शिक्षा मंत्री ने ‘पंचायत कैफे’ का किया शुभारंभ, 1.14 करोड़ के आजीविका वाहनों को दिखाई हरी झंडी

 


सुकमा, 03 सितंबर (हि.स.)। जिले के सुदूर वनांचल की महिलाओं के जीवन में स्वावलंबन, सम्मान और आर्थिक सशक्तिकरण की नई इबारत लिखी जा रही है। सुकमा जिले के ग्राम पंचायत केरलापाल में गुरुवार को छत्तीसगढ़ के शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने जिला पंचायत द्वारा निर्मित ‘पंचायत कैफे’ का शुभारंभ किया।

बिहान योजना से जुड़ी स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा संचालित यह कैफे ग्रामीणों और राहगीरों को स्वच्छ एवं गुणवत्तापूर्ण खान-पान की सुविधा उपलब्ध कराने के साथ ही महिलाओं के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता का नया केंद्र बनेगा। परिसर में स्वच्छ भारत मिशन के तहत आधुनिक शौचालय की सुविधा भी विकसित की गई है। वहीं केरलापाल के कार्यक्रम में ग्रामीण आजीविका के क्षेत्र में शिक्षा मंत्री ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान के तहत लगभग 1.14 करोड़ रुपये की लागत से उपलब्ध कराए गए 8 फोर्स ट्रैक्स ‘तूफान’ वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर कलेक्टर अमित कुमार और जिला पंचायत सीईओ मुकुंद ठाकुर भी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के दाैराान शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव औपचारिकता और प्रोटोकॉल से अलग हटकर स्व-सहायता समूह की दीदियों के बीच बैठकर उन्होंने महिलाओं से सीधे संवाद किया, उनके हाथों से बने पारंपरिक नाश्ते का स्वाद लिया और गरमा-गरम चाय की चुस्कियों के साथ उनके प्रयासों की सराहना की। नियद नेलानार क्षेत्र के दुर्गम गांवों में अब ये वाहन ‘ग्रामीण आजीविका एक्सप्रेस’ के रूप में सुविधाओं काे बढ़ाने का काम करेंगा। कृतिका संकुल संगठन चिंतलनार, विद्या संकुल संगठन दुब्बाटोटा और खुशी महिला संकुल संगठन को दो-दो वाहन प्रदान किए गए, जबकि उदय संकुल संगठन एर्राबोर और प्रतिज्ञा संकुल संगठन को एक-एक वाहन की चाबी सौंपी गई। इन वाहनों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन और परिवहन की पुरानी समस्याओं को दूर करने के साथ स्थानीय कृषि एवं वन उपज को हाट-बाजारों तक समय पर पहुंचाने में मदद मिलेगी। इससे स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं की आय बढ़ने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने कहा कि ग्रामीण महिलाओं की मेहनत, संघर्ष और जज्बा आज पूरे समाज के लिए प्रेरणा है। पंचायत कैफे जैसी पहल महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ उन्हें अपनी पहचान और आर्थिक मजबूती प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा कि जब सुदूर अंचलों की महिलाओं के हाथों में उद्यम और आजीविका की बागडोर आती है तो उसका लाभ केवल एक परिवार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरा समाज विकास और आत्मनिर्भरता के नए दौर में आगे बढ़ता है।

कार्यक्रम में महिला आयोग सदस्य दीपिका सोरी, जनप्रतिनिधि धनीराम बारसे, अरुण सिंह भदौरिया, जिला पंचायत सदस्य हुंगाराम मरकाम, जनपद सदस्य भीमा मड़कम सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी और बड़ी संख्या में स्व-सहायता समूह की महिलाएं उपस्थित थीं।

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हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे