डीयू में तीसरा प्रोफेसर अशोक प्रसाद मेमोरियल लेक्चर, जल संरक्षण और सतत विकास पर हुई चर्चा

 


नई दिल्ली, 09 अक्टूबर (हि.स.)। दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के रसायन विज्ञान विभाग की ओर से प्रोफेसर अशोक प्रसाद मेमोरियल एजुकेशनल ट्रस्ट (पीएपीएमईटी) के सहयोग से शुक्रवार को सर शंकर लाल कॉन्सर्ट हॉल में तीसरा प्रोफेसर अशोक प्रसाद मेमोरियल लेक्चर आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जल संरक्षण, सतत विकास, वैज्ञानिक शोध, नवाचार और अपशिष्ट से उपयोगी संसाधन तैयार करने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। इसमें विभिन्न विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के 400 से अधिक विद्यार्थी तथा 200 फैकल्टी सदस्य शामिल हुए।

कार्यक्रम की शुरुआत प्रो. अशोक प्रसाद को श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ हुई। इस अवसर पर ‘प्रोफेसर अशोक प्रसाद की यात्रा’ शीर्षक से एक लघु वृत्तचित्र प्रदर्शित किया गया, जिसमें उनके शैक्षणिक सफर, शोध में योगदान और छात्रों एवं शोधकर्ताओं की पीढ़ियों पर उनके स्थायी प्रभाव को दर्शाया गया।

कार्यक्रम में ‘वॉटरमैन ऑफ इंडिया’ के नाम से प्रसिद्ध रेमन मैग्सेसे पुरस्कार और स्टॉकहोम जल पुरस्कार से सम्मानित डॉ. राजेंद्र सिंह मुख्य अतिथि रहे। दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की, जबकि इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी, मुंबई के पूर्व कुलपति पद्म प्रो. गणपति डी. यादव ने ‘वेस्ट टू वेल्थ’ विषय पर व्याख्यान दिया।

कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने प्रो. अशोक प्रसाद को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि एक शिक्षक की वास्तविक विरासत वे विद्यार्थी होते हैं, जिन्हें वह प्रेरित करता है, शिक्षा देता है और मार्गदर्शन प्रदान करता है। उन्होंने अपने शिक्षक के सम्मान में ट्रस्ट की स्थापना करने के लिए प्रो. बी. के. सिंह की सराहना की। साथ ही, पीएपीएमईटी की ओर से छात्रवृत्तियों के माध्यम से वंचित पृष्ठभूमि के मेधावी विद्यार्थियों की सहायता करने की पहल का स्वागत किया।

प्रो. सिंह ने विश्वविद्यालयों में शोध, शिक्षण और कैंपस गतिविधियों के साथ स्थिरता को जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य एक स्वच्छ और टिकाऊ राष्ट्र के निर्माण के संकल्प के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

उन्होंने विद्यार्थियों को नवाचार और उद्यमिता अपनाने के लिए प्रोत्साहित करते हुए पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर सोचने और समकालीन चुनौतियों के व्यावहारिक समाधान विकसित करने का आह्वान किया। कुलपति ने अभिनव विचारों को प्रोत्साहित करने और स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने युवा प्रतिभाओं से अपनी रचनात्मकता को सार्थक कार्यों में बदलने की अपील की।

पद्म प्रो. गणपति डी. यादव ने ‘वेस्ट टू वेल्थ’ विषय पर व्याख्यान देते हुए कृषि अवशेषों, नगरपालिका के ठोस कचरे, बेकार प्लास्टिक और औद्योगिक कार्बन को मूल्यवान कार्बन तथा उपयोगी आणविक निर्माण खंडों के स्रोत के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।

उन्होंने रासायनिक रीसाइक्लिंग, पायरोलिसिस, गैसीफिकेशन, उत्प्रेरण, कार्बन कैप्चर एवं उपयोग तथा कार्बन डाइऑक्साइड को उपयोगी उत्पादों में बदलने जैसी तकनीकों की जानकारी दी। उन्होंने इन तकनीकी उपायों के माध्यम से अपशिष्ट को मूल्यवान संसाधनों में बदलने और सतत विकास को गति देने की संभावनाओं को रेखांकित किया।

मुख्य अतिथि डॉ. राजेंद्र सिंह ने भारत की जल प्रणालियों और नदियों को पुनर्जीवित करने तथा पारंपरिक जल प्रबंधन पद्धतियों को बहाल करने की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया। राजस्थान में समुदाय के नेतृत्व में किए गए दशकों के जल संरक्षण कार्यों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक ज्ञान तभी सार्थक होता है, जब समुदाय उसे अपनाते हैं और अपनी समस्याओं के समाधान के लिए उसका उपयोग करते हैं।

उन्होंने जल संरक्षण के प्रयासों में जनभागीदारी और पारंपरिक ज्ञान के महत्व को रेखांकित करते हुए प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए सामुदायिक पहल को आवश्यक बताया।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी