प्रदूषण नियंत्रण और सफाई व्यवस्था की मजबूती को लेकर दिल्ली कैबिनेट ने लिए दो निर्णय

 


- छोड़ी सड़कों पर सफाई के लिए ईवी मशीने होगी तैनात, पीएम2.5 और पीएम10 के प्रदूषण स्रोतों की लगातार रियल-टाइम होगी पहचान

नई दिल्ली, 29 सितंबर (हि.स.)। राजधानी के प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली सरकार ने जनभागीदारी को साथ लेकर ‘विंटर एक्शन प्लान 2026-27’ लागू कर दिया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई दिल्ली कैबिनेट की बैठक में प्रदूषण नियंत्रण के लिए जमीनी स्तर पर सफाई व्यवस्था को मजबूत करने और प्रदूषण के स्रोतों की वैज्ञानिक व रियल-टाइम पहचान करने से जुड़े दो महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। पहले निर्णय के तहत छोटी सड़कों पर भी मशीनीकृत सफाई व्यवस्था का विस्तार किया जाएगा। इसके लिए दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) को 30 इलेक्ट्रिक वाहन आधारित मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनें (एमआरएसएम) उपलब्ध कराने के लिए अनुदान दिया जाएगा। वहीं, दूसरे निर्णय के अंतर्गत आईआईटी दिल्ली के सहयोग से पीएम2.5 और पीएम10 के प्रदूषण स्रोतों की लगातार रियल-टाइम पहचान और विश्लेषण की व्यवस्था विकसित की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार प्रदूषण को केवल सर्दियों में बढ़ने वाली समस्या के रूप में नहीं देख रही, बल्कि पूरे वर्ष प्रदूषण के स्रोतों पर लगातार और वैज्ञानिक तरीके से काम कर रही है। केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन व सहयोग से दिल्ली को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त बनाने की दिशा में सरकार पूरी गंभीरता से काम कर रही है। सरकार के विभिन्न विभाग, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति, नगर निगम और वैज्ञानिक संस्थान मिलकर प्रदूषण नियंत्रण के लिए लगातार ठोस कदम उठा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि प्रदूषण के हर प्रमुख स्रोत पर एक साथ काम किया जाए और उसके लिए पर्याप्त संसाधन भी उपलब्ध कराए जाएं। सड़क की धूल, वाहनों से होने वाला प्रदूषण, निर्माण एवं विध्वंस गतिविधियों से निकलने वाली धूल, औद्योगिक प्रदूषण, कचरा व बायोमास जलाने से होने वाले प्रदूषण, हरित क्षेत्र बढ़ाने और नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन जैसे सभी क्षेत्रों में सरकार लगातार कार्रवाई कर रही है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि सड़क की धूल को कणीय प्रदूषण (पार्टिकुलेट पॉल्यूशन) का एक महत्वपूर्ण स्रोत मानते हुए कैबिनेट ने उन छोटी सड़कों पर मशीनीकृत सफाई का विस्तार करने का निर्णय लिया है, जहां फिलहाल ऐसी सुविधा उपलब्ध नहीं है। इस पहल के तहत 10 मीटर से कम राइट ऑफ वे वाली लगभग 609 किलोमीटर लंबी सड़कें शामिल की गई हैं। इनमें 250 वार्डों की 854 सड़कों की पहचान की गई है।

उन्होंने बताया कि सरकार इस पहल के लिए नगर निगम को अनुदान उपलब्ध कराएगी। वहीं, निगम जमीन पर मशीनों की तैनाती और संचालन करेगा। ईवी आधारित 30 मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनों की इस व्यवस्था पर 10 वर्षों में लगभग 393.73 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इलेक्ट्रिक मशीनों के इस्तेमाल से प्रदूषण नियंत्रण के लिए की जाने वाली सफाई प्रक्रिया भी पर्यावरण के अनुकूल रहेगी। इस निर्णय के माध्यम से दिल्ली सरकार और नगर निगम मिलकर सड़क की धूल से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए जमीनी स्तर पर कार्रवाई को और व्यापक बनाएंगे।

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदूषण के विरुद्ध सरकार की वैज्ञानिक रणनीति को मजबूत करने के लिए कैबिनेट ने आईआईटी दिल्ली के साथ साझेदारी में पीएम2.5 और पीएम10 के निरंतर रियल-टाइम सोर्स अपोर्शनमेंट यानी प्रदूषण के स्रोतों की पहचान और उनका आकलन को भी स्वीकृति दी है। इसके तहत प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों की पहचान और उनकी मात्रा का वैज्ञानिक विश्लेषण 24 घंटे लगातार किया जा सकेगा। इस व्यवस्था के माध्यम से वाहनों से होने वाला प्रदूषण, सड़क की धूल, बायोमास जलाना जैसे प्रदूषण स्रोतों की पहचान और आकलन किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि राउज एवेन्यू स्थित मौजूदा सुपर साइट को वैज्ञानिक संचालन के लिए फिर से सक्रिय किया जाएगा। इसके साथ मोबाइल प्रयोगशाला को भी दोबारा सक्रिय किया जाएगा, जिससे प्रदूषण वाले हॉटस्पॉट और स्थानीय स्रोतों का लक्षित अध्ययन किया जा सकेगा। आईआईटी दिल्ली के साथ यह सहयोग पांच वर्षों के लिए होगा और इस पर लगभग 19.22 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। परियोजना में मौजूदा सुपर साइट और मोबाइल प्रयोगशाला को दोबारा शुरू करना, रियल-टाइम डैशबोर्ड, विश्लेषणात्मक रिपोर्ट तथा डीपीसीसी अधिकारियों की क्षमता बढ़ाने से जुड़े कार्य शामिल होंगे।

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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव