अंतरराज्यीय मादक पदार्थ तस्करी नेटवर्क से जुड़ा संदिग्ध नरेला से गिरफ्तार
नई दिल्ली, 02 सितंबर (हि.स.)। दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने असम पुलिस के साथ संयुक्त कार्रवाई करते हुए अंतरराज्यीय मादक पदार्थ तस्करी नेटवर्क से जुड़े एक संदिग्ध सप्लायर को नरेला से गिरफ्तार किया है। आरोपित की पहचान अपूर्व ठाकुर (27) के रूप में हुई है। जांच में उसके साइकोट्रॉपिक टैबलेट की आपूर्ति करने वाले नेटवर्क से जुड़े होने के साथ प्रतिबंधित संगठन यूएलएफए (I) के एक सक्रिय कैडर से कथित संपर्क सामने आया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि नशे के कारोबार से होने वाली कमाई का इस्तेमाल कहीं गैरकानूनी या आतंकी गतिविधियों के लिए तो नहीं किया जा रहा था।
जानकारी के मुताबिक, अपूर्व असम के चराइदेव जिले के मथुरापुर थाने में दर्ज केस संख्या 24/2026 में वांछित था। उसके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 21(बी), 23, 27ए और 29 तथा गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम की धारा 13, 39 और 40 के तहत मामला दर्ज है। चार दिन की ट्रांजिट रिमांड मिलने के बाद असम पुलिस उसे आगे की जांच के लिए असम ले गई है। मामले की शुरुआत 17 जुलाई 2026 को हुई।
असम पुलिस ने सूचना के आधार पर माजगांव में धोधर अली रोड पर एक मारुति सुजुकी स्विफ्ट कार को रोका। तलाशी के दौरान कार में बने गुप्त चैंबर में साबुन की डिब्बियों के अंदर छिपाकर रखी 46.11 ग्राम संदिग्ध हेरोइन बरामद हुई। कार सवार डिब्रूगढ़ निवासी मनुज गोगोई को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में मनुज ने जॉयपुर, टिपाम निवासी भास्कर गोगोई का नाम बताया। भास्कर की गिरफ्तारी के बाद उसके मोबाइल की तकनीकी जांच की गई तो काकपाथर निवासी देबाशीष दहूतिया से संपर्क और एक वीआईपी नंबर के जरिये यूएलएफए (I) के कथित कैडर से बातचीत का पता चला। इसके बाद देबाशीष दहूतिया और बिटू हजारिका को पकड़ा गया। जांच में कथित यूएलएफए (I) कैडर की पहचान मृदुपवन दहूतिया के रूप में हुई, जिसके वर्ष 2011 में संगठन से जुड़ने की बात सामने आई है।
जांच आगे बढ़ी तो पुलिस को दिल्ली से असम तक फैले साइकोट्रॉपिक टैबलेट की सप्लाई नेटवर्क का पता चला। डिजिटल साक्ष्यों की जांच में दिल्ली के अपूर्व ठाकुर का नाम सामने आया। पुलिस के मुताबिक वह इस नेटवर्क को साइकोट्रॉपिक टैबलेट उपलब्ध कराने वाला संभावित स्रोत था। जांच में यह भी सामने आया कि दिल्ली से असम के लिए ऐसी ही एक खेप भेजी गई थी। भास्कर गोगोई की गिरफ्तारी के बाद पुलिस कार्रवाई की जानकारी कथित तौर पर मृदुपवन दहूतिया तक पहुंची, जिसके बाद खेप की आवाजाही रोक दी गई, ताकि वह कानून-प्रवर्तन एजेंसियों की नजर में आने से बच सके।
असम पुलिस ने 25 अगस्त को दिल्ली अपराध शाखा से अपूर्व को पकड़ने में मदद मांगी थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए एक टीम बनाई। तकनीकी और मैनुअल सर्विलांस के जरिए लगातार तलाश के बाद अपूर्व को नरेला इलाके से दबोच लिया गया। बाद में उसे चराइदेव जिला पुलिस असम के डीएसपी आर्यन नाथ के नेतृत्व वाली टीम को सौंप दिया गया। कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उसे नई दिल्ली की सक्षम अदालत में पेश किया गया, जहां से चार दिन की ट्रांजिट रिमांड मंजूर हुई।
पूछताछ और मोबाइल की जांच में कई अहम सुराग मिले हैं। पुलिस के मुताबिक अपूर्व के मोबाइल में कथित यूएलएफए (I) कैडर मृदुपवन दहूतिया के साथ वर्ष 2025 से लगातार वाट्सऐप पर बातचीत मिली है। मोबाइल में साइकोट्रॉपिक टैबलेट की एक खेप से संबंधित इनवॉयस भी मिला है। इसके अलावा वित्तीय जांच में अपूर्व और गिरफ्तार आरोपित भास्कर गोगोई की पत्नी बोबी गोगोई के बीच लाखों रुपये के पेटीएम लेनदेन का पता चला है। इस रकम के लेनदेन का उद्देश्य और पूरा स्वरूप अभी जांच का विषय है। अपूर्व मूल रूप से बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के रसूलपुर गांव का रहने वाला है और वर्तमान में नरेला में रह रहा था। वह 2016 में दसवीं तक की पढ़ाई पूरी करने के बाद दिल्ली आया था। वर्ष 2022 में मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव के रूप में काम शुरू किया और फार्मा क्षेत्र की जानकारी हासिल की। करीब एक साल बाद उसने कमीशन पर दवाओं की ट्रेडिंग का काम शुरू कर दिया। जांच में वह दिल्ली से साइकोट्रॉपिक टैबलेट की सप्लाई करने वाले संभावित स्रोत के रूप में सामने आया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव