धमतरी में एडवेंचर टूरिज्म को नई उड़ान, सटियारा में शुरू हुई रा कैंपिंग

 








धमतरी, 12 अक्टूबर (हि.स.)। गंगरेल बांध का विशाल जलक्षेत्र, हरे-भरे जंगल, पहाड़ियां और ग्रामीण अंचलों की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत धमतरी जिले को प्रकृति एवं एडवेंचर टूरिज्म के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की संभावनाएं समेटे हुए हैं। इन संभावनाओं को साकार करने की दिशा में सटियारा गांव में रॉ कैंपिंग की पहल शुरू की गई है।

कैंपिंग एवं पर्यटन कंपनी कैंपवन्स द्वारा आयोजित दो दिवसीय और एक रात्रि के शिविर में रायपुर, भिलाई और बिलासपुर से पहुंचे पर्यटकों ने प्रकृति के बीच समय बिताने के साथ ग्रामीण जीवन और स्थानीय संस्कृति को करीब से जाना।

शिविर में टेंट में रात्रि विश्राम, जंगल में ट्रेकिंग, बोटिंग, अलाव के आसपास सामूहिक गतिविधियों और कहानी-कथन जैसे आयोजन किए गए। पर्यटकों ने ग्रामीणों से संवाद किया और बच्चों तथा बुजुर्गों के साथ समय बिताया। ग्रामीणों ने आत्मीयता के साथ पर्यटकों को सीताफल भेंट किए। इस अनुभव ने प्रकृति आधारित पर्यटन के साथ शहरों और गांवों के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव की संभावनाओं को भी सामने रखा। राज्य शासन द्वारा पर्यटन विकास और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल के मार्गदर्शन में धमतरी जिले की प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक विरासत को पर्यटन गतिविधियों से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने बताया कि सटियारा को कैंपिंग साइट के रूप में विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। गंगरेल बांध के आसपास के डूबान क्षेत्रों में पर्यटन विकास की व्यापक संभावनाएं हैं। इसे ध्यान में रखते हुए हरफर, कोलियारी सहित अन्य उपयुक्त क्षेत्रों में भी पर्यटन गतिविधियों के विस्तार के प्रयास किए जाएंगे। कोलियारी में पर्यटन गतिविधियों को व्यवस्थित स्वरूप देने के लिए पर्यटन समिति के गठन की पहल की जा रही है। साथ ही बोटिंग विलेज की अवधारणा के अनुरूप विकास की संभावनाओं पर काम किया जा रहा है, जिससे जल आधारित पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ पर्यटकों को नए अनुभव उपलब्ध कराए जा सकें।

कलेक्टर ने कहा कि पर्यटन विकास में राज्य शासन और छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल का सहयोग महत्वपूर्ण है। जिला प्रशासन का प्रयास है कि प्राकृतिक विशेषताओं को सुरक्षित रखते हुए आवश्यक सुविधाएं विकसित की जाएं और स्थानीय समुदायों को पर्यटन गतिविधियों से जोड़ा जाए। पर्यटन स्थलों तक पर्यटकों की सुगम पहुंच के लिए सड़क संपर्क, संकेतक बोर्ड, पार्किंग, स्वच्छता, पेयजल और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं भी महत्वपूर्ण हैं। पर्यटन गतिविधियों के विस्तार के साथ इन सुविधाओं के विकास और पहुंच मार्गों में सुधार की जरूरत पर ध्यान दिया जा रहा है। गंगरेल बांध और आसपास के क्षेत्रों में बोटिंग, कैंपिंग एवं ट्रेकिंग जैसी गतिविधियों के संचालन में सुरक्षा, आवश्यक अनुमतियों और पर्यावरणीय मानकों का पालन भी जरूरी होगा। योजनाबद्ध विकास से पर्यटकों की सुविधा बढ़ने के साथ स्थानीय व्यवसायों को प्रोत्साहन मिल सकता है।

कैंपिंग, ट्रेकिंग और ग्रामीण पर्यटन के विस्तार से स्थानीय युवाओं के लिए गाइड, परिवहन, भोजन व्यवस्था और अन्य पर्यटन सेवाओं में रोजगार की संभावनाएं बनेंगी। वहीं ग्रामीण अपने स्थानीय उत्पादों, पारंपरिक व्यंजनों और सांस्कृतिक विशेषताओं को पर्यटकों तक पहुंचाकर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकेंगे। सटियारा में रा कैंपिंग की पहल तथा हरफर और कोलियारी में पर्यटन गतिविधियों के विस्तार की तैयारी से जिले में प्रकृति एवं रोमांच आधारित पर्यटन की नई संभावनाएं उभर रही हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा