शीतकालीन सत्र में डिजिटल प्रणाली अपनाने से 3.38 लाख से अधिक कागजों की हुई बचत : विजेंद्र गुप्ता

 


नई दिल्ली, 12 जनवरी (हि.स.)। आठवीं दिल्ली विधानसभा के चौथे (शीतकालीन) सत्र के दौरान डिजिटल प्रणाली अपनाने से 3.38 लाख से अधिक कागजों की बचत करके पर्यावरण क्षेत्र में बड़ा कदम उठाया गया।

दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने आज दिल्ली विधानसभा में प्रेस वार्ता के दौरान हिन्दुस्थान समाचार एजेंसी के एक सवाल के जवाब में कहा कि शीतकालीन सत्र के दौरान डिजिटल प्रणाली को अपनाने से कागज की खपत में उल्लेखनीय कमी आई है। उन्होंने कहा कि सत्र के डिजिटल प्रणाली अपनाने से 3.38 लाख से अधिक पृष्ठों की बचत हुई, जिससे लगभग 40 से अधिक (40.56) पेड़ों का संरक्षण हुआ तथा पर्यावरण-अनुकूल विधायी प्रथाओं के प्रति विधानसभा की प्रतिबद्धता और प्रबल हुई।

विजेंद्र गुप्ता ने बताया कि एक सत्र में कागज के उपयोग में कमी से हुए पर्यावरणीय एवं वित्तीय लाभों का आंतरिक आकलन किया गया है। प्रश्न शाखा में अकेले 2,24,000 पृष्ठों की बचत हुई—320 प्रश्न, प्रति प्रश्न औसतन 10 पृष्ठ और प्रति प्रश्न 70 प्रतियां। विधेयक शाखा में 64,000 पृष्ठों की बचत हुई—4 विधेयक, प्रत्येक 100 पृष्ठ और 160 प्रतियां। इसके अतिरिक्त 50,000 पृष्ठ अन्य आंतरिक कार्यों जैसे नोटशीट, ड्राफ्ट, प्रसारण पत्र, संशोधन, कार्यसूची तथा सूचनाओं में बचाए गए। इस प्रकार कुल 3,38,000 पृष्ठों की बचत हुई।

विजेंद्र गुप्ता ने बताया कि आंकड़ों के अनुसार इससे लगभग 40 से अधिक (40.56) पेड़ों का संरक्षण, लगभग 4–4.5 मैट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी, तथा 1,69,000 की प्रिंटिंग लागत की बचत हुई, जिसकी गणना प्रति पृष्ठ 0.50 रुपये की औसत लागत के आधार पर की गई। गुप्ता ने कहा कि ये तथ्य स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि विधायी कार्यप्रणाली में डिजिटल दस्तावेजीकरण अपनाने से ठोस व सकारात्मक परिणाम प्राप्त हुए हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव