कार्यरत हैं, उन पदों पर नियमित भर्ती की प्रक्रिया इस प्रकार संचालित की जाए कि वर्षों से कार्यरत कर्मचारियों के समक्ष रोजगार समाप्त होने की स्थिति उत्पन्न न हो।

महापौर ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि संविदा कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा का यह विषय पूर्व में उनके नेता सदन रहते हुए निगम के बजट प्रस्तावों का भी हिस्सा रहा है तथा यह कर्मचारियों के प्रति निगम की संवेदनशील एवं उत्तरदायी सोच को दर्शाता है।

महापौर निगमायुक्त से अनुरोध किया है कि विभागवार पात्र कर्मचारियों की सूची, प्रस्तावित पात्रता मानदंड, वित्तीय प्रभाव, प्रारूप योजना एवं विस्तृत कार्यवाही प्रतिवेदन तैयार कर 15 दिनों के भीतर प्रस्तुत किया जाए, ताकि इस विषय पर निगम स्तर पर आवश्यक निर्णय शीघ्र लिया जा सके।

महापौर ने कहा कि दिल्ली नगर निगम अपने कर्मचारियों को केवल मानव संसाधन नहीं, बल्कि शहर की सेवाओं की सबसे महत्वपूर्ण शक्ति मानता है। वर्षों से ईमानदारी एवं समर्पण के साथ सेवा देने वाले कर्मचारियों के हितों की रक्षा करना निगम की प्राथमिकता है और इस दिशा में विधिसम्मत एवं न्यायसंगत समाधान खोजने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी