विश्वविद्यालयों को लेकर पिछली सरकार ने कार्य नहीं सिर्फ घोषणाएं कीं : सूद

 


- तीन विश्वविद्यालयों में कुल मिलाकर केवल तीन विद्यार्थी

नई दिल्ली, 27 मार्च (हि.स.)। दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने शुक्रवार को सदन में 2018-23 के बीच दिल्ली सरकार के विश्वविद्यालयों के कार्यकलापों पर आई सीएजी रिपोर्ट बताती है कि पिछली सरकार ने बिना किसी जमीन कार्य के केवल घोषणाएं कीं। विदेशी अखबारों में लेख छपवाकर अपनी छवि बनाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने दिल्ली टीचर विश्वविद्यालय बनाया, लेकिन वह आज भी एक स्कूल की बिल्डिंग में चल रही है। हालत यह है कि तीन-तीन विश्वविद्यालयों में कुल मिलाकर केवल तीन विद्यार्थी दाखिल हैं, पिछले वर्ष भी मात्र 20 छात्र थे। यह बिना योजना के लिए गए फैसलों का परिणाम है।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि इसी प्रकार दिल्ली दिल्ली खेल विश्वविद्यालय एक स्कूल के केवल 6 कमरों में चल रहा है। करीब 200–250 बच्चे वहां पढ़ रहे हैं, लेकिन उनका भविष्य क्या होगा? करिकुलम क्या होगा। डिग्री कैसी मिलेगी? प्रोफेसर कौन होंगे? इनमें से किसी भी प्रश्न का स्पष्ट उत्तर नहीं है। इसी तरह दिल्ली कौशल एवं उद्यमिता विश्वविद्यालय बनाया गया और सभी पॉलिटेक्निक संस्थानों को उसमें समाहित कर दिया गया। आज स्थिति यह है कि छात्र हड़ताल पर हैं, शिक्षक हड़ताल पर हैं। पहले एआईसीटीई मान्यता प्राप्त डिग्री मिलती थी, अब उसकी वैल्यू पर सवाल है। सरकारी कर्मचारी अब अनिश्चित स्थिति में हैं। यह पूरी तरह से बिना योजना के लिए गया निर्णय था।

सूद ने कहा कि सीएजी की रिपोर्ट में 16 वर्षों तक एडमिशन सिस्टम फेल्यर की बात कही गई है। कोई स्पष्ट एडमिशन पॉलिसी नहीं, माइग्रेशन पॉलिसी नहीं, कॉलेज बदलने की व्यवस्था नहीं। यह उच्च शिक्षा व्यवस्था की गंभीर खामियां हैं। 5 वर्षों तक विश्वविद्यालयों के ऑडिटेड अकाउंट्स सदन में प्रस्तुत ही नहीं किए गए। मनमाने तरीके से नियुक्तियां हुईं। फंड का दुरुपयोग हुआ और ईडब्लूएस छात्रों के लिए पैसा डायवर्ट किया गया। स्कॉलरशिप फंड का सही उपयोग नहीं हुआ। यह सब सीएजी की रिपोर्ट कह रही है।

उन्होंने कह कि स्थिति बदल रही है। हमारी सरकार ने 2023–25 के बीच 3014 ईडब्लूएस छात्रों को 44 करोड़ रुपये की स्कॉलरशिप दी। कैंपस टू मार्केट स्टार्टअप इनक्यूबेशन नीति को बढ़ावा दिया गया। 100 स्टार्टअप्स को वित्तीय सहायता दी। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन द्वारा 200 करोड़ से अधिक के ड्रोन ऑर्डर हमारे छात्रों को मिले। हमारे युवाओं ने नए-नए इनोवेशन किए हैं। जैसे एक छात्रा ने पर्यावरण के अनुकूल सैनिटरी पैड विकसित किया। यह नई सोच, नई दिशा और नई नीति का परिणाम है। हमारी प्रतिबद्धता स्पष्ट है कि हम केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि जमीन पर परिणाम देने वाली सरकार हैं।

सूद ने कहा कि सीएजी रिपोर्ट ने विश्वविद्यालयों की कार्यप्रणाली, नीतियों और प्रबंधन को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं। इसमें वित्तीय कुप्रबंधन, मानव संसाधन में खामियां और अकादमिक स्तर पर असफलताओं को स्पष्ट रूप से उजागर किया गया है। वर्षों तक एमबीए जैसे कोर्सेज का एक्रीडिटेशन नहीं लिया गया। 16 वर्षों तक सिलेबस अपडेट नहीं किए गए। इंफ्रास्ट्रक्चर और गवर्नेंस में भारी कमी रही, गलत तरीके से एफिलिएशन दिए गए और बुनियादी सुविधाओं का अभाव रहा। सीमित ऑडिट के कारण समस्याएं और बढ़ती चली गईं। केवल तीन विश्वविद्यालयों के सैंपल के आधार पर ही इतनी बड़ी अनियमितताएं सामने आई हैं।

सीएजी रिपोर्ट स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि विश्वविद्यालयों में गंभीर स्तर पर गड़बड़ियां हुई हैं, इसलिए शिक्षा मंत्री ने विधानसभा अध्यक्ष से इस रिपोर्ट पर विस्तृत और गंभीर चर्चा करने और इसे पब्लिक अकाउंट्स कमेटी (पीएसी) के पास भी भेजने का आग्रह किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव