प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नेतृत्व में नये भारत की ‘आर्ट कैपिटल’ बनेगी दिल्ली : कपिल मिश्रा
नई दिल्ली, 07 अप्रैल (हि.स.)। दिल्ली के पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली नये भारत की ‘आर्ट कैपिटल’ बनेगी। उन्होंने कहा कि फिल्म फेस्टिवल दिल्ली (आईएफएफडी) का सफल आयोजन करके दिल्ली की क्रिएटिव इकोनॉमी और ऑरेंज इकोनॉमी को मजबूत करने की दिशा में सार्थक प्रयास रहा।
कपिल मिश्रा ने मंगलवार को विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा कि पहले आईएफएफडी में रिकॉर्ड 100 से अधिक देशों की 2187 फिल्मों की एंट्री मिली। आयोजन के तहत 47 देशों की 125 से अधिक फिल्मों का भारत मंडपम सहित दिल्ली भर में 15 जगहों पर प्रदर्शन हुआ, जिसका भारतीय व विदेशी दर्शकों ने आनंद उठाया। इस वर्ष स्पेन को “कंट्री ऑफ फोकस” तथा सिंगापुर अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव को आधिकारिक साझेदार के रूप में शामिल किया गया, जिससे आयोजन को वैश्विक आयाम मिला।
कपिल मिश्रा ने कहा कि इस फिल्म फेस्टिवल के लिए दुनियाभर से 30 हजार से अधिक रजिस्ट्रेशन प्राप्त हुए, जो इस फिल्म फेस्टिवल को मिले व्यापक समर्थन को दिखाता है। फिल्मकारों, कलाकारों और युवाओं की सक्रिय भागीदारी ने इस आयोजन को एक वैश्विक पहचान दी है। यह महोत्सव केवल फिल्मों का प्रदर्शन नहीं, बल्कि सीखने, संवाद और रचनात्मक अभिव्यक्ति का एक बड़ा मंच बनकर उभरा है।
उन्होंने कहा कि महोत्सव के दौरान दिल्ली पर्यटन विभाग एवं प्रसार भारती के मध्य एक एमओयू पर हस्ताक्षर भी किए गए, जिसके तहत दिल्ली में फिल्म पर्यटन और प्रसारण के क्षेत्र में नए अवसरों को बढ़ावा मिलेगा।
कपिल मिश्रा ने कहा कि महोत्सव में आयोजित मास्टरक्लास, वर्कशॉप और एआई, ओटीटी तथा नई तकनीकों पर हुई चर्चाओं ने युवाओं और फिल्म जगत से जुड़े प्रतिभागियों को नई दिशा प्रदान की है। एआई फिल्ममेकिंग हैकाथॉन का आयोजन भी किया गया।
मंत्री ने कहा कि हमारा उद्देश्य दिल्ली को एक स्थायी फिल्म हब के रूप में विकसित करना है, जहां फिल्म निर्माण, प्रशिक्षण और नवाचार के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध हों। उन्होंने बताया कि आईएफएफडी में 6 फिल्म प्रोजेक्ट्स को शॉर्टलिस्ट किया गया है और इस फेस्टिवल से निकलने वाली 3 फिल्में आने वाले समय में पूरे देश में देखी जाएंगी।
महोत्सव के अंतर्गत आयोजित सिने एक्सचेंज ने फिल्म उद्योग के लिए एक सशक्त मंच के रूप में कार्य किया, जहाँ 15 सह-निर्माण परियोजनाएं और 4 निर्माणाधीन परियोजनाएँ प्रस्तुत की गईं। वहीं सिनेवर्स एक्सपो के माध्यम से नीति, तकनीक और फिल्म से जुड़ी विरासत का व्यापक प्रदर्शन हुआ, जिसमें देश के 12 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों की सक्रिय भागीदारी रही।
अंतरराष्ट्रीय सिनेमा के साथ-साथ भारतीय मुख्यधारा और क्षेत्रीय सिनेमा (12 भाषाओं में), वृत्तचित्र, लघु फिल्में, प्रयोगात्मक सिनेमा तथा एआई-आधारित फिल्मों को भी मंच प्रदान किया गया।
मंत्री ने आयोजन से जुड़े सभी कलाकारों, फिल्मकारों, तकनीकी विशेषज्ञों, आयोजकों और दर्शकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आईएफएफडी ने न केवल सिनेमा के विविध रूपों को प्रस्तुत किया, बल्कि दिल्ली को एक ऐसे शहर के रूप में स्थापित किया है जहां कला, संस्कृति और तकनीक का संगम देखने को मिलता है। उन्होंने कहा कि यह महोत्सव दिल्ली की रचनात्मक ऊर्जा और सांस्कृतिक समृद्धि का प्रतीक बनकर उभरा है। आने वाले वर्षों में आईएफएफडी को और बड़े स्तर पर आयोजित किया जाएगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव