(लीड) मुख्यमंत्री ने लोक नायक अस्पताल स्थित सखी वन स्टॉप सेंटर का किया निरीक्षण

 


नई दिल्ली, 05 अक्टूबर (हि.स.)। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार को पुरानी दिल्ली जिले के अंतर्गत आने वाले लोक नायक अस्पताल स्थित सखी वन स्टॉप सेंटर का निरीक्षण किया। उन्होंने केंद्र में उपलब्ध सुविधाओं, पीड़ित महिलाओं और बच्चियों को दी जा रही सेवाओं तथा शिकायतों के निस्तारण की पूरी व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों और सेंटर की टीम से विभिन्न मामलों की प्रक्रिया, काउंसलिंग, पुलिस सहायता, कानूनी सहयोग, मेडिकल सुविधा, अस्थायी आश्रय और मामलों पर की गई कार्रवाई की जानकारी ली।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि हिंसा से पीड़ित प्रत्येक महिला और बच्ची को समयबद्ध, संवेदनशील एवं सम्मानजनक सहायता उपलब्ध कराना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि संकट की स्थिति में अपने घर से निकलकर मदद के लिए सेंटर तक पहुंचने वाली महिला के लिए यह स्वयं में बड़ा कदम होता है। ऐसे में सेंटर पर पहुंचने के बाद उसे सुरक्षित और सहज वातावरण मिलना चाहिए, उसकी बात धैर्यपूर्वक सुनी जानी चाहिए और उसकी आवश्यकता के अनुसार तुरंत सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

सखी वन स्टॉप सेंटर का मूल उद्देश्य पीड़ित महिलाओं को एक ही स्थान पर समग्र सहायता प्रदान करना है। यहां हिंसा प्रभावित महिलाओं और बच्चियों को तत्काल सुरक्षा, आपातकालीन चिकित्सा जांच, मनोवैज्ञानिक व सामाजिक काउंसलिंग, निःशुल्क कानूनी परामर्श और एफआईआर दर्ज कराने में पूर्ण सहायता उपलब्ध कराई जाती है। इसके साथ ही संकट की स्थिति में जरूरतमंद महिलाओं को अल्पकालिक सुरक्षित प्रवास, भोजन, वस्त्र और अन्य बुनियादी सामग्रियां भी एक ही छत के नीचे प्रदान की जाती हैं। सखी वन स्टॉप सेंटर व्यवस्था के तहत महिलाओं और बच्चियों को टोल-फ्री महिला हेल्पलाइन 181 के माध्यम से सहायता से जोड़ा जाता है। आवश्यकता के अनुसार आपातकालीन बचाव एवं सुरक्षा, मेडिकल सहायता, पुलिस सहायता, काउंसलिंग, कानूनी सहायता तथा अस्थायी आश्रय जैसी सेवाओं को एकीकृत रूप से उपलब्ध कराया जाता है।

मुख्यमंत्री निरीक्षण के दौरान सेंटर पर आने वाले मामलों के रिकॉर्ड और उनके फॉलोअप की व्यवस्था की भी समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि अब से दिल्ली के सभी सखी वन स्टॉप सेंटरों की विस्तृत रिपोर्ट प्रतिमाह मुख्यमंत्री कार्यालय को प्रस्तुत की जाए। इस रिपोर्ट में केवल मामलों की संख्या दर्ज करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि प्रत्येक मामले की पुलिस सूचना, एफआईआर की स्थिति, आरोपी के विरुद्ध की गई कार्रवाई और पीड़िता को मिली वास्तविक सहायता का स्पष्ट विवरण देना अनिवार्य होगा।

मुख्यमंत्री ने बच्चियों से संबंधित पॉक्सो मामलों की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि ऐसे अत्यंत संवेदनशील मामलों का रिकॉर्ड पूरी गोपनीयता के साथ अलग से रखा जाए। उन्होंने सेंटर में काउंसलिंग की प्रक्रिया का भी संज्ञान लिया। मुख्यमंत्री ने केंद्र में काउंसलिंग की प्रक्रिया को समझा और कहा कि हर मामले की प्रकृति अलग होती है, इसलिए सहायता भी पीड़िता की आवश्यकता के अनुसार दी जानी चाहिए।

उन्होंने सेंटर में रहने वाली महिलाओं और बच्चियों के लिए उपलब्ध अस्थायी आश्रय व्यवस्था, भोजन, कपड़े और अन्य आवश्यक सामग्री की भी जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जिन महिलाओं को तत्काल सुरक्षित स्थान की जरूरत है, उन्हें सेंटर पर आवश्यक सुविधा मिले और यदि किसी मामले में लंबी अवधि के आश्रय की आवश्यकता हो तो संबंधित शेल्टर होम से समन्वय कर आगे की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सरकारी व्यवस्था की सफलता केवल दर्ज मामलों की संख्या से नहीं, बल्कि पीड़ितों को मिली वास्तविक सहायता और मामलों में हुई आगे की कार्रवाई से भी आंकी जाए। उन्होंने सखी वन स्टॉप सेंटरों से आने वाले मामलों का नियमित फॉलोअप, संबंधित विभागों और पुलिस के साथ प्रभावी समन्वय तथा पुलिस कार्रवाई में देरी होने पर उसका स्पष्ट रिकॉर्ड रखने और आवश्यकता पड़ने पर उच्च अधिकारियों के संज्ञान में लाने के निर्देश दिए।

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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव