मुख्यमंत्री ने आईआईटी दिल्ली में किया ‘प्रदूषण के खिलाफ इनोवेटिव सॉल्यूशंस प्रदर्शनी’ का शुभारंभ

 


नई दिल्ली, 16 जनवरी (हि.स.)। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शुक्रवार को राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस पर आईआईटी दिल्ली में आयोजित ‘प्रदूषण के खिलाफ इनोवेटिव सॉल्यूशंस प्रदर्शनी’ का शुभारंभ किया। इस प्रदर्शनी में जून 2025 में घोषित इनोवेशन चैलेंज के तहत चुने गए 33 समाधानों के प्रोटोटाइप दिखाए गए। यह कार्यक्रम दिल्ली सरकार की प्रदूषण कम करने की योजना का अहम हिस्सा है, जिसमें युवाओं और नए इनोवेटर्स को शामिल किया गया है।

मुख्यमंत्री ने युवा इनोवेटर्स को संबोधित करते हुए कहा कि आप सभी के इनोवेटिव आइडियाज को देखकर उन्हें दिल्ली का आने वाला कल बहुत सुंदर और बेहतर दिखाई दे रहा है। दिल्ली का युवा अब केवल नौकरी मांगने वाला नहीं बल्कि नौकरी देने वाला बने, यही हमारा संकल्प है। उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषण दिल्ली की सबसे बड़ी चुनौती है। इससे निपटने के लिए सरकार अस्थायी कदमों से आगे बढ़कर स्थायी और तकनीक-आधारित समाधान लागू कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ऑड-ईवन, रेड लाइट ऑन-इंजन ऑफ जैसे कदम अस्थायी थे। अब दिल्ली सरकार टाइमबाउंड, स्ट्रक्चर्ड और टेक्नोलॉजी-ड्रिवन समाधानों पर काम कर रही है। फिर चाहे वह कूड़े के पहाड़ों को खत्म करना हो, यमुना की सफाई हो, डस्ट मिटिगेशन हो या ग्रीन कवर बढ़ाना हो। मुख्यमंत्री ने बताया कि दिल्ली में पहली बार 4,200 हेक्टेयर रिज क्षेत्र को आधिकारिक रूप से वन क्षेत्र घोषित किया गया है। साथ ही ऑक्सीजन देने वाले स्वदेशी पेड़ों को लगाकर घने जंगल विकसित किए जा रहे हैं। प्रदूषण केवल हवा का नहीं, यह पानी, जमीन और जीवन से जुड़ा विषय है। इसके समाधान के लिए सरकार को युवाओं की इनोवेशन शक्ति की जरूरत है।

इस अवसर पर दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि दिल्ली की हवा की समस्या सिर्फ एक शहर की नहीं बल्कि पूरे एनसीआर क्षेत्र से जुड़ी है। अगर सोनीपत, गाजियाबाद या गुरुग्राम में प्रदूषण बढ़ता है तो उसका असर दिल्ली में भी पड़ता है, इसलिए दिल्ली अपनी हवा को साफ करने के लिए अपनी खुद की प्रभावी व्यवस्था और तकनीक विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

पर्यावरण मंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार वायु प्रदूषण से निपटने के लिए कई स्तरों पर और आधुनिक तकनीक की मदद से काम कर रही है। राजधानी में तेजी से इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दिया जा रहा है, पुराने कचरे को हटाने के लिए बायो-माइनिंग की जा रही है, धूल और पीएम10 प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। साथ ही क्लाउड सीडिंग जैसी नई तकनीकों को भी अपनाया जा रहा है। उन्होंने भरोसा जताया कि इन प्रयासों से दिल्ली की एयर क्वालिटी में सुधार होगा और क्लाउड सीडिंग के जरिए प्रदूषण नियंत्रण व बारिश प्रबंधन में देश के लिए एक नई मिसाल बनेगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव