मालवीय नगर अग्निकांड में दूसरों की जान बचाने वाले घायल रोहित को पांच लाख की सहायता राशि जारी

 


नई दिल्ली, 18 जून (हि.स.)। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 3 जून को मालवीय नगर अग्निकांड के दौरान अपनी जान की परवाह किए बिना कई लोगों की जान बचाने वाले खिड़की एक्सटेंशन निवासी रोहित मुखिया के साहस और मानवता को नमन किया है। हादसे में गंभीर रूप से घायल रोहित के इलाज और उनके परिवार की सहायता के लिए मुख्यमंत्री ने तत्काल 5 लाख रुपये की अनुग्रह राशि प्रदान की है। साथ ही उन्होंने आश्वस्त किया है कि रोहित के पूर्ण स्वास्थ्य लाभ तक उपचार पर होने वाले समस्त चिकित्सा व्यय का वहन दिल्ली सरकार द्वारा किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने रोहित को भावनात्मक पत्र लिखकर उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की और इस कठिन समय में उनके एवं उनके परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त की हैं।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर पश्चिमी दिल्ली जिला के जिलाधिकारी (डीएम) ने रोहित के आवास पर पहुंचकर उनके परिवार से मुलाकात की और 5 लाख रुपये की सहायता राशि का चेक सौंपा। डीएम ने परिवार को आश्वस्त किया कि दिल्ली सरकार इस कठिन समय में उनके साथ पूरी मजबूती से खड़ी है और उपचार से संबंधित हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में कहा कि मालवीय नगर की दुखद अग्नि दुर्घटना में रोहित के घायल होने का समाचार जानकर उन्हें गहरा दुख हुआ। इस कठिन समय में उनकी संवेदनाएं रोहित और उनके परिवार के साथ हैं। उन्होंने रोहित द्वारा विपरीत और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में दिखाए गए साहस, कर्तव्यनिष्ठा और मानवीय संवेदनशीलता की सराहना करते हुए कहा कि संकट की घड़ी में भी धैर्य बनाए रखना और अपने दायित्व का निर्वहन करना उनके मजबूत चरित्र और दृढ़ संकल्प का परिचायक है। रोहित का यह साहस अनेक लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि रोहित जैसे साहसी नागरिक समाज के लिए प्रेरणा हैं। उन्होंने संबंधित अधिकारियों और चिकित्सकों को निर्देश दिए हैं कि रोहित के उपचार में किसी प्रकार की कमी न रहे और उन्हें सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

रोहित मुखिया के साहस का परिचय

3 जून को मालवीय नगर के हौज रानी स्थित एक रेस्टोरेंट में लगी भीषण आग के दौरान रोहित मुखिया ने असाधारण साहस और मानवता का परिचय दिया था। वह उस समय रेस्टोरेंट के किचन में ड्यूटी कर रहे थे। आग लगते ही उन्होंने सबसे पहले अपने साथियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का फैसला किया। उनके गांव के दो साथी पहली मंजिल पर काम कर रहे थे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए रोहित अपनी जान की परवाह किए बिना उन्हें बचाने के लिए ऊपर पहुंचे। आग की लपटों और धुएं के बीच फंस जाने पर तीनों ने एक कमरे में शरण ली। बाहर निकलने का रास्ता न मिलने पर रोहित ने बाथरूम की बाल्टी की मदद से खिड़की तोड़ी और सुरक्षित निकलने का मार्ग बनाया। उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि उनके दोनों साथी पहले बाहर निकल जाएं। अपने साथियों की जान बचाने के बाद रोहित स्वयं सबसे अंत में नीचे कूदे। इस दौरान वह गंभीर रूप से घायल हो गए, लेकिन उनके साहस और सूझबूझ की वजह से कई लोगों की जान बच सकी।

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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव