वसुधैव कुटुंबकम, अनेकता में एकता भारतीय संस्कृति की शक्तिः आचार्य लोकेश
नई दिल्ली, 19 मई (हि.स.)। दिल्ली में पहली बार ‘भारतीय संत महापरिषद’ के तत्वावधान में मंगलवार को रामकृष्ण मिशन में संतों एवं आचार्यों का वैश्विक महासमागम हुआ। इस आयोजन में अहिंसा विश्व भारती एवं विश्व शांति केंद्र के संस्थापक आचार्य लोकेशी, सहित देश-विदेश से समागत 300 से अधिक धर्माचार्यों एवं आध्यात्मिक नेताओं ने सहभागिता कर विश्व शांति, वैश्विक समरसता और विश्व बंधुत्व के लिए सशक्त एवं संस्कारित समाज निर्माण का महासंकल्प लिया।
इस अवसर पर भारतीय संत महापरिषद के आयोजक हरिहरपुरा महास्वामी सच्चिदानंद सरस्वती, कैलाश आश्रम से आचार्य महामण्डलेश्वर जयेन्द्र पुरी स्वामी ने शंकराचार्य, जगतगुरु, आचार्य, महामंडलेश्वर एवं देशभर से समागत साधु संतों का स्वागत किया।
सभा को संबोधित करते हुए विश्व शांति दूत आचार्य लोकेश ने कहा कि भारतीय संस्कृति के ‘वसुधैव कुटुंबकम’ और ‘अनेकता में एकता’ जैसे आदर्श आज पूरे विश्व के लिए मार्गदर्शक हैं। यदि मानवता इन मूल्यों को अपनाए तो विश्व में शांति, समानता, सद्भाव और बंधुत्व की स्थापना संभव है। उन्होंने कहा कि संत समाज का दायित्व केवल आध्यात्मिक मार्गदर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि मानवता को जोड़ना और समाज को सकारात्मक दिशा देना भी है।
रामकृष्ण मिशन में आयोजित इस महासमागम में भारतीय संस्कृति को अपना मूल आधार मानने वाली विभिन्न आस्थाओं, दर्शनों एवं परंपराओं के संतों और प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सम्मेलन में यह निर्णय लिया गया कि ‘भारतीय संत महापरिषद’ को एक सुव्यवस्थित एवं प्रभावशाली महासंघ के रूप में विकसित किया जाएगा, जो भारतीय सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक मूल्यों के संरक्षण और संवर्धन के लिए कार्य करेगा।
इस अवसर पर दो महत्वपूर्ण योजनाओं ‘समान अनुष्ठान संहिता’ एवं ‘एकसमान सामान्य संस्कार शिक्षा’ को संयुक्त रूप से प्रारंभ करने की रूपरेखा भी तैयार की गई। 'समान अनुष्ठान संहिता' का उद्देश्य विभिन्न आस्थाओं, परंपराओं और दर्शनों के मूल आध्यात्मिक मूल्यों को एकजुट कर व्यवस्थित रूप से समाज में स्थापित करना है, जबकि ‘एकसमान सामान्य संस्कार शिक्षा’ का लक्ष्य बच्चों एवं युवाओं को मूल्य आधारित संस्कार शिक्षा प्रदान कर सुसंस्कृत, नैतिक एवं आदर्श समाज का निर्माण करना है।
इस अवसर पर रामजन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरी महाराज, आचार्य महासभा के महासचिव स्वामी परमात्मानंद, आदिचुनचुनगिरी मठ के जगतगुरु स्वामी निर्मलानन्द, जैन धर्म से आचार्य लोकेश, सिख धर्म से बांग्ला साहिब गुरुद्वारे के प्रमुख जत्थेदार भाई रंजीत सिंह, बौद्ध धर्म से बौद्ध भिखु लामा, शंकराचार्य राजराजेश्वर, हिन्दू परंपरा से बड़ी संख्या में साधु-संत उपस्थित थे।
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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी