दिल्ली विधानसभा सचिवालय ने पंजाब पुलिस को 15 जनवरी तक रिपोर्ट सौंपने का दिया समय

 


नई दिल्ली, 13 जनवरी (हि.स.)। दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने मंगलवार को बीते 6 जनवरी को विपक्ष के नेता द्वारा प्रयोग किए गए अमर्यादित और आपत्तिजनक शब्दों से उत्पन्न हालिया घटनाक्रम पर कहा कि पंजाब पुलिस ने 10 दिन का समय मांगा है, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली विधानसभा सचिवालय ने उन्हें केवल तीन दिन यानी 15 जनवरी तक रिपोर्ट सौंपने का समय दिया है।

विजेंद्र गुप्ता ने दिल्ली सचिवालय में आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए दिल्ली विधानसभा सचिवालय ने पंजाब पुलिस को इस मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए 48 घंटे का समय दिया था, जिसके जवाब में उन्होंने 10 दिन का समय मांगा था।

अध्यक्ष ने बताया कि विधानसभा सचिवालय द्वारा पंजाब के डीजीपी, स्पेशल डीजीपी (साइबर सेल) तथा जालंधर के पुलिस आयुक्त को नोटिस जारी किए गए हैं। पंजाब पुलिस ने यह दावा किया कि एफआईआर दर्ज करना और फॉरेंसिक जांच कुछ ही घंटों में कर दी गई, किंतु विधानसभा के नोटिस का जवाब देने के लिए दस दिन का समय मांगा गया है। अध्यक्ष ने कहा कि इससे जांच एजेंसी की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न उत्पन्न होते हैं। उन्होंने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए सचिवालय ने स्पष्ट कर दिया है कि पूर्ण रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए केवल तीन दिन का समय दिया गया है।

गुप्ता ने कहा कि यह मामला दिल्ली विधानसभा के अधिकार क्षेत्र से संबंधित है और सभी मूल वीडियो एवं दस्तावेज विधानसभा की संपत्ति हैं। उन्होंने यह प्रश्न उठाए कि पंजाब सरकार ने फॉरेंसिक जांच कैसे प्रारंभ की, आदेश किसने और किस आधार पर जारी किए तथा कौन-सा वीडियो सामग्री जांच के लिए ली गई, जबकि न तो विधानसभा से संपर्क किया गया और न ही कोई दस्तावेज मांगे गए।

मामले को कानूनी रूप से संवेदनशील और जनता की भावनाओं से सीधे जुड़ा हुआ बताते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि घटनाक्रम स्पष्ट रूप से राजनीतिक हस्तक्षेप की ओर संकेत करता है और यह उन लोगों द्वारा किया जा रहा है जो दिल्ली विधानसभा में विपक्ष की भूमिका में हैं। उन्होंने कहा कि सदन की गरिमा को कमजोर करने की किसी भी साजिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

अध्यक्ष ने बताया कि 6 जनवरी की घटना ने सदन के कार्य संचालन को गंभीर रूप से बाधित किया और विपक्ष के नेता के सदन में उपस्थित न होने के कारण लगातार व्यवधान उत्पन्न हुए।

उन्होंने कहा कि 7 जनवरी को सदन की कार्यवाही से संबंधित वीडियो देखने के बाद यह स्पष्ट हुआ कि विपक्ष द्वारा की गई टिप्पणियों से लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं, विशेष रूप से इसलिए कि वे पूज्य गुरुओं के प्रति अश्रद्धा के रूप में देखी गईं। सदस्यों की सर्वसम्मति थी कि विपक्ष के नेता सदन में आएं और बिना शर्त क्षमा मांगें, किंतु ऐसा नहीं हुआ, जिसके परिणामस्वरूप छह, सात और आठ जनवरी को कार्यवाही बाधित रही।

विजेंद्र गुप्ता ने आगे बताया कि मामले की गंभीरता और भावनात्मक पहलू को देखते हुए 8 जनवरी को निर्णय लिए गए और विपक्ष के ही अनुरोध पर वीडियो सामग्री को फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) को जांच के लिए भेजा गया।

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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी