5.50 करोड़ के जीएसटी रिफंड धोखाधड़ी मामले में तीन सरकारी अधिकारी समेत पांच गिरफ्तार, संपत्ति की गई जब्त

 




नई दिल्ली, 21 जुलाई (हि.स.)। दिल्ली एंटी-करप्शन ब्रांच ने 5.50 करोड़ के जीएसटी रिफंड धोखाधड़ी मामले में तीन सरकारी अधिकारियों और दो व्यक्तियों समेत पांच आरोपितों को गिरफ्तार किया है। इस मामले में आरोपितों की संपत्ति जब्त भी की गई है।

दिल्ली एंटी-करप्शन ब्रांच के प्रमुख (आईपीएस) विक्रमजीत सिंह ने मंगलवार को विज्ञप्ति जारी करते हुए बताया कि दिल्ली सरकार की एंटी-करप्शन ब्रांच (एसीबी) ने जीएसी रिफंड धोखाधड़ी के मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस धोखाधड़ी में लगभग 5.50 करोड़ रुपये के रिफंड को गलत तरीके से मंजूरी दी गई थी। गिरफ्तार लोगों में दिल्ली व्यापार और कर विभाग के तीन अधिकारी और दो अन्य व्यक्ति शामिल हैं। आरोपियों की पहचान अजीत सिंह (जीएसटी अधिकारी), अटल भारद्वाज (जीएसटी इंस्पेक्टर), हिमांशु मलिक ( लोअर डिवीजन क्लर्क), अजय कुमार और आशीष मिश्रा है।

उन्होंने बताया कि यह मामला दिल्ली सरकार के व्यापार और कर विभाग से मिली शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया था। शिकायत में जीएसटी रिफंड क्लेम की प्रोसेसिंग और मंजूरी में गंभीर अनियमितताओं का जिक्र था। जांच में पता चला कि रिफंड की प्रोसेसिंग कानूनी प्रावधानों और तय विभागीय प्रक्रियाओं का उल्लंघन करके की गई थी। आरोप है कि जरूरी वेरिफिकेशन और फाइनेंशियल जांच को नजरअंदाज़ किया गया, जाली दस्तावेजों और नकली तस्वीरों का इस्तेमाल किया गया और रिफंड क्लेम को बहुत कम समय में प्रोसेस कर दिया गया, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान हुआ।

विक्रमजीत सिंह ने बताया कि जांच के दौरान पता चला कि तत्कालीन जीएसटी अधिकारी ने जरूरी जांच-पड़ताल किए बिना ही रिफंड क्लेम को मंजूरी दे दी थी। वहीं, तत्कालीन जीएसटी इंस्पेक्टर ने बिजनेस की जगह का फिजिकल वेरिफिकेशन किए बिना ही नकली तस्वीरें अपलोड करके गलत वेरिफिकेशन रिपोर्ट जमा की, जिससे धोखाधड़ी में मदद मिली। फाइनेंशियल जांच में यह भी पता चला कि धोखाधोड़ी से मिली रकम को कई बैंक अकाउंट और शेल कंपनियों (फर्जी कंपनियों) के जरिए घुमाया गया था। मनी ट्रेल (पैसे के लेन-देन की जांच) से यह भी पता चला कि अपराध से मिली रकम का कुछ हिस्सा एक आरोपी सरकारी कर्मचारी के परिवार वालों को ट्रांसफर किया गया था। उन्होंने इस पैसे का इस्तेमाल रोहिणी इलाके में 2 फ्लैट खरीदने के लिए किया था।

पहली बार, एसीबी ने बीएएसएस की धारा 107 का इस्तेमाल किया और कोर्ट के आदेश से अपराध से मिली रकम से खरीदी गई संपत्ति को ट्रायल पूरा होने तक अटैच (जब्त) करवा लिया। जांच में यह भी पाया गया कि दो निजी व्यक्तियों ने बड़ी साजिश के तहत धोखाधड़ी से मिली रकम को इधर-उधर करने और लेयरिंग करने में मदद की थी।

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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव