पीजी संचालकों के लिए 15 दिन के भीतर तैयार किया जाएगा पोर्टल, नए छात्रावासों के लिए भूमि की करेंगे पहचान
नई दिल्ली, 15 सितंबर (हि.स.)। दिल्ली के शिक्षा एवं शहरी विकास मंत्री आशीष सूद ने कहा कि दिल्ली में पीजी संचालकों के लिए 15 दिनों के भीतर एक पोर्टल तैयार किया जाएगा, जिस पर पीजी सुविधाओं का पंजीकरण किया जाएगा तथा भवन की आयु, संरचना का आकार और अग्नि सुरक्षा संबंधी उपायों का विवरण उपलब्ध कराया जाएगा। यह निर्णय मंगलवार को मंत्री आशीष सूद की अध्यक्षता में छात्र आवास एवं सुरक्षा के संबंध में गठित 20 सदस्यीय उच्चाधिकार प्राप्त समिति की पहली बैठक लिया गया। उपराज्यपाल द्वारा गठित इस उच्चस्तरीय समिति का उद्देश्य राजधानी में छात्र आवास की गंभीर कमी, सुरक्षा मानकों तथा छात्र आवास के नियमन से जुड़े विभिन्न पहलुओं की समीक्षा करना और उनका समाधान सुनिश्चित करना है। यह जानकारी एक विज्ञप्ति के जरिए दी गई।
मंत्री आशीष सूद की अध्यक्षता वाली यह समिति समग्र नीतिगत दिशा प्रदान करने, विभिन्न विभागों एवं एजेंसियों के बीच समन्वय सुनिश्चित करने तथा 60 दिनों के भीतर अपनी अंतिम सिफारिशें प्रस्तुत करने के लिए जिम्मेदार होगी। समिति में दिल्ली के मुख्य सचिव, दिल्ली पुलिस आयुक्त, एमसीडी आयुक्त, एनडीएमसी अध्यक्ष और डीडीए उपाध्यक्ष—शामिल हैं। इसके अतिरिक्त गृह, राजस्व, स्वास्थ्य, शहरी विकास, विधि, लोक निर्माण विभाग के सचिव तथा मुख्य अग्निशमन अधिकारी भी समिति का हिस्सा हैं।
विश्वविद्यालयों की ओर से दिल्ली विश्वविद्यालय, गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय, अंबेडकर विश्वविद्यालय दिल्ली, नेताजी सुभाष यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी तथा दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी के कुलपति इस समिति में शामिल हैं। शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव/सचिव समिति के सदस्य सचिव हैं। बैठक में कम उपयोग वाली सरकारी अथवा डीडीए संपत्तियों, जैसे नरेला में खाली सरकारी आवासों, की पहचान कर उन्हें छात्रावासों में परिवर्तित करने की संभावनाओं का पता लगाना तथा सार्वजनिक परिवहन से उनकी कनेक्टिविटी सुनिश्चित करना है। संस्थागत एवं निजी पीजी आवासों के लिए अनिवार्य पंजीकरण व्यवस्था और केंद्रीय डेटाबेस तैयार करना, लीज एग्रीमेंट को विनियमित करना, मनमाने बिजली अधिभार पर रोक लगाना तथा क्षेत्रवार किराया सीमा निर्धारित करना है। अनिवार्य संरचनात्मक ऑडिट, अग्नि सुरक्षा जांच, आपातकालीन निकासी व्यवस्था लागू करना तथा पीजी संचालकों और छात्रों के लिए नियमित मॉक ड्रिल आयोजित करना। एक केंद्रीकृत डिजिटल डैशबोर्ड स्थापित करना, जहां छात्र अत्यधिक भीड़, भवन संबंधी सुरक्षा खतरों और लीज नियमों के उल्लंघन की शिकायत दर्ज कर सकें और उनका समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जा सके।
समिति की पहली बैठक में मुख्य सचिव, दिल्ली पुलिस आयुक्त, एमसीडी आयुक्त, संबंधित विश्वविद्यालयों के कुलपति तथा प्रधान सचिव (शिक्षा) सहित समिति के प्रमुख सदस्यों ने भाग लिया।
दिल्ली के सभी विश्वविद्यालयों एवं शैक्षणिक संस्थानों के छात्रों से संबंधित डेटा को एकत्रित और मैप करने के लिए 15 दिनों के भीतर एक केंद्रीय पोर्टल विकसित किया जाएगा। पीजी संचालकों के लिए 15 दिनों के भीतर एक पोर्टल तैयार किया जाएगा, जिस पर पीजी सुविधाओं का पंजीकरण किया जाएगा तथा भवन की आयु, संरचना का आकार और अग्नि सुरक्षा संबंधी उपायों का विवरण उपलब्ध कराया जाएगा।
दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) और शहरी विकास विभाग नए छात्रावासों के निर्माण के लिए उपयुक्त भूमि की पहचान करेंगे। समिति पीजी के लिए नए कानून एवं नियम तैयार करेगी। इन नियमों के निर्माण में प्रशिक्षण एवं तकनीकी शिक्षा (टीटीई) विभाग सहित सभी संबंधित हितधारक भाग लेंगे।
मंत्री आशीष सूद ने कहा कि दिल्ली सरकार सभी छात्रों के लिए सुरक्षित एवं संरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है और इसके लिए एक व्यावहारिक एवं संतुलित नियामक व्यवस्था विकसित की जाएगी।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि बैठक में दिल्ली में छात्रों के लिए सुरक्षित, सुलभ और बेहतर आवास व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए समन्वित दृष्टिकोण पर चर्चा की गई। इसके साथ ही पूरे दिल्ली में छात्रों की सुरक्षा, सुविधाओं और बेहतर शैक्षणिक वातावरण को और मजबूत करने पर भी विशेष ध्यान दिया गया। छात्र-केंद्रित दृष्टिकोण के साथ एक अधिक सुरक्षित और सहयोगी उच्च शिक्षा पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण है।
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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव