हीरो फिनकॉर्प के कॉरपोरेट खाते से 12.84 करोड़ की साइबर ठगी का खुलासा, बैंक रिलेशनशिप मैनेजर समेत पांच गिरफ्तार

 

नई दिल्ली, 16 सितंबर (हि.स.)। हीरो फिनकॉर्प लिमिटेड के कॉरपोरेट बैंक खाते से 12.84 करोड़ रुपये की साइबर ठगी के मामले का स्पेशल सेल की आईएफएसओ यूनिट ने खुलासा किया है। साइबर अपराधियों ने कंपनी की जानकारी और अनुमति के बिना 317 डिजिटल लेनदेन के जरिए 12,84,09,997 रुपये 34 अलग-अलग बैंक खातों में स्थानांतरित कर दिए। मामले में पुलिस ने बैंक के रिलेशनशिप मैनेजर समेत पांच आरोपितों को गिरफ्तार किया है।

जांच में टेलीग्राम के जरिए चीन से जुड़े साइबर समूहों के संपर्क और ठगी की रकम को यूएसडीटी में बदलकर विदेश भेजे जाने की बात सामने आई है। पुलिस ने ठगी की रकम में से करीब 1.70 करोड़ रुपये विभिन्न बैंक खातों में होल्ड कराए हैं।

हीरो फिनकॉर्प लिमिटेड की शिकायत पर 21 अगस्त को स्पेशल सेल थाने में प्राथमिकी संख्या 135/26 दर्ज की गई थी। कंपनी को एचडीएफसी बैंक के सिस्टम अलर्ट से कॉरपोरेट खाते से लगातार हो रहे अनधिकृत लेनदेन की जानकारी मिली थी। कंपनी प्रबंधन ने किसी भी भुगतान या रकम हस्तांतरण की अनुमति नहीं दी थी।

मामले की जांच के लिए आईएफएसओ के एसीपी प्रेम चंद्र खंडूरी की देखरेख और डीसीपी गौरव त्यागी के नेतृत्व में टीम गठित की गई। टीम ने संदिग्ध बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल लेनदेन से जुड़े तकनीकी विवरणों का विश्लेषण किया। इसके बाद विभिन्न राज्यों में छापेमारी कर पांच आरोपितों को गिरफ्तार किया गया।

बुलंदशहर निवासी अभय कुमार सोलंकी के बैंक खाते में ठगी की 60 हजार रुपये की रकम आई थी। पुलिस के अनुसार उसने यह रकम एटीएम से निकाल ली थी।

कुरुक्षेत्र निवासी 26 वर्षीय लवली के नाम पर प्रॉपर्टी गैलरी का सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, थानेसर स्थित खाता है। इस खाते में ठगी की करीब 80 लाख रुपये की रकम पहुंची। पुलिस के मुताबिक, लवली ने कैथल के चीका निवासी सत्याम के कहने और लालच में यह खाता खुलवाया था। सत्याम फिलहाल फरार है।

जयपुर निवासी नमन कुमार के नाम पर इंफर्मिटी सर्विसेज का यस बैंक खाता है, जिसमें करीब 40 लाख रुपये आए। उसने अपना इंडसइंड बैंक खाता भी उपलब्ध कराया था, जिसमें करीब 70 लाख रुपये जमा हुए। जांच में यह खाता देशभर में नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर दर्ज 43 शिकायतों से जुड़ा मिला।

पुलिस के अनुसार नमन की मुलाकात विकास के माध्यम से हरमन से हुई थी। हरमन ने उसके मोबाइल में एपीके फाइल इंस्टॉल कराकर बैंक खाते का इस्तेमाल ठगी की रकम प्राप्त करने और आगे स्थानांतरित करने के लिए किया। नमन दिल्ली आकर कृष्णा नगर स्थित होटल निर्वाण रेजीडेंसी में भी ठहरा था, जहां इसी तरीके से उसके यस बैंक खाते का संचालन किया गया।

राजस्थान के बीकानेर निवासी 24 वर्षीय हरमन के संपर्क में टेलीग्राम पर कई चीनी समूह थे। वह उदयपुर निवासी देवेंद्र सिंह चौहान के संपर्क में भी था। पुलिस के मुताबिक, देवेंद्र टेलीग्राम के माध्यम से ठगी की रकम को यूएसडीटी में परिवर्तित करता था। इसके बाद रकम विदेश में मौजूद साइबर अपराधियों तक पहुंचाई जाती थी।

जांच के अनुसार हरमन ने कमीशन के आधार पर नमन का बैंक खाता हासिल कर उसका संचालन किया। इसके बदले उसे देवेंद्र से करीब 1.50 लाख रुपये कमीशन मिला।

जयपुर निवासी विकास (30) आरबीएल बैंक में रिलेशनशिप मैनेजर है। पुलिस के मुताबिक, उसने नमन को यस बैंक और इंडसइंड बैंक में खाते खुलवाने में मदद की और उसकी मुलाकात हरमन से कराई।

पुलिस ने आरोपितों के कब्जे से चेकबुक, पांच मोबाइल फोन और प्रॉपर्टी गैलरी की रबर स्टांप बरामद की है। जांच एजेंसी के अनुसार गिरोह संगठित तरीके से अलग-अलग बैंक खातों का इस्तेमाल कर ठगी की रकम को कई स्तरों पर स्थानांतरित कर रहा था।

आईएफएसओ के मुताबिक, मामला कई राज्यों से जुड़ा हुआ है और जांच के दौरान भारत तथा दुबई में मौजूद गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान की गई है। उनकी गिरफ्तारी के लिए आगे की कार्रवाई की जा रही है।

पुलिस ने लोगों से साइबर ठगी के मामलों में सतर्क रहने और संदिग्ध कॉल, लिंक या संदेश मिलने पर तत्काल पुलिस को सूचना देने की अपील की है।

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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी