मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय कार्यशाला , योजना विभाग और एकस्टेप फाउंडेशन के बीच डेटा को लेकर एमओयू पर हस्ताक्षर

 


नई दिल्ली, 25 अगस्त (हि.स.)। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में मंगलवार को ‘हार्मोनाइजेशन एंड इंटरलिंकिंग ऑफ एडमिनिस्ट्रेटिव डेटा फॉर एआई-रेडी गवर्नेंस’ विषय पर कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें दिल्ली सरकार के सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों और वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। कार्यशाला में डेटा के बेहतर इस्तेमाल के जरिए दिल्ली में तथ्यों के आधार पर फैसले लेने, लोगों की जरूरत के अनुसार पहले से सेवाएं उपलब्ध कराने और नागरिकों को बेहतर सुविधाएं देने वाली सरकारी व्यवस्था को मजबूत करने पर चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि एआई का लाभ उन लोगों तक पहुंचना चाहिए जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है। डेटा एआई का फ्यूल है और डेटा को नागरिकों को सशक्त बनाने के लिए उपयोगी बनाना आवश्यक है। एकस्टेप फाउंडेशन दिल्ली सरकार के लिए नॉलेज पार्टनर के रूप में अपने ओपन फ्रेमवर्क्स और विशेषज्ञता साझा करेगा।

इस दौरान दिल्ली सरकार के योजना विभाग और एकस्टेप फाउंडेशन के बीच प्रशासनिक डेटा के क्षेत्र में सहयोग के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर भी किए गए। इसके तहत दोनों संस्थाएं दिल्ली के सरकारी डेटा को एआई के इस्तेमाल के लिए तैयार करने और एआई की मदद से नागरिक सेवाओं को बेहतर बनाने वाले विभिन्न उपयोग के मामलों पर मिलकर काम करेंगी। इस अवसर पर सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के सचिव सौरभ गर्ग, दिल्ली के मुख्य सचिव राजीव वर्मा, एकस्टेप फाउंडेशन के सह-संस्थापक और सीईओ शंकर मारुवाड़ा मौजूद रहे।

कार्यशाला में एकस्टेप फाउंडेशन की ओर से ‘डेटा धारा फॉर एन एआई-रेडी दिल्ली’ पर प्रस्तुति दी गई। इस दौरान ‘डेटा धारा’ पेपर भी लॉन्च किया गया। डेटा हार्नेस्ड फॉर एआई-रेडी एडवांसमेंट्स (धारा) ओपन-सोर्स और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर आधारित मेथडोलॉजी है। इसका उद्देश्य सरकारी विभागों और संस्थानों के डेटा को एआई के इस्तेमाल के लिए तैयार करने में मदद करना है। धारा को एक ओपन, प्लगएबल, इंटरऑपरेबल और क्लाउड पर तैनात किए जा सकने वाले टूलकिट के रूप में तैयार किया गया है। इसे जरूरत के अनुसार ऑन-प्रिमाइसेस भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

कार्यशाल के टेक्निकल सेशन में ‘डेटा क्रिएटिंग इम्पैक्ट’ विषय पर डेटा के इस्तेमाल से लोगों को बेहतर सुविधाएं और सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के कई उदाहरण साझा किए गए। इनमें सिविल रजिस्ट्रेशन डेटा को पीएमजेजेबीवाई और पीएमएसबीवाई जैसी योजनाओं से जोड़ना, नागरिकों को उनकी अपनी भाषा में सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए वॉइस एआई का इस्तेमाल, निवेश सुविधा के जरिए निवेशकों को बेहतर सहायता देना और उनके लिए उपलब्ध इंसेंटिव की जानकारी आसान बनाना शामिल रहा। इसके अलावा, मातृ वंदना और दिल्ली लखपति बिटिया योजना की डिलीवरी को बेहतर बनाने, पात्र लाभार्थियों की पहचान कर उन्हें योजनाओं से जोड़ने और एनरोलमेंट में रह जाने वाली कमियों को दूर करने तथा कंस्ट्रक्शन वर्कर्स को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने जैसे उदाहरण भी प्रस्तुत किए गए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कार्यशाला केवल टेक्नोलॉजी से जुड़ी पहल नहीं, बल्कि सरकार की परेशानियों को समझने, निर्णय लेने और नागरिकों तक सेवाएं पहुंचाने के तरीके को बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। विभिन्न विभागों के पास नागरिकों, लाभार्थियों, वर्कर्स, विद्यार्थियों, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और सरकारी स्कीम्स से जुड़ा बड़ी मात्रा में प्रशासनिक डेटा उपलब्ध है।

उन्होंने कहा कि अलग-अलग सरकारी विभागों के अपने-अपने डेटा और रिकॉर्ड हैं, लेकिन नागरिकों के लिए सरकार एक ही है। इसलिए जहां कानून इसकी अनुमति देता हो और तकनीकी रूप से संभव हो, वहां विभागों के बीच डेटा का सुरक्षित और उचित तरीके से इस्तेमाल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल अलग-अलग डेटाबेस को जोड़ देना ही काफी नहीं है। इसके लिए डेटा की एक जैसी परिभाषा और मानक तय करना, एक समान मेटाडेटा रखना, डेटा की गुणवत्ता बेहतर करना, अलग-अलग सिस्टम के बीच आसानी से डेटा साझा करने की व्यवस्था, सही पहचान संख्या और हर स्तर पर जिम्मेदारियां तय करना जरूरी है। ऐसा सिस्टम बनाना होगा, जिसमें सरकारी विभागों का डेटा आपस में आसानी से और प्रभावी तरीके से काम कर सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए सरकारी डेटा का बेहतर विश्लेषण किया जा सकता है। इससे डेटा में छिपे पैटर्न और गड़बड़ियों की पहचान, भविष्य की जरूरतों का अनुमान, शिकायतों का बेहतर समाधान, अलग-अलग भाषाओं में नागरिकों से संवाद और बेहतर फैसले लेने में मदद मिल सकती है। लेकिन अगर डेटा अलग-अलग जगहों पर बंटा हुआ, पुराना या एक-दूसरे से मेल नहीं खाता है तो एआई का पूरा फायदा नहीं उठाया जा सकता। इसलिए दिल्ली सरकार की प्राथमिकता ऐसा मजबूत डेटा सिस्टम तैयार करना है, जिसमें डेटा भरोसेमंद, गुणवत्तापूर्ण और एक-दूसरे के अनुरूप हो।

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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव