दिल्ली सरकार ने डीटीसी के साथ वेस्ट रीजन के लिए की नया रूट रेशनलाइजेशन लागू करने की शुरुआत
नई दिल्ली, 20 जनवरी (हि.स.)। दिल्ली सरकार ने मंगलवार को दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) के साथ वेस्ट रीजन के लिए नया रूट रेशनलाइजेशन लागू करने की शुरुआत की, जिसका मकसद लास्ट माइल कनेक्टिविटी को और बेहतर बनाना, सार्वजनिक परिवहन सेवा की विश्वसनीयता को बढ़ाना और राजधानी में बस यात्रियों को लास्ट माइल कनेक्टिविटी सुविधाएं प्रदान करना है।
दिल्ली के परिवहन मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने आज जारी एक बयान में जानकारी कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि बस यात्री को यात्रा करते समय किसी भी तरह की असुविधा न हो। उन्होंने बताया कि वेस्ट रीजन में रूटों का रेशनलाइज़ेशन विश्वसनीयता बढ़ाने, यात्रियों की प्रतीक्षा समय को कम करने और सेवाओं में सुधार लाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
डॉ. पंकज सिंह ने बताया कि नया रूट रेशनलाइजेशन स्ट्रक्चर बुधवार 21 जनवरी से लागू हो जाएगा। यह पहल ट्रांसपोर्ट यमुना रीजन (ईस्ट) में सफल रूट रेशनलाइज़ेशन के बाद लागू की जा रही है, जिसके बाद अगला चरण बहुत जल्द उत्तर जोन में शुरू होगा।
उन्होंने कहा कि वेस्ट रीजन में यह रूट रेशनलाइज़ेशन ऐसे समय में लागू किया जा रहा है, जब राजधानी में वैधानिक दिशा-निर्देशों के अनुसार 15 वर्ष पुरानी डीटीसी की सीएनजी लो-फ्लोर बसों को धीरे-धीरे चरणबद्ध तरीके से हटाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि वेस्ट रीजन में ऑपरेशनल कंटिन्यूटी बनाए रखने, बसों के फ्लीट के इस्तेमाल को ऑप्टिमाइज करने और यात्रियों के प्रतीक्षा समय को कम करने के लिए सुविधा की रुपरेखा तैयार की गई। इसके साथ यह भी सुनिश्चित किया गया है कि 12 मीटर वाला कोई भी रूट बंद न हो सके बल्कि बस रूट को डिमांड, यात्रियों के राइडरशिप पैटर्न और कॉरिडोर की अहमियत के आधार पर रूट्स को वैज्ञानिक तरीके से रीऑर्गेनाइज़ किया गया है। पीक आवर्स वाले समय में राजधानी में बस यात्रियों को बेहतर और सुगम सेवा प्रदान करने के लिए यूनिफाइड टाइम टेबल के तहत अतिरिक्त बसें भी तैनात की गई हैं।
उन्होंने कहा कि इस रूट रेशनलाइजेशन में 9 मीटर वाली देवी इलेक्ट्रिक बसों की तैनाती भी शामिल है, जिसके तहत मौजूदा इलेक्ट्रिक बस प्लीट का लगभग 50 फीसदी हिस्सा इन चुनिंदा 12 मीटर वाले रूटों पर डीटीसी बस सेवा की निरंतरता बनाए रखने के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अतरिक्त वेस्ट जोन में कुछ सीएनजी डिपो एवं बसों के बंद होने के चलते प्रभावित रूट्स के लिए भी रूट रेशनलाइजेशन के जरिए सही एडजस्टमेंट किए जा रहे हैं। इस कदम से वेस्ट रीजन के सभी 181 रूट्स पर बसों की सर्विस डिलीवरी और बेहतर हुई है।
पंकज सिंह ने कहा कि सरकार बनने के बाद राजधानी में पब्लिक ट्रांसपोर्ट के बेड़े में अबतक 3600 से ज़्यादा इलेक्ट्रिक बसों को शामिल किया जा चुका है। दिल्ली सरकार का लक्ष्य मार्च 2026 तक इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ाकर पांच हजार से ज्यादा करने की है और नवंबर तक इसे बढ़ाकर सात हजार से ज्यादा तक पहुंचाने का लक्ष्य है ताकि प्रत्येक नागरिक के लिए एक सशक्त और अधिक कुशल मॉडर्न पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम का निर्माण कर सकें।
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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी