वाल्मीकि समुदाय ने सेवा और समर्पण से देश के सामाजिक एवं सांस्कृतिक ताने-बाने को सुदृढ़ बनाया- विजेन्द्र गुप्ता
नई दिल्ली, 03 नवंबर (हि.स.)। दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि जिस समुदाय ने इस राष्ट्र की नैतिक एवं सांस्कृतिक नींव को संरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, उसे कभी भी उसकी गरिमा, समानता और उचित सम्मान से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। यह बात विजेंद्र गुप्ता ने मंगलवार को रोशनारा रोड स्थित पारिक भवन में आयोजित स्वच्छता कर्मचारी सम्मान समारोह एवं दीपावली मंगल मिलन समारोह को संबोधित करते हुए कही।
महर्षि वाल्मीकि के भारत की सभ्यतागत विरासत में योगदान को रेखांकित करते हुए विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि रामायण ने पीढ़ी-दर-पीढ़ी लोगों को भगवान श्रीराम के जीवन, चरित्र और आदर्शों को समझने का मार्ग दिखाया है। उन्होंने कहा कि वाल्मीकि समुदाय ने सदियों से अपनी सेवा और समर्पण के माध्यम से देश के सामाजिक एवं सांस्कृतिक ताने-बाने को सुदृढ़ बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इस अवसर पर भाजपा वरिष्ठ नेता जय प्रकाश सहित अन्य अतिथि उपस्थित रहे।
अयोध्या के हवाई अड्डे का नाम महर्षि वाल्मीकि के नाम पर रखे जाने का उल्लेख करते हुए विजेंद्र गुप्ता ने इसे भारत की साहित्यिक एवं आध्यात्मिक विरासत में महर्षि वाल्मीकि के चिरस्थायी योगदान की महत्वपूर्ण स्वीकारोक्ति बताया। उन्होंने कहा कि जहां दीपावली भगवान श्रीराम की अयोध्या वापसी और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है, वहीं महर्षि वाल्मीकि की रामायण ने इन आदर्शों को भारत की सामूहिक चेतना में स्थायी स्थान प्रदान किया है।
वाल्मीकि समुदाय के ऐतिहासिक हाशियाकरण पर चिंता व्यक्त करते हुए विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि इस समुदाय के सदस्यों ने जिस अपमान, सामाजिक भेदभाव और उपेक्षा का सामना किया है, वे केवल अतीत के किसी दूरस्थ कालखंड की घटनाएं नहीं हैं, बल्कि ऐसी पीड़ाएं हैं, जिन्हें आज भी पीढ़ियां याद करती हैं। उन्होंने कहा कि देश के सांस्कृतिक एवं सामाजिक जीवन में अपार योगदान देने के बावजूद समुदाय के सदस्यों को लंबे समय तक असमानताओं का सामना करना पड़ा है। स्वतंत्र भारत में उपलब्ध संवैधानिक संरक्षण, लोकतांत्रिक अधिकारों और अवसरों को स्वीकार करते हुए उन्होंने इस बात पर बल दिया कि वास्तविक सामाजिक प्रगति का आकलन प्रत्येक नागरिक को मिलने वाली गरिमा और सम्मान के आधार पर किया जाना चाहिए। उन्होंने समुदाय के ऐतिहासिक संघर्षों और योगदान को व्यापक रूप से मान्यता देने का आह्वान करते हुए कहा कि दीपावली पर मनाए जाने वाले धर्म, न्याय और सदाचार के आदर्श समाज के सबसे अधिक ऐतिहासिक रूप से वंचित समुदायों के प्रति हमारे व्यवहार में भी प्रतिबिंबित होने चाहिए।
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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव