धमतरी में झड़ी का दौर जारी, धान फसल के लिए वरदान बनी बारिश; गंगरेल में 29.5 टीएमसी पानी
धमतरी, 30 अगस्त (हि.स.)।धमतरी जिले में पिछले एक सप्ताह से रुक-रुककर हो रही बारिश का दौर अब भी जारी है। अंचल में कुछ समय के लिए बारिश थमने के बावजूद झड़ी का सिलसिला बना हुआ है। पिछले दो दिनों से सुबह से ही बारिश शुरू हुई, जो दिनभर रुक-रुककर होती रही। देर शाम झमाझम बारिश ने मौसम को और खुशनुमा बना दिया। लगातार बारिश को देखते हुए ज्यादातर लोग घरों में ही रहे, जबकि कामकाजी लोग छतरी और बरसाती के सहारे जरूरी काम से बाहर निकले।
हल्की बारिश के बीच सड़कों पर निकले लोगों को भीगने से बचने के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ा। बारिश की तीव्रता अधिक नहीं होने से शहर की गलियों और मुख्य सड़कों पर ज्यादा जलभराव नहीं हुआ, हालांकि गड्ढों वाली सड़कों पर पानी जरूर भर गया। किसानों के लिए यह बारिश राहत लेकर आई है। किसान बंशी साहू, अवध निषाद और परमानंद साहू ने बताया कि अर्ली वैरायटी के धान की फसल अब तैयार होने लगी है और जल्द ही बालियां निकलने की स्थिति में है। ऐसे समय में खेतों में हल्की बारिश फसल के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो रही है। धान में बालियां निकलने के दौरान पर्याप्त नमी मिलने से फसल को लाभ मिलता है और सिंचाई की जरूरत भी पूरी होती है।
जिले में बारिश अच्छी होने के बावजूद गंगरेल बांध के कैचमेंट क्षेत्र में अपेक्षाकृत कम बारिश होने से जलभराव की स्थिति अभी संतोषजनक नहीं है। चारामा और कांकेर क्षेत्र में कम बारिश के कारण गंगरेल बांध में पानी की आवक बेहद कम बनी हुई है। सावन का पूरा महीना बीतने के बाद भी गंगरेल बांध में करीब 29.5 टीएमसी पानी ही भर पाया है। बांध अब तक लबालब नहीं हो सका है और गेट खोलने की स्थिति भी निर्मित नहीं हुई है। भादो माह में यदि कुछ दिनों तक झमाझम बारिश होती है तो बांध में पानी की आवक बढ़ने के साथ गेट खुलने की संभावना बन सकती है।
फिलहाल गंगरेल को लबालब होने के लिए करीब डेढ़ से दो टीएमसी पानी की और जरूरत है। इसी तरह माड़मसिल्ली बांध में करीब 5 टीएमसी, दुधावा बांध में 8.25 टीएमसी और सोंढूर बांध में करीब 5 टीएमसी जलभराव है। सभी बांधों में पानी की आवक फिलहाल बेहद कम है, जिसके चलते अभी बांध पूरी क्षमता तक नहीं पहुं
च पाए हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा