मुख्यमंत्री ने मासिक धर्म स्वच्छता दिवस पर प्रधानाचार्यों के साथ किया संवाद

 


नई दिल्ली, 28 मई (हि.स.)। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने विश्व मासिक धर्म स्वच्छता दिवस के अवसर पर गुरुवार को सरकारी स्कूलों के प्रधानाचार्यों और शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सीधा संवाद किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने छात्राओं के स्वास्थ्य, स्वच्छता, मानसिक सशक्तीकरण और स्कूलों में बेहतर सुविधाओं को लेकर विस्तार से चर्चा की और प्रधानाचार्यों को कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपीं।

मुख्यमंत्री जन सेवा सदन में आयोजित इस इस महत्वपूर्ण बैठक में दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद, शिक्षा निदेशक वेदिता रेड्डी व शिक्षा विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने भी भाग लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब हमारी बेटियां स्कूल में पढ़ती हैं और वे प्राकृतिक जैविक प्रक्रिया से गुजरती हैं, तब शिक्षकों और प्रधानाचार्यों की भूमिका केवल प्रशासक की नहीं बल्कि अभिभावक की भी होती है। इन विशेष दिनों में कई बेटियां असहज महसूस करती हैं, स्कूल नहीं आ पातीं और उनका पढ़ाई में मन नहीं लगता। ऐसे समय में उन्हें अपनापन, विश्वास और संवेदनशीलता की आवश्यकता होती है।

मुख्यमंत्री ने प्रधानाचार्यों से कहा कि छात्राओं को यह समझाया जाए कि मासिक धर्म सामान्य प्रक्रिया है और इसे लेकर किसी प्रकार का डर या संकोच नहीं होना चाहिए। स्कूलों में ऐसा वातावरण बनाया जाए जहां वे खुलकर अपनी समस्याएं साझा कर सकें और उन्हें मानसिक दबाव से बाहर निकालने में मदद मिले।

बैठक में मुख्यमंत्री ने स्कूलों के टॉयलेट ब्लॉकों की खराब स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें शिकायतें मिली हैं कि कुछ स्कूलों के शौचालय ठीक स्थिति में नहीं हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी स्कूलों के टॉयलेट ब्लॉक साफ-सुथरे हों, दरवाजों में किसी प्रकार की टूट-फूट न हो और आवश्यक मरम्मत कार्य समय पर पूरे किए जाएं। इसके लिए स्कूल फंड का उपयोग करने अथवा इस समस्या के समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों से भी बात की जाए।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने ‘मेंस्ट्रुअल हेल्थ मैटर्स’ अभियान के अंतर्गत कई बड़े और महत्वपूर्ण नीतिगत फैसलों की घोषणा की। इस अभियान के तहत सरकारी स्कूलों, सरकारी कार्यालयों, सार्वजनिक शौचालयों और आरोग्य मंदिरों में लगी सैनेटरी पैड वेंडिंग मशीन्स की नियमित मेंटेनेंस और टाइमली रीफिल सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष एडवाइजरी जारी की जाएगी। स्कूली स्तर पर इस जागरूकता को और पुख्ता करने के लिए कक्षा 6 से 9 तक के पाठ्यक्रम में मेंस्ट्रुअल हेल्थ एजुकेशन को और अधिक मजबूत और प्रभावी बनाया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि बच्चियों को पीरियड्स के अलावा पीसीओएस, एनीमिया, सर्वाइकल कैंसर, मेनोपॉज और एचपीवी वैक्सीनेशन जैसे स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों के बारे में भी जागरूक किया जाएगा। इसके लिए आरोग्य मंदिरों में नियमित हेल्थ सेशन आयोजित किए जाएंगे, जहां डॉक्टर्स और ट्रेंड स्टाफ महिलाओं एवं छात्राओं के साथ सीधा संवाद करेंगे। उन्होंने प्रधानाचार्यों से कहा कि छात्राओं को यह वैक्सीन लगाने से पहले उनके अभिभावकों से अनुमति ली जाए और उन्हें इसके महत्व के बारे में जागरूक किया जाए। उन्होंने कहा कि स्कूल खुलने के बाद सरकार छात्राओं को निःशुल्क साइकिल उपलब्ध कराने जा रही है तथा इस दौरान अभिभावकों को एचपीवी वैक्सीनेशन के लिए भी प्रोत्साहित किया जाए।

सर्वाइकल कैंसर पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह महिलाओं में होने वाले सबसे सामान्य कैंसरों में से एक है, लेकिन सही जागरूकता और समय पर वैक्सीनेशन के माध्यम से इसे काफी हद तक रोका जा सकता है, इसलिए एचपीवी वैक्सीनेशन के प्रति अवेयरनेस बढ़ाना आज समय की सबसे बड़ी मांग है। यह वैक्सीन बेटियों के सुरक्षित भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच है।

इस अवसर पर दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि मेंस्ट्रुअल हेल्थ केवल स्वास्थ्य का विषय नहीं, बल्कि गरिमा, जागरूकता और आत्मविश्वास से जुड़ा विषय है। शिक्षा विभाग का यह कर्तव्य है कि वह इस अब तक कम चर्चा किए गए विषय पर स्कूलों में लगातार जागरूकता अभियान चलाए।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि स्कूलों की भूमिका केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों के लिए सुरक्षित, संवेदनशील और सहयोगपूर्ण वातावरण तैयार करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। दिल्ली सरकार इस अभियान के माध्यम से यह सुनिश्चित कर रही है कि प्रत्येक छात्रा को सही जानकारी, स्वच्छ सुविधाएं और आवश्यक हेल्थ सपोर्ट समय पर उपलब्ध हो। आशा और आंगनवाड़ी वर्कर्स के माध्यम से चलाए जाने वाले अवेयरनेस प्रोग्राम्स और स्कूलों में मजबूत किए जा रहे मेंस्ट्रुअल हेल्थ एजुकेशन से इस विषय को लेकर समाज में सकारात्मक बदलाव आएगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव