21,000 करोड़ की दिल्ली शहरी बाढ़ नियंत्रण योजना को मिली हरी झंडी

 




- उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में डीएसडीएमए की बैठक

नई दिल्ली, 18 मार्च (हि.स.)। दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू की अध्यक्षता और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की सह-अध्यक्षता में बुधवार को दिल्ली राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीएसडीएमए) की बैठक आयोजित की गई। बैठक में राजधानी दिल्ली में आपदा प्रबंधन से जुड़ी तैयारियों की विस्तार से समीक्षा की गई।

बैठक में दिल्ली शहरी बाढ़ नियंत्रण योजना को सैद्धांतिक मंजूरी दी गई, जिसके लिए करीब 21,000 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित है। इस योजना के तहत ड्रेनेज इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जाएगा, बड़े नालों की सफाई (डीसिल्टिंग) की जाएगी, अतिरिक्त स्टॉर्म वॉटर चैनल बनाए जाएंगे और रियल-टाइम फ्लड मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित किए जाएंगे। इसका उद्देश्य मानसून के दौरान शहरी बाढ़ के जोखिम को काफी हद तक कम करना है। मुख्यमंत्री ने आने वाले मानसून को ध्यान में रखते हुए इस योजना को समय पर लागू करने पर विशेष जोर दिया।

बैठक में ऊर्जा क्षेत्र को लेकर भी अहम चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि ऊर्जा के उपयोग में संतुलन रखा जाए, नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा दिया जाए, ब्लैक मार्केटिंग और जमाखोरी पर कड़ी निगरानी रखी जाए और किसी भी संभावित संकट के दौरान महत्वपूर्ण संस्थानों को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। खाड़ी क्षेत्र में चल रहे संघर्ष के कारण उत्पन्न वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए दिल्ली में ऊर्जा मांग और आपूर्ति की स्थिति की भी समीक्षा की गई।

एक महत्वपूर्ण निर्णय के तहत दिल्ली में अत्याधुनिक इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर (ईओसी) और इंटीग्रेटेड कमांड ऐंड कंट्रोल सेंटर स्थापित किए जाएंगे। ये केंद्र आपदा प्रबंधन के लिए मुख्य नियंत्रण केंद्र के रूप में काम करेंगे, जहां रियल-टाइम समन्वय, एआई और सैटेलाइट डेटा के जरिए पूर्वानुमान (प्रीडिक्टिव एनालिटिक्स) और तेज प्रतिक्रिया तंत्र विकसित किया जाएगा। इनका उपयोग बाढ़, भूकंप, आग और रासायनिक आपदाओं समेत सभी आपात स्थितियों में किया जाएगा।

उपराज्यपाल ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि इन योजनाओं के कार्यान्वयन में तेजी लाई जाए और समय पर उन्हें पूरा किया जाए। वहीं, मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली को आपदा के प्रति अधिक सक्षम और सुरक्षित बनाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने यह भी दोहराया कि आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 10 सूत्रीय एजेंडे को मार्गदर्शक सिद्धांत के रूप में अपनाया जाएगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव