तहसील कार्यालय में पेयजल संकट गहराया, प्यासे भटक रहे पक्षकार

 


सौ साल पुराने कार्यालय में मूलभूत सुविधा का अभाव, अधिवक्ता संघ करेगा कलेक्टर से शिकायत

धमतरी, 11 अप्रैल (हि.स.)। लगभग सौ वर्ष पुराने तहसील कार्यालय में इन दिनों पेयजल संकट गंभीर रूप ले चुका है। जहां एक ओर रोजाना सैकड़ों लोग अपनी राजस्व संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए पहुंचते हैं, वहीं दूसरी ओर उन्हें पीने के पानी जैसी मूलभूत सुविधा के लिए भटकना पड़ रहा है।

तहसील परिसर में एसडीएम, तहसीलदार और नायब तहसीलदार के न्यायालय संचालित होते हैं, जहां जमीन विवाद से लेकर आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र से जुड़े मामलों की सुनवाई होती है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में पक्षकार, अधिवक्ता और आम नागरिक यहां आते हैं, लेकिन परिसर में पेयजल की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है। गर्मी के बढ़ते प्रभाव के बीच स्थिति और भी गंभीर हो गई है। अधिकारी और कर्मचारी तो अपने साथ पानी लेकर आते हैं, लेकिन दूर-दराज से आने वाले लोग बिना पानी के पहुंचते हैं और प्यास लगने पर इधर-उधर भटकने को मजबूर हो जाते हैं।

बताया गया कि, कुछ समय पहले यहां वाटर कूलर लगाया गया था, जो अब खराब हो चुका है। वहीं मटकों में पानी रखने की व्यवस्था भी बंद हो गई है। पहले थाने के पास प्याऊ घर संचालित होता था, लेकिन वह भी अब बंद पड़ा है। अधिवक्ता संघ के उपाध्यक्ष सचिन जाचक ने बताया कि पिछले आठ वर्षों से तहसील कार्यालय में पेयजल संकट बना हुआ है। अधिवक्ताओं को घर से पानी लाना पड़ता है और खत्म होने पर बाजार से पानी खरीदना पड़ता है। यहां तक कि कर्मचारी भी अन्य स्थानों से पानी लाकर उपयोग करते हैं। उन्होंने बताया कि तहसील परिसर में लगभग 60 अधिवक्ता, 40 मुंशी, 100 से अधिक अधिकारी-कर्मचारी और रोजाना 500 से ज्यादा पक्षकारों की आवाजाही रहती है, लेकिन इसके बावजूद पेयजल जैसी आवश्यक सुविधा की अनदेखी की जा रही है।

अधिवक्ताओं ने सुझाव दिया है कि रामसागर तालाब के पास स्थित ओवरहेड टैंक से पाइपलाइन के जरिए पानी की आपूर्ति की जा सकती है। साथ ही नए सिंटेक्स टैंक की स्थापना और खराब फ्रीजर मशीन की मरम्मत भी जरूरी है।पहले परिसर में पेड़ों के नीचे मटकों में पानी भरकर रखा जाता था, जिससे लोगों को राहत मिलती थी, लेकिन यह व्यवस्था भी अब बंद हो चुकी है। अधिवक्ताओं का कहना है कि इसे पुनः शुरू कर तत्काल राहत दी जा सकती है।लगातार अनदेखी से नाराज अधिवक्ता अब इस समस्या को लेकर कलेक्टर से मुलाकात कर ध्यान आकर्षित करने की तैयारी में हैं। उनका कहना है कि जब तहसील जैसे महत्वपूर्ण कार्यालय में छोटी समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है, तो अन्य मामलों में व्यवस्था की स्थिति सहज ही समझी जा सकती है। अधिवक्ताओं ने प्रशासन से शीघ्र स्वच्छ पेयजल की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि आम नागरिकों को परेशानी से राहत मिल सके।

हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा