डीयू व उससे संबद्ध कालेजों में महिला सुरक्षा को लेकर सीसीटीवी लगाने की मांग

 




नई दिल्ली, 23 जुलाई (हि.स.)। दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) में 28 जुलाई से शुरू होने वाले शैक्षिक सत्र 2026-27 से पहले महिला छात्राओं और शिक्षिकाओं की सुरक्षा को लेकर फोरम ऑफ एकेडेमिक्स फॉर सोशल जस्टिस (शिक्षक संगठन) ने विश्वविद्यालय प्रशासन से सुरक्षा इंतजाम करने की मांग की।

संगठन ने कुलपति प्रो. योगेश सिंह को पत्र लिखकर नॉर्थ कैंपस, साउथ कैंपस तथा डीयू से संबद्ध कॉलेजों और शिक्षण संस्थानों के आसपास सीसीटीवी कैमरे लगाने, महिला पुलिस की तैनाती और ओरिएंटेशन कार्यक्रमों के दौरान विशेष सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की अपील की।

फोरम के अध्यक्ष प्रो. हंसराज सुमन ने कहा कि देशभर में चल रहे विभिन्न आंदोलनों और महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों को देखते हुए विश्वविद्यालय परिसर में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि 28 जुलाई को नए छात्रों के ओरिएंटेशन कार्यक्रम के दौरान कॉलेजों के बाहर महिला पुलिस और महिला सुरक्षा गार्डों की तैनाती की जानी चाहिए तथा पूरे परिसर की सीसीटीवी कैमरों से निगरानी होनी चाहिए।

प्रो. सुमन ने बताया कि विश्वविद्यालय ने पहले भी सांस्कृतिक कार्यक्रमों और उत्सवों के दौरान महिला शौचालयों एवं ग्रीन रूम के बाहर सीसीटीवी कैमरे लगाने के निर्देश जारी किए थे। इसी तरह नियमित दिनों में भी सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाना चाहिए ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।

उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से यह भी मांग की कि सांध्यकालीन कॉलेजों और प्रयोगशालाओं में छात्राओं एवं महिला शोधार्थियों की कक्षाओं का समय शाम 7 बजे तक सीमित किया जाए। शाम 6 से 8 बजे तक कक्षाएं होने के कारण दूरदराज और एनसीआर से आने वाली छात्राओं तथा महिला शिक्षकों को सुरक्षा और यातायात संबंधी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

फोरम ने कहा कि पिछले वर्ष क्लस्टर कक्षाओं के दौरान कई छात्राओं को देर रात घर लौटना पड़ता था, जिससे अभिभावकों में भी सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती थी। ऐसे में विश्वविद्यालय को समयबद्ध कक्षाओं और पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

प्रो. सुमन ने पत्र में लिखा है कि दिल्ली विश्वविद्यालय में नियमित कॉलेजों, महिला महाविद्यालयों, नॉन कॉलेजिएट वीमेंस एजुकेशन बोर्ड (एनसीडब्ल्यूईबी), स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग (एसओएल) तथा अन्य संस्थानों में बड़ी संख्या में छात्राएं अध्ययन कर रही हैं। इसके अलावा विश्वविद्यालय परिसर के आसपास बड़ी संख्या में छात्राएं पीजी और किराए के आवासों में रहती हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना विश्वविद्यालय प्रशासन की जिम्मेदारी है।

प्रो. सुमन के मुताबिक संगठन ने विश्वविद्यालय से मांग की है कि नए शैक्षिक सत्र की शुरुआत से पहले महिला सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए परिसर और कॉलेजों के आसपास सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं, महिला पुलिस और सुरक्षा गार्डों की तैनाती की जाए तथा शाम की कक्षाओं का समय पुनर्निर्धारित किया जाए, ताकि छात्राओं और महिला शिक्षकों के लिए सुरक्षित एवं अनुकूल शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित किया जा सके।

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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी