नगर निगम में खरीदे 80 नग रिक्शा, जांच के लिए पहुंची रायपुर से टीम

 




धमतरी, 25 मार्च (हि.स.)। नगर निगम धमतरी में सप्लाई हुए 80 नग रिक्शा की क्वालिटी में कमियों को लेकर पार्षदों ने शासन से शिकायत कर जांच की मांग की थी। पार्षदों की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए शासन की ओर से 24 मार्च को रायपुर से जांच के लिए दो टीम पहुंची। निगम द्वारा खरीदे गए रिक्शा की टीम ने जांच कर रिपोर्ट अपने साथ ले गए है। वहीं दूसरी टीम वाटर ट्रीटमेंट सिवरेज प्लांट स्थल पहुंचकर जायजा लिया।

रायपुर से पहुंचे नगरीय निकाय विभाग के उपसंचालक सूर्यकांत श्रीवास्तव, कार्यपालन अभियंता अभिषेक गुप्ता, एई दुलेश्वर साहू की टीम राजस्व विभाग के पास स्थित निगम के परिसर में पड़े पीले रंग की रिक्शे की जांच की। जांच अधिकारियों ने रिक्शे की लंबाई, चौड़ाई, मोटाई समेत अन्य हिस्से को टेप से नापकर रिपोर्ट तैयार किया है। दूसरी ओर टीम के अधिकारियों ने वाटर ट्रीटमेंट प्लांट पहुंचकर निरीक्षण किया। उल्लेखनीय है कि नगर निगम में खरीदे गए 80 नग रिक्शे की खरीदी के लिए कांग्रेस शासन काल में 20 दिसंबर 2024 को टेंडर बुलाया गया था। इसके बाद आचार संहिता के दौरान 25 मार्च 2025 को रिक्शा सप्लाई के लिए कार्य आदेश जारी हुआ। रिक्शे की सप्लाई अंबिकापुर की एजेंसी मां महामाया इंटरप्राइजेस ने की है। पार्षदों ने रिक्शा की क्वालिटी खराब होने की शिकायत की थी। रिक्शे का चादर, गेज, बेरिंग, चक्का निर्धारित मानक अनुरूप नहीं है। इन शिकायतों पर टीम के अधिकारियों ने जांच कर रिपोर्ट तैयार की है। एमआईसी की बैठक में अतिरिक्त प्रस्ताव क्रमांक 5 (2) अंतर्गत उक्त एजेंसी द्वारा प्रदायित सामग्री जो कि निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं है। इसे एजेंसी को वापस करने का निर्णय लिया गया था। अभी तक सप्लाई हुए रिक्शा पड़ा हुआ है। इसमें निगम अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है।

टिप्पर खरीदी के भुगतान पर उठ रहे हैं सवाल

नगर निगम में खरीदे गए दो नग टिप्पर के लिए सप्लायर को 50 लाख रुपये का भुगतान किया गया है। इसे लेकर पार्षदों में तरह-तरह की चर्चाएं चल रही है। कई कांग्रेसी पार्षद टिप्पर खरीदी की जांच करने की मांग शासन-प्रशासन से की है, क्योंकि इस खरीदी से कई कांग्रेसी पार्षदों समेत कई अन्य संतुष्ट नहीं है। कई तरह के वे आरोप लगा भी रहे हैं। नगर निगम के उपनेता प्रतिपक्ष विशु देवांगन का आरोप था कि दो नग टिप्पर खरीदी का 50 लाख रुपये का भुगतान आनन फानन में कर दिया गया। जबकि कोटेशन दूसरी जगह से प्राप्त किया गया, जिसमें एक टिप्पर का रेट 12 लाख 66 हजार रुपये है। निगम में जीरो टारलेंस की बात कही जाती है, सब दिखावा साबित होता है। बेलिंग मशीन की खरीदी भी आठ लाख 20 हजार रुपये से की गई है इसकी भी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि टिप्पर खरीदी में राशि का बंदरबाट हुआ है।

सिवरेज प्लांट व वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का किया निरीक्षण

छत्तीसगढ़ नगरीय निकाय के संयुक्त संचालक सुदेश सुंदरानी ने अपने टीम के अधिकारियों के साथ मुजगहन के पास निर्मित सिवरेज प्लांट एवं मुख्य नहर के पास स्थित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट पहुंचकर निरीक्षण किया। श्री सुंदरानी ने कहा कि दोनों कार्ययोजना के बारे में वे निरीक्षण करने आए हैं। उल्लेखनीय है कि नए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट को लेकर जल विभाग के प्रभारी अखिलेश सोनकर ने 16 बिंदुओं को लेकर गंभीर शिकायतें की थी। शिकायत के बावजूद अधिकारियों ने ठेकेदार को दो करोड़ 33 लाख रुपये का भुगतान कर दिया है, जबकि प्लांट में निर्माण कार्य में अनियमितता और कई खामियां है।

हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा