शराब विनियमन पर सीएजी ऑडिट की कार्यवाही रिपोर्ट के लिए 31 जनवरी 2027 तक समय सीमा निर्धारित

 


नई दिल्ली, 02 अप्रैल (हि.स.)। दिल्ली विधान सभा सचिवालय ने “दिल्ली में शराब के विनियमन एवं आपूर्ति पर भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की कार्यनिष्पादन ऑडिट रिपोर्ट” पर लोक लेखा समिति (पीएसी) की द्वितीय रिपोर्ट को सदन द्वारा अनुमोदित किए जाने के बाद संबंधित विभागों को निर्देश दिया है कि वे समिति की सिफारिशों की विस्तृत समीक्षा करें। संबंधित विभाग 31 दिसंबर तक की स्थिति के अनुसार कार्यवाही प्रतिवेदन तैयार करके अधिकतम 31 जनवरी 2027 तक अनिवार्य प्रस्तुत करें। यह जानकारी गुरुवार को एक विज्ञप्ति के जरिए दी गई।

इस संदर्भ में विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने आबकारी व्यवस्था में मौजूद प्रणालीगत कमियों को रेखांकित करते हुए कहा कि लोक लेखा समिति की सिफारिशों पर समयबद्ध और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। इस संबंध में दिल्ली सरकार के आबकारी मंत्री और प्रधान सचिव (वित्त) को पत्र भेजकर इन निर्देशों की जानकारी दी गई है। साथ ही उनसे समिति की सिफारिशों पर पूरी और समय पर प्रतिक्रिया देने को कहा गया है, ताकि विभाग स्तर पर आगे की कार्रवाई शुरू की जा सके।

यह निर्देश एक महत्वपूर्ण अगली प्रक्रिया की शुरुआत को दर्शाता है, जिसमें कार्यपालिका की यह स्पष्ट जिम्मेदारी तय की गई है कि वह सदन द्वारा स्वीकार किए गए निष्कर्षों पर तय समय-सीमा के भीतर जवाब दे।

अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने बताया कि समिति की रिपोर्ट में पाया गया है कि आबकारी विभाग में नियमों के पालन, लाइसेंस देने, कीमत तय करने, गुणवत्ता जांच, कार्रवाई और नीतियों को लागू करने में कई गंभीर कमियां थीं। इन कमियों के कारण लगभग 2,026.91 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान हुआ और जनस्वास्थ्य व प्रशासन पर भी नकारात्मक असर पड़ने की आशंका बनी।

उन्होंने यह भी कहा कि आबकारी आपूर्ति शृंखला सूचना प्रबंधन प्रणाली (ईएससीआईएमएस) प्रणाली “स्टॉक टेक सोल्ड” तरीके पर ज्यादा निर्भर रहने और बड़ी संख्या में बिना दर्ज बारकोड होने के कारण शराब की बिक्री को सही ढंग से ट्रैक नहीं कर पाई, जिससे राजस्व में नुकसान हो सकता है। वहीं, ईआईबी मॉड्यूल भी खुफिया जानकारी के लिए प्रभावी रूप से उपयोग में नहीं लाया गया और लगभग निष्क्रिय रहा।

गुप्ता ने आगे लाइसेंसिंग प्रक्रिया में व्यापक त्रुटियों की ओर भी संकेत किया, जिनमें अभिलेखों का प्रस्तुत न किया जाना तथा संबंधित इकाइयों को एकाधिक लाइसेंस जारी किया जाना शामिल है। इसके अतिरिक्त, एक्स-डिस्टिलरी मूल्य (ईडीपी) एवं एक्स-ब्रुअरी मूल्य (ईबीपी) की परिभाषा एवं विनियमन में अस्पष्टता के कारण विवेकाधीन मूल्य निर्धारण, लाइसेंसधारकों को अनुचित लाभ तथा अत्यधिक लाभांश की स्थिति उत्पन्न हुई।

अध्यक्ष ने बताया कि सीमित स्रोत नीति, मांग का सही अनुमान न लग पाने और विभागों के बीच तालमेल की कमी के कारण शराब की तस्करी बढ़ी। साथ ही, प्रवर्तन एजेंसियां जब्ती के आंकड़ों का सही उपयोग नहीं कर पाईं, परमिट के गलत इस्तेमाल पर समय पर कार्रवाई नहीं हुई और चिन्हित जगहों पर भी प्रभावी कदम नहीं उठाए गए।

सुधार के उपायों पर जोर देते हुए गुप्ता ने कहा कि समिति ने कई अहम सिफारिशें की हैं। इनमें ई-अबकारी पोर्टल को जल्द लागू करना, शराब की निगरानी के लिए मजबूत ट्रैक और ट्रेस प्रणाली बनाना, बारकोड स्कैनिंग और जियो-टैगिंग को बेहतर करना और आईटी व्यवस्था को मजबूत करना शामिल है। इसके साथ ही, एग्जिट प्लान तैयार करना, आईटी पदों की खाली जगहों को भरना, लाइसेंस प्रक्रिया की सख्त जांच और हर तीन महीने में निगरानी करना, जरूरी दस्तावेज सुनिश्चित करना और कीमत तय करने की स्पष्ट व्यवस्था बनाना (जिसमें न्यूनतम ईडीपी तय करना भी शामिल है) की बात कही गई है।

समिति ने यह भी कहा है कि मुनाफे को नियंत्रित किया जाए, पिछली गड़बड़ियों के लिए जिम्मेदारी तय की जाए और पारदर्शिता व दक्षता बढ़ाने के लिए डेटा के आधार पर सख्त कार्रवाई की जाए।

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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव