दिल्ली सरकार का अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ अभियान जारी, 94 संपत्तियों को किया ध्वस्त

 




नई दिल्ली, 06 जून (हि.स.)। दिल्ली सरकार अवैध निर्माण और अतिक्रमण पर जीरो टॉलरेंस नीति का सख्ती से पालन कर रही है। इसके तहत राजधानी में अवैध निर्माणों के खिलाफ बड़े स्तर पर अभियान जारी है। इस एक्शन के तहत विभिन्न एजेंसियों द्वारा व्यापक कार्रवाई की जा रही है, जिसमें अवैध संपत्तियों का ध्वस्तीकरण, सीलिंग एवं कारण बताओ नोटिस आदि बड़े पैमाने पर हो रहे हैं।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शनिवार को एक विज्ञप्ति जारी कर कहा कि सरकार राजधानी में अनधिकृत निर्माण, अतिक्रमण, अग्नि सुरक्षा मानकों के उल्लंघन तथा नागरिकों के जीवन और संपत्ति के लिए खतरा पैदा करने वाली किसी भी गतिविधि के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत कार्य कर रही है। सरकार केवल कार्रवाई नहीं कर रही बल्कि एक ऐसी स्थायी व्यवस्था विकसित कर रही है, जिससे भविष्य में ऐसे खतरनाक और अवैध निर्माणों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार के राजस्व विभाग, दिल्ली नगर निगम, दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) एवं अन्य संबंधित एजेंसियों द्वारा राजधानी के विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर प्रवर्तन अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि राजस्व विभाग ने 124 प्रॉपर्टी की जांच की और उल्लंघन पाए जाने पर कार्रवाई की। इसी तरह बीते छह दिनों की अवधि में दिल्ली नगर निगम ने कुल 94 संपत्तियों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की और 114 संपत्तियों को सील किया। इसके अलावा डीडीए को अतिक्रमण और अवैध निर्माणों के खिलाफ अपने प्रवर्तन तंत्र को और मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दिल्ली में ऐसा कोई निर्माण, व्यावसायिक गतिविधि या सार्वजनिक उपयोग की व्यवस्था संचालित न हो जो लोगों के जान-माल की सुरक्षा के लिए खतरा उत्पन्न करे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार केवल कार्रवाई तक सीमित नहीं है बल्कि समस्या के स्थायी समाधान पर भी एक्शन मोड में काम कर रही है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि ऐसे भवनों, गेस्ट हाउस, नर्सिंग होम और अन्य सार्वजनिक उपयोग की इमारतों के लिए थर्ड पार्टी इंश्योरेंस व्यवस्था विकसित करने की संभावनाओं पर कार्य किया जाए, जहां बड़ी संख्या में लोगों का आवागमन होता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बीमा कंपनियां तभी बीमा कवर उपलब्ध कराएंगी जब संबंधित भवनों की संरचनात्मक सुरक्षा और आवश्यक सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित होगा। इससे भवन स्वामियों पर सुरक्षा नियमों के अनुपालन का अतिरिक्त दबाव बनेगा और सार्वजनिक सुरक्षा को मजबूत करने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि दमकल विभाग की रेस्पॉन्स प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए डिजिटल ट्रैकिंग प्रणाली विकसित करने के भी निर्देश दिए गए हैं।

दिल्ली सरकार के राजस्व विभाग ने विभिन्न जिलों में कुल 124 स्थलों का निरीक्षण किया। विभाग के अनुसार उत्तर जिले में 10 स्थलों के निरीक्षण के बाद उल्लंघनकर्ताओं को नोटिस जारी किए गए। पूर्वी जिले में 10, पश्चिम जिले में 21, दक्षिण-पश्चिम जिले में 13 तथा मध्य जिला (उत्तर) में 10 स्थलों के निरीक्षण के बाद भी नोटिस जारी किए गए। दक्षिण जिले में 30 स्थलों के निरीक्षण के दौरान 11 परिसरों को सील किया गया तथा 19 मामलों में कारण बताओ नोटिस जारी किए गए। बाहरी उत्तर जिले में भवन उपविधियों के उल्लंघन के कारण तीन अनधिकृत भवन ध्वस्त किए गए। नई दिल्ली जिले में सीलिंग नोटिस जारी किए गए, जबकि मध्य जिले में क्लोजर नोटिस जारी किए गए। पुरानी दिल्ली जिले में अग्निशमन विभाग का एनओसी उपलब्ध पाया गया, लेकिन भवन स्वीकृति योजना नहीं मिलने पर मामला आवश्यक कार्रवाई के लिए दिल्ली नगर निगम को भेजा गया। दक्षिण-पूर्व जिले में निरीक्षण के दौरान कोई उल्लंघन नहीं पाया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राजधानी में अवैध निर्माणों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत 1 जून से 6 जून तक दिल्ली नगर निगम ने कुल 94 संपत्तियों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की, जबकि 114 संपत्तियों को सील किया गया। साथ ही, अनधिकृत निर्माण के मामलों में 84 कारण बताओ नोटिस जारी किए गए, 41 प्रॉपर्टी को सीलिंग का नोटिस भेजा गया और 33 ध्वस्तीकरण आदेश जारी किए गए। इस अभियान के दौरान दिल्ली नगर निगम ने अवैध निर्माणों के विरुद्ध कानूनी और भौतिक दोनों स्तरों पर कार्रवाई को तेज किया। विभाग ने न केवल अवैध निर्माणों को हटाने की कार्रवाई की, बल्कि भविष्य में ऐसी गतिविधियों को रोकने के लिए नोटिस और आदेश जारी करने की प्रक्रिया भी निरंतर जारी रखी।

मुख्यमंत्री ने बताया कि दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के उपाध्यक्ष (वीसी) की अध्यक्षता में शुक्रवार को उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई थी। इसमें डीडीए के अधिकार क्षेत्र में आने वाले क्षेत्रों में अतिक्रमण, अनधिकृत निर्माणों की रोकथाम और उन्हें हटाने के लिए प्रवर्तन तंत्र को और प्रभावी बनाने पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में आयुक्त, अतिरिक्त आयुक्त, निदेशक स्तर के अधिकारी शामिल हुए थे। इस दौरान डीडीए भूमि पर हो रहे अतिक्रमण तथा विकास क्षेत्र में होने वाले अनधिकृत निर्माणों की स्थिति और वर्तमान प्रवर्तन व्यवस्था की समीक्षा की गई। समीक्षा के बाद उपाध्यक्ष ने भवन विभाग को विशेष अभियान चलाकर ऐसे भवनों की पहचान करने के निर्देश दिए, जिनमें स्वीकृत भवन नक्शों के मुकाबले बड़े पैमाने पर उल्लंघन पाए गए हों। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि अगर किसी भवन में स्वीकृत भवन योजना का गंभीर उल्लंघन पाया जाता है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई के साथ-साथ संबंधित वास्तुकार (आर्किटेक्ट) को पैनल से हटाने और उसे ब्लैकलिस्ट करने जैसी कठोर कार्रवाई भी तत्काल की जाएगी।

बैठक में भूमि पूलिंग क्षेत्र (लैंड पूलिंग एरिया) और दिल्ली विकास अधिनियम 1957 के तहत अधिसूचित विकास क्षेत्रों में डीडीए भूमि पर हुए अतिक्रमणों और अनधिकृत निर्माणों पर भी विशेष चर्चा की गई। इस संबंध में उपाध्यक्ष ने डीडीए की फ्लाइंग स्क्वॉड और क्विक रिस्पॉन्स टीमों (क्यूआरटी) को मौजूदा व्यवस्था के तहत ऐसे मामलों की पहचान कर उन्हें हटाने की कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए।

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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव