गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज में गुरुमुखी लिपि केंद्र का शिलान्यास, मंत्री सिरसा बोले- गुरु से जुड़ने का माध्यम है गुरुमुखी
नई दिल्ली, 13 जनवरी (हि.स.)। गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज में मंगलवार को गुरुमुखी लिपि केंद्र का शिलान्यास किया गया। इस अवसर दिल्ली सरकार में पर्यावरण, वन और वन्यजीव मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने समारोह में भाग लिया और इसे सिख परंपरा, आध्यात्मिक चेतना तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए दूरदर्शी पहल बताया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सिरसा ने कहा कि गुरुमुखी किसी साधारण लिपि से बढ़कर गुरु साहिब से जुड़ने का जीवंत माध्यम है। इससे अलग होना गुरु से अलग होने जैसा है। यह केंद्र आने वाली पीढ़ियों के लिए विचार और आध्यात्मिक चेतना का केंद्र बनेगा।
उन्होंने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए कहा कि यह केंद्र भविष्य में गुरुमुखी के प्रचार-प्रसार, शोध और शिक्षण का राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय केंद्र बनेगा। डिजिटल युग की तेज़ रफ्तार और सोशल मीडिया के दौर में गुरुमुखी जैसी लिपि ही हमें धैर्य, स्मृति और मानवता से जोड़े रख सकती है।
सिरसा ने कहा कि इस केंद्र के अंतर्गत शिक्षकों और प्रोफेसरों के लिए लर्निंग एवं अपग्रेडेशन कार्यक्रम शुरू होंगे, जिससे देश-विदेश के शिक्षाविद गुरु तेग बहादुर साहिब और गुरु अंगद देव पातशाह की शिक्षाओं और त्याग से परिचित होंगे।
उन्होंने गुरु तेग बहादुर के 350वें प्रकाश पर्व का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे अवसरों को केवल मनाना ही नहीं, बल्कि उनका संदेश समाज और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना भी आवश्यक है। सिरसा ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सराहना करते हुए कहा कि 2014 के बाद शिक्षा व्यवस्था में सिख गुरुओं और साहिबजादों के बलिदानों को उचित स्थान मिला है, जो देश के लिए गर्व की बात है।
उन्होंने कहा कि देश में चार राष्ट्रीय दिवसों में से एक 26 दिसंबर, वीर बाल दिवस सिख कौम को समर्पित है और यह पूरे समाज के लिए गर्व का विषय है। गुरुमुखी लिपि केंद्र कौम, शिक्षा और आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण में एक मील का पत्थर साबित होगा।
कार्यक्रम में सरदार त्रिलोचन सिंह, सरदार हरमीत सिंह कालका, कॉलेज प्राचार्य, वरिष्ठ शिक्षकगण, गैर-शिक्षण कर्मचारी, छात्र-छात्राएं तथा सिख समुदाय के कई सदस्य मौजूद रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी