यमुना का पुनरुद्धार हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है : विजेंद्र गुप्ता
नई दिल्ली, 18 अक्टूबर (हि.स.)। दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि हमने उस नदी को प्रदूषित होने दिया है, जिसने पीढ़ियों से हमारी सभ्यता का पोषण किया है। यमुना ने हमारे खेतों को सींचा है, हमारी आजीविका को सहारा दिया है और हमें जीवन प्रदान किया है। इस नदी को पुनर्जीवित करना केवल अपने प्रति ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति भी हमारा दायित्व है। ये विचार विजेंद्र गुप्ता ने रविवार को यमुना नदी के तट पर स्थित रैंप नंबर-3, श्याम घाट-3 पर ‘चलो यमुना अभियान’ के अंतर्गत आयोजित स्वच्छता अभियान में स्थानीय निवासियों एवं स्वयंसेवकों के साथ भाग लेते हुए व्यक्त किए।
श्रमदान में सहभागिता करते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने यमुना के पुनरुद्धार के लिए निरंतर जनभागीदारी पर आधारित जनआंदोलन का आह्वान किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि नदी का पुनर्जीवन केवल समय-समय पर आयोजित होने वाले स्वच्छता अभियानों तक सीमित न रहकर एक साझा नागरिक जिम्मेदारी बनना चाहिए।
सभा को संबोधित करते हुए विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि यमुना के पुनरुद्धार की सफलता का आकलन केवल कचरा हटाने के आधार पर नहीं, बल्कि दिल्लीवासियों के दैनिक जीवन में एक स्वच्छ एवं निर्बाध प्रवाह वाली नदी की वापसी के आधार पर किया जाना चाहिए। नदी के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अंतिम लक्ष्य यमुना के तटों और घाटों को ऐसे सुलभ सार्वजनिक स्थलों के रूप में पुनर्जीवित करना होना चाहिए, जहां परिवार एकत्रित हो सकें और आगंतुक इस परिवर्तन को प्रत्यक्ष रूप से देख सकें। उन्होंने कहा कि दिल्ली और देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले लोग यमुना के घाटों पर लौटें और अपनी आंखों से देखें कि सामूहिक संकल्प क्या हासिल कर सकता है। उन्होंने नागरिकों से स्वच्छ यमुना के संकल्प को निरंतर कार्यवाही में बदलने का आग्रह किया और कहा कि यह अभियान तब तक जारी रहना चाहिए, जब तक इसके परिणामों में सार्थक एवं स्थायी सुधार स्पष्ट रूप से दिखाई न देने लगे।
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण किसी एक राजनीतिक दल या संस्था की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि संपूर्ण समाज का साझा दायित्व है। सरकार, विधानसभा, संबंधित विभागों, संस्थानों, सामाजिक संगठनों और नागरिकों को इस दिशा में मिलकर कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि यमुना के पुनरुद्धार का संकल्प तभी सार्थक होगा, जब निरंतर जनभागीदारी सरकारी पहलों को मजबूती प्रदान करेगी और इन प्रयासों का प्रभाव नदी की वास्तविक स्थिति में दिखाई देगा। उन्होंने कहा कि हमारा सामूहिक उद्देश्य आने वाली पीढ़ियों को एक स्वच्छ नदी और स्वस्थ पर्यावरण सौंपना होना चाहिए।
यमुना के पुनरुद्धार की जिम्मेदारी केवल सरकार तक सीमित न रहने पर बल देते हुए अध्यक्ष ने स्थानीय निवासियों, गैर-सरकारी संगठनों, रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशनों (आरडब्ल्यूए), युवा समूहों और स्वयंसेवी संगठनों से समन्वित भागीदारी का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अभियान के स्थायी परिणाम सुनिश्चित करने के लिए जनसहभागिता को सरकारी पहलों का पूरक बनना होगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव