दिल्ली के सर्वश्रेष्ठ विधायक चुने गए अनिल गोयल

 


नई दिल्ली, 23 अप्रैल (हि.स.)। दिल्ली विधानसभा ने गुरुवार को कृष्णा नगर के विधायक डॉ. अनिल गोयल को आठवीं विधानसभा के प्रतिष्ठित वार्षिक सर्वश्रेष्ठ विधायक पुरस्कार के लिए चयनित किए जाने की घोषणा की। यह निर्णय आज विधानसभा में आयोजित एक उच्चस्तरीय चयन समिति की बैठक में लिया गया, जो आठवीं विधानसभा के भीतर सुशासन के उच्च मानकों को बढ़ावा देने की दिशा में संसदीय परंपरा की सफल पुनर्स्थापना का प्रतीक है।

डॉ. अनिल गोयल को यह सम्मान जल्द ही एक समारोह में औपचारिक रूप से प्रदान किया जाएगा। आठवीं विधानसभा के लिए यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, क्योंकि 18 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद यह प्रतिष्ठित सम्मान पुनः प्रारंभ किया गया है, जो संसदीय उत्कृष्टता को मान्यता देने की नई प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह जानकारी आज दिल्ली विधानसभा की ओर से जरिए विज्ञप्ति में दी गई।

इस चयन प्रक्रिया का संचालन आज दिल्ली विधानसभा में अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता की अध्यक्षता में किया गया। इस प्रतिष्ठित जूरी में राजेंद्र अग्रवाल (पूर्व सांसद, लोकसभा), पीडीटी आचार्य (पूर्व महासचिव, लोकसभा), रितेश सिंह (प्रधान सचिव, विधि, न्याय एवं विधायी कार्य, दिल्ली सरकार), महेश के. शुक्ला (वरिष्ठ पत्रकार) तथा रणजीत सिंह (सचिव, विधानसभा) शामिल रहे। डॉ. गोयल को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए पुरस्कार, स्मृति चिन्ह और 51,000 रुपये की नकद राशि प्रदान की जाएगी।

सर्वश्रेष्ठ विधायक पुरस्कार का चयन एक व्यापक और पारदर्शी अंक प्रणाली के आधार पर किया गया है, जो विधायक के प्रदर्शन के प्रत्येक पहलू का मूल्यांकन करती है। कुल मूल्यांकन 100 अंकों का होता है, जिसमें 65 अंक विधानसभा के आधिकारिक अभिलेखों के आधार पर निर्धारित होते हैं, जबकि 35 अंक चयन समिति द्वारा गुणात्मक मूल्यांकन के आधार पर दिए जाते हैं। इससे यह सुनिश्चित होता है कि अंतिम निर्णय ठोस आंकड़ों और विशेषज्ञों के विश्लेषण दोनों पर आधारित है।

मूल्यांकन का सबसे बड़ा हिस्सा, 50 अंक, सदन की बहसों में सदस्य के योगदान पर केंद्रित होता है। इस श्रेणी में 20 अंक बहस की गुणवत्ता के लिए निर्धारित हैं, जिसमें विधायक की वाक्पटुता, राष्ट्रीय एवं स्थानीय मुद्दों की समझ तथा भाषा दक्षता का आकलन किया जाता है। नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए 15 अंक सदन की बैठकों में उपस्थिति के आधार पर दिए जाते हैं, जबकि शेष 15 अंक विधायी गतिविधियों, जैसे नोटिस देना, प्रश्न पूछना और सदन में समय का उपयोग के आधार पर निर्धारित होते हैं।

इसके अतिरिक्त, विभिन्न समितियों में विधायक की सक्रियता भी मूल्यांकन का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसके लिए कुल 30 अंक निर्धारित हैं। इसमें 15 अंक समिति में भागीदारी की गुणवत्ता के लिए तथा 15 अंक उपस्थिति के आधार पर दिए जाते हैं। इन मानकों के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाता है कि पुरस्कार उन प्रतिनिधियों को मिले जो न केवल सदन में सक्रिय हैं, बल्कि समिति कार्यों में भी प्रभावी योगदान देते हैं।

मूल्यांकन के अंतिम 20 अंक अनुशासन, आचरण और आधुनिकीकरण से संबंधित हैं। इनमें 12 अंक सदन के नियमों के पालन के लिए दिए जाते हैं, जिसमें अध्यक्ष के निर्देशों का सम्मान, निष्कासन या निलंबन से बचना तथा समय पर नोटिस प्रस्तुत करना शामिल है। साथ ही 8 अंक नेवा प्रणाली के उपयोग के लिए निर्धारित हैं, जो उन विधायकों को प्रोत्साहित करते हैं जिन्होंने डिजिटल और पेपरलेस कार्यप्रणाली को अपनाया है। यह आधुनिक ढांचा सुनिश्चित करता है कि सर्वश्रेष्ठ विधायक का खिताब ऐसे प्रतिनिधि को मिले जो अनुशासित, तकनीकी रूप से दक्ष और विधायी प्रक्रिया के प्रति पूर्णतः समर्पित हो।

विजेंद्र गुप्ता ने इस अवसर पर सर्वश्रेष्ठ विधायकों को सम्मानित करने की स्वस्थ परंपरा को पुनर्जीवित करने की अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह पहल उन सदस्यों को सम्मानित करने के लिए है जो विधायी कार्यों में उत्कृष्टता प्रदर्शित करते हैं और समिति कार्यों में अथक परिश्रम करते हैं। वार्षिक सर्वश्रेष्ठ विधायक पुरस्कार का मुख्य उद्देश्य उन जनप्रतिनिधियों को पहचान देना है जो ईमानदारी और समर्पण के उच्चतम मानकों को बनाए रखते हैं और अपने साथियों के लिए एक आदर्श स्थापित करते हैं।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव