उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू सर गंगा राम अस्पताल के स्थापना दिवस समारोह में हुए शामिल
नई दिल्ली, 13 अप्रैल (हि.स.)। दिल्ली के उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू सोमवार को सर गंगा राम अस्पताल के 71वें स्थापना दिवस समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने स्वास्थ्य क्षेत्र के भविष्य और भूमिका पर महत्वपूर्ण विचार साझा किए।
सर गंगा राम अस्पताल के 71वें स्थापना दिवस पर उपराज्यपाल ने कहा कि सर गंगा राम एक महान इंजीनियर और दूरदर्शी परोपकारी व्यक्ति थे जिनकी विरासत सामाजिक जिम्मेदारी का प्रतीक बनी हुई है। ‘गुरु का बाग मोर्चा’ आंदोलन के साहसी समर्थन से लेकर देखभाल के स्थायी संस्थानों के निर्माण तक उनका जीवन सेवा का एक प्रमाण था।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में स्वास्थ्य सेवा एक अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र बनकर उभरेगा, खासकर तब जब दुनिया के कई विकसित देश तेजी से वृद्ध हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि इसके विपरीत भारत एक युवा देश है, जहां औसत आयु लगभग 28 वर्ष है और 50 प्रतिशत से अधिक आबादी इससे कम उम्र की है।
उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू ने कहा कि सर गंगाराम का पंजाब के साथ बहुत संबंध है और मेरे परिवार के साथ बहुत सहयोग है। मेरे बेटे का जन्म भी इसी अस्पताल में हुआ था। आने वाले समय में स्वास्थ्य सेवा बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाने जा रही है। भारत सबसे युवा देशों में से एक है इसलिए यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि उसके स्वास्थ्य कर्मचारी कुशल हों।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कथन ‘वैश्विक भलाई के लिए युवा’ का उल्लेख करते हुए कहा कि यह देखकर खुशी होती है कि यह संस्थान प्रधानमंत्री के अनुरूप, सुलभ और समावेशी स्वास्थ्य सेवा के प्रति गहरी प्रतिबद्धता के साथ नैदानिक उत्कृष्टता को संतुलित करके उनके मूल्यों को कायम रख रहा है। यदि भारत स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करता है और स्वास्थ्य कर्मियों के कौशल में सुधार करता है, तो यह वैश्विक स्तर पर बड़ा बदलाव ला सकता है।
संधू ने कहा कि केवल डिग्री पर्याप्त नहीं है, बल्कि विशेष रूप से स्वास्थ्य क्षेत्र में कौशल-आधारित प्रशिक्षण की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे दुनिया में उम्रदराज आबादी बढ़ेगी, सहायक स्वास्थ्य सेवाओं की मांग भी तेजी से बढ़ेगी।
उन्होंने सर गंगा राम अस्पताल की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्थान स्वास्थ्य सेवाओं को आगे बढ़ाने और कौशल विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी