तकनीकी क्रांति: ड्रोन स्प्रेयर से खेताें में हाेगा दवा का छिड़काव
-कलेक्टर अबिनाश मिश्रा की पहल से कृषि क्षेत्र में तकनीकी क्रांति की शुरुआत
धमतरी, 01 जून (हि.स.)। कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक के विस्तार और किसानों को वैज्ञानिक खेती से जोड़ने की दिशा में धमतरी जिले ने राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान बनाई है। जिले की 10 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (पैक्स) में ड्रोन स्प्रेयर सेवा शुरू कर धमतरी देश का पहला ऐसा जिला बन गया है, जहां सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को ड्रोन आधारित कृषि सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
लोहरसी समिति में आयोजित कार्यक्रम में कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने इस महत्वाकांक्षी पहल का शुभारंभ किया। इस दौरान सभी 10 समितियों के प्रशिक्षित ड्रोन पायलटों ने किसानों के समक्ष ड्रोन स्प्रेयर का प्रदर्शन किया। ड्रोन के जरिए उर्वरक एवं कीटनाशकों के सटीक छिड़काव, कम समय में अधिक क्षेत्र को कवर करने, लागत घटाने और कृषि कार्यों को अधिक प्रभावी बनाने की तकनीक का प्रदर्शन किसानों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा। कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने कहा कि किसानों तक आधुनिक तकनीक पहुंचाना समय की आवश्यकता है। ड्रोन तकनीक खेती में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है, जिससे कम लागत में अधिक दक्षता और बेहतर उत्पादन संभव होगा। उन्होंने कहा कि धमतरी को कृषि नवाचारों का माडल जिला बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और यह पहल उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस योजना की विशेषता यह भी है कि सीएससी ई गवर्नेस के सहयोग से पैक्स समितियों को कामन सर्विस सेंटर के रूप में विकसित किया जा रहा है। इससे किसानों को ड्रोन स्प्रेयर जैसी अत्याधुनिक कृषि सेवाओं के साथ विभिन्न डिजिटल एवं शासकीय सेवाएं भी एक ही स्थान पर उपलब्ध हो सकेंगी। ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीकी सुविधाओं की पहुंच बढ़ाने और समितियों को बहुउद्देशीय सेवा केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कार्यक्रम में जनपद सदस्य संत कुमारी किरण साहू, उप संचालक कृषि, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के नोडल अधिकारी, समिति के प्राधिकृत अधिकारी, समिति प्रबंधक, सीएससी डीएम विनय गिरि सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी और बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे। जिले में बोड़रा, लोहरसी, दोनर, अछोटा, खरेंगा, भोथीडीह, कुंदेल, गाड़ाडीह, जुगदेही और करेली समितियों को ड्रोन स्प्रेयर सुविधा से जोड़ा गया है। इन समितियों के माध्यम से क्षेत्र के किसानों को आवश्यकता अनुसार ड्रोन सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि ड्रोन तकनीक से कम समय में अधिक क्षेत्र में छिड़काव संभव होगा, रसायनों का संतुलित उपयोग सुनिश्चित होगा तथा किसानों की श्रम और लागत दोनों में कमी आएगी। साथ ही खेतों में सीधे प्रवेश की आवश्यकता घटने से फसलों को नुकसान पहुंचने की संभावना भी कम होगी।
हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा