कला संकुल में दिखी भारतीय कला-संस्कृति की विविध छटा
नई दिल्ली, 29 सितंबर (हि.स.)। संस्कार भारती दिल्ली के कला संकुल में बीते सप्ताह शास्त्रीय संगीत, कथक, लोक एवं पारंपरिक चित्रकला और भारतीय ज्ञान-परंपरा से जुड़ी समकालीन कला के विविध आयोजन हुए। इन कार्यक्रमों में भारतीय कला की परंपरा, प्रयोग और आधुनिक अभिव्यक्ति का संगम देखने को मिला।
‘भारतीय दृष्टि से समकालीन कथक—परंपरा, नवाचार और अभिव्यक्ति’ विषय पर कला संगोष्ठी एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना गौरी दिवाकर ने कथक की परंपरा, शास्त्रीय अनुशासन और बदलते समय में हो रहे प्रयोगों पर अपने विचार साझा किए। इस दौरान शास्त्रीय गायन और प्रीति सिन्हा समूह की कथक प्रस्तुति भी हुई।
इससे पहले दृश्य कला विद्या की ओर से ‘रंग मंजूषा’ लोक एवं पारंपरिक कला प्रदर्शनी का शुभारंभ हुआ। सीसीआरटी के अध्यक्ष डॉ. विनोद नारायण इंदूरकर ने प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। प्रदर्शनी में 33 कलाकारों की कलाकृतियां शामिल हैं, जिनमें मधुबनी, वरली, गोंड, पिछवाई, फड़, सुजनी और मंजूषा समेत विभिन्न लोक एवं पारंपरिक कला शैलियों को प्रदर्शित किया गया है। प्रदर्शनी 30 सितंबर तक दर्शकों के लिए खुली रहेगी।
वहीं, 19 से 24 सितंबर तक एआईएफएसीएस गैलरी में कलाकार पंकज सचदेवा की एकल चित्रकला प्रदर्शनी ‘ईटरनल इचोएस’ आयोजित की गई। प्रदर्शनी में रामायण, महाभारत, शिव-शक्ति, बुद्ध, महावीर, सिख दर्शन और भारतीय आध्यात्मिक परंपरा जैसे विषयों को समकालीन प्रतीकात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया।
इन आयोजनों के माध्यम से कला संकुल में भारतीय कला की परंपरा और आधुनिक अभिव्यक्ति के बीच संवाद देखने को मिला। शास्त्रीय कलाओं, लोक कला की विरासत और समकालीन चित्रकला के संगम ने कला संकुल को कलाकारों और कला प्रेमियों के लिए एक जीवंत सांस्कृतिक मंच के रूप में स्थापित किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी