विजेंद्र गुप्ता ने उपराज्यपाल से दिल्ली में 'ऑडिबल ट्रैफिक सिग्नल' लगाने का किया आग्रह

 


नई दिल्ली, 17 मार्च (हि.स.)। दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू को पत्र लिख कर राष्ट्रीय राजधानी के ट्रैफिक लाइटों पर 'ऑडिबल सिग्नल' (ध्वनि-आधारित संकेत) लगाने का आग्रह किया है।

विजेंद्र गुप्ता ने पत्र में एम्स के डॉ. राजेंद्र प्रसाद नेत्र विज्ञान केंद्र के चिंताजनक आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि दिल्ली में लगभग 60 लाख लोग विभिन्न प्रकार की दृष्टि संबंधी समस्याओं से पीड़ित हैं। इनमें से लगभग 12 से 18 लाख लोग गंभीर 'लो विजन' के साथ जी रहे हैं, जिनमें से कई वरिष्ठ नागरिक हैं। वर्तमान यातायात प्रणाली उन लोगों के लिए पूरी तरह अपर्याप्त है जो केवल दृश्य संकेतों पर निर्भर नहीं रह सकते। सोमवार को लिखे पत्र में इस बात पर भी बल दिया गया है कि सुलभ क्रॉसिंग सहायता की कमी के कारण दुर्घटनाओं का खतरा निरंतर बना रहता है और यह आबादी के एक बड़े वर्ग की गतिशीलता को सीमित करता है।

विधानसभा अध्यक्ष ने उन सफल अंतरराष्ट्रीय मॉडलों का भी उदाहरण दिया जहां चौराहों पर बीप या टिक-टिक जैसी ध्वनियाँ एक मानक विशेषता बन चुकी हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि जापान, यूनाइटेड किंगडम, संयुक्त राज्य अमेरिका, हांगकांग, सिंगापुर, फ्रांस, स्वीडन, ब्राजील और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों ने पैदल यात्री सुलभता में सुधार के लिए इन प्रणालियों को सफलतापूर्वक अपनाया है।

विजेंद्र गुप्ता ने विशेष रूप से जापान में उपयोग की जाने वाली मेलोडिक या पक्षियों जैसी मधुर आवाजों का जिक्र किया, जो पैदल यात्रियों को यह पहचानने में मदद करती हैं कि सड़क पार करना कब सुरक्षित है, जिससे एक अधिक संवेदनशील और उपयोगकर्ता-अनुकूल शहरी वातावरण तैयार होता है। उन्होंने रेखांकित किया कि प्रमुख यातायात चौराहों पर ऑडिबल सिग्नल लगाना केवल एक तकनीकी सुधार नहीं है, बल्कि यह मानवीय गरिमा और सुरक्षा की दृष्टि से एक अनिवार्य आवश्यकता है। विधानसभा अध्यक्ष ने उपराज्यपाल से इस प्रस्ताव की समीक्षा करने और दिल्ली की सड़कों को हर नागरिक के लिए सुरक्षित बनाने को लेकर इसे प्राथमिकता के आधार पर लागू करने का अनुरोध किया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव