जलभराव से निपटने के लिए दिल्ली के सभी 13 जिलों में जिला स्तरीय समन्वय समितियों का गठन

 




नई दिल्ली, 21 जुलाई (हि.स.)। दिल्ली में जलभराव की समस्या से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सभी 13 जिलों में जिला स्तरीय समन्वय समितियों (डीएलसीसी) का गठन किया गया है। इन समितियों का उद्देश्य जलभराव की रोकथाम के लिए एहतियाती कदम उठाना, मानसून की तैयारियों से संबंधित रणनीति और मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) के प्रभावी कार्यान्वयन की निगरानी करना तथा मानसून के दौरान और बाद में जलभराव की रोकथाम और उससे निपटने के लिए आवश्यक उपाय सुनिश्चित करना है। यह जानकारी मंगलवार को दिल्ली सरकार के जरिए विज्ञप्ति में दी गई।

सिंचाई व बाढ़ नियंत्रण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव की ओर से जारी आदेश के अनुसार प्रत्येक जिला स्तरीय समन्वय समिति के अध्यक्ष संबंधित जिले के डीएम (जिला मजिस्ट्रेट) होंगे। समिति में संबंधित नगर निगम के उपायुक्त, सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग के संबंधित कार्यकारी अभियंता, लोक निर्माण विभाग के संबंधित कार्यकारी अभियंता, संबंधित नगर निगम/नई दिल्ली नगरपालिका परिषद/दिल्ली छावनी बोर्ड के संबंधित कार्यकारी अभियंता, दिल्ली जल बोर्ड और दिल्ली विकास प्राधिकरण के संबंधित कार्यकारी अभियंता तथा संबंधित जिले के अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (यातायात) शामिल होंगे। संबंधित जिले बिजली कंपनियों बीएसईएस/टीपीडीडीएल के प्रतिनिधि समिति के सदस्य होंगे, जबकि संबंधित जिले के एडीएम (अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट) सदस्य सचिव होंगे।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के निर्देश पर गठित जिला स्तरीय समन्वय समितियां जिला स्तर पर मानसून की तैयारियों से जुड़े उपायों के प्रभावी क्रियान्वयन और उनकी निगरानी की जिम्मेदारी संभालेंगी। ये समितियां राज्य स्तरीय समन्वय समिति (एसएलसीसी) द्वारा तैयार मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) के कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के साथ-साथ सड़कों तथा सभी प्रकार के नालों के प्रबंधन से जुड़े विभागों के बीच परिचालन संबंधी मुद्दों पर अंतर-विभागीय समन्वय स्थापित करेंगी। समितियां नालों के आपस में जुड़ने वाले बिंदुओं पर संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय, बेलमाउथ की सफाई, नालों की गाद निकालने, अस्थायी पंपों की तैनाती और जलभराव वाले संवेदनशील स्थानों के निरीक्षण जैसे महत्वपूर्ण कार्यों की निगरानी भी करेंगी। इसके अतिरिक्त जलभराव की संभावना वाले संवेदनशील स्थानों की पहचान, जमीनी स्तर पर तैयारियों की निगरानी और समस्याओं के समयबद्ध समाधान में भी समितियां महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इन समितियों का उद्देश्य विभिन्न विभागों और एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल के माध्यम से जलभराव की रोकथाम और उसके प्रभाव को कम करना है, ताकि मानसून के दौरान जनसुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और दिल्ली में नागरिक सेवाएं निर्बाध रूप से जारी रहें।

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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव