दिल्ली में हेपेटाइटिस-बी और सी की जांच व्यवस्था होगी मजबूत, 85 ट्रूनेट मशीनों का होगा इस्तेमाल
नई दिल्ली, 16 अक्टूबर (हि.स.)। दिल्ली सरकार हेपेटाइटिस-बी और हेपेटाइटिस-सी की समय पर जांच और मरीजों के बेहतर उपचार के लिए मौजूदा आणविक जांच मशीनों का उपयोग करेगी। राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम के तहत उपलब्ध 85 ट्रूनेट मशीनों की मदद से विषाणु भार की जांच की सुविधा को मजबूत करने की योजना है। इसके लिए वर्ष 2026-27 में हेपेटाइटिस-बी और हेपेटाइटिस-सी की जांच के लिए अलग-अलग 2,500 ट्रूनेट चिप्स की मांग की गई है।
दिल्ली सरकार की इस पहल का उद्देश्य मौजूदा स्वास्थ्य संसाधनों का बेहतर उपयोग करना, जांच की क्षमता बढ़ाना और राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के बीच समन्वय मजबूत करना है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत हेपेटाइटिस-बी और हेपेटाइटिस-सी से संक्रमित पाए जाने वाले मरीजों के विषाणु भार की जांच के लिए राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत उपलब्ध ट्रूनेट आणविक जांच मशीनों का इस्तेमाल किया जाएगा।
योजना के शुरुआती चरण में प्रत्येक जिले में हेपेटाइटिस-बी और सी के विषाणु भार की जांच के लिए एक ट्रूनेट मशीन निर्धारित करने का प्रस्ताव है। इसके लिए राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम के राज्य कार्यक्रम अधिकारी की सहमति आवश्यक होगी। इससे जांच संबंधी कमियों को दूर करने और राष्ट्रीय विषाणुजनित हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम के उद्देश्यों को पूरा करने में मदद मिलेगी।
इस पहल के तहत हेपेटाइटिस-बी और हेपेटाइटिस-सी की जल्द पहचान के लिए महिलाओं, विशेषकर गर्भवती महिलाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। व्यापक जांच व्यवस्था में चलित एक्स-रे सुविधाओं का भी उपयोग शामिल है, ताकि स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की समय रहते पहचान कर जरूरत के अनुसार आगे की जांच कराई जा सके।
दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने कहा कि विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के तहत उपलब्ध संसाधनों को एकीकृत करके मौजूदा स्वास्थ्य ढांचे का प्रभावी उपयोग किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार का जोर जांच सेवाओं को मजबूत करने और नागरिकों को समय पर जांच की सुविधा उपलब्ध कराने पर है। इससे बीमारी की समय रहते पहचान और उचित उपचार की संभावनाएं बढ़ेंगी। विशेष रूप से कमजोर वर्गों के लोगों को इसका लाभ मिलेगा।
इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए वर्ष 2026-27 में हेपेटाइटिस-बी और हेपेटाइटिस-सी की जांच के लिए अलग-अलग 2,500 ट्रूनेट चिप्स की मांग केंद्रीय कार्यक्रम प्रभाग को भेजी गई है। इस प्रकार कुल 5,000 चिप्स की मांग की गई है। राष्ट्रीय विषाणुजनित हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम की केंद्रीय इकाई ने बताया है कि विषाणु भार की जांच में मौजूद कमियों को दूर करने और कार्यक्रम के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए आवश्यक चिप्स की खरीद केंद्र सरकार द्वारा की जाएगी।
जांच क्षमता बढ़ाने के लिए तकनीशियनों को प्रोत्साहित करने की योजना भी बनाई जा रही है। काम के बोझ और संचालन संबंधी जरूरतों के आधार पर मौजूदा आणविक जांच मशीनों का इस्तेमाल नियमित कामकाजी समय के बाद और छुट्टियों के दिनों में भी किया जा सकता है। इससे उपलब्ध मशीनों का बेहतर उपयोग होगा और जांच की क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
दिल्ली सरकार का लक्ष्य इस एकीकृत पहल के माध्यम से जांच सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाना, मौजूदा स्वास्थ्य सुविधाओं का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना तथा हेपेटाइटिस-बी और हेपेटाइटिस-सी के मामलों की समय पर पहचान और उपचार को बढ़ावा देना है। प्रत्येक जिले में जांच मशीन निर्धारित करने की प्रक्रिया आवश्यक सहमति और संचालन योजना के आधार पर आगे बढ़ाई जाएगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी