बारिश से फसल गंवाने वाले किसानों को 33.31 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता
नई दिल्ली, 17 जुलाई (हि.स.)। दिल्ली सरकार ने वर्ष 2025 में अगस्त-सितंबर के दौरान हुई भारी बारिश और जलभराव से 100 प्रतिशत फसल नुकसान झेलने वाले किसानों के लिए 33.31 करोड़ रुपये से अधिक की अनुग्रह सहायता राशि मंजूर की है। सरकार प्रभावित किसानों को 75,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से राहत देगी। यह राशि अगले महीने डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जाएगी।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने राजस्व विभाग और सभी जिलाधिकारियों को राहत राशि के वितरण की प्रक्रिया बिना किसी देरी के शुरू करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों के हर सुख-दुख में उनके साथ खड़ी है और यह सहायता प्राकृतिक आपदा से हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई का एक प्रयास है।
सरकार के अनुसार, इस योजना के तहत 4,442.41 हेक्टेयर प्रभावित कृषि भूमि को शामिल किया गया है। विभिन्न जिलों और सब-डिवीजनों के लिए करोड़ों रुपये की सहायता राशि स्वीकृत की गई है। इसके तहत अलीपुर (नरेला) के 364.74 हेक्टेयर प्रभावित क्षेत्र के लिए 2.74 करोड़ रुपये, बुराड़ी के 17.33 हेक्टेयर के लिए 13 लाख रुपये, पंजाबी बाग (मुंडका) के 51.50 हेक्टेयर के लिए 38.63 लाख रुपये और विकासपुरी के 26.55 हेक्टेयर प्रभावित क्षेत्र के लिए 19.92 लाख रुपये की सहायता राशि मंजूर की गई है।
इसी प्रकार कंझावला क्षेत्र के अंतर्गत मुंडका और बवाना में कुल 1,758.76 हेक्टेयर प्रभावित कृषि भूमि के लिए क्रमश 8.70 करोड़ रुपये और 4.49 करोड़ रुपये की सहायता राशि स्वीकृत की गई है। रोहिणी (मुंडका) के 137.59 हेक्टेयर प्रभावित क्षेत्र के लिए 1.03 करोड़ रुपये, कापसहेड़ा (मटियाला) के 625.93 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए 4.69 करोड़ रुपये, जबकि नजफगढ़ और मटियाला के अंतर्गत कुल 1,459.97 हेक्टेयर प्रभावित क्षेत्र के लिए क्रमशः 9.98 करोड़ रुपये तथा 96.74 लाख रुपये की सहायता राशि मंजूर की गई है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि योजना के लिए शर्तें तय की हैं कि सहायता राशि केवल वास्तविक और पात्र किसानों तक पहुंचे। जिनकी फसल अगस्त-सितंबर 2025 की भारी बारिश एवं जलभराव से पूरी तरह नष्ट हुई थी। कॉरपोरेट स्वामित्व वाली भूमि, ग्राम सभा की जमीन पर खेती और पक्की बाउंड्री वॉल वाले विकसित फार्म हाउस इस योजना के दायरे से बाहर रहेंगे।
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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी