नगरी में गूंजा आदिवासी एकजुटता का संदेश, उत्साह से मनाया गया विश्व आदिवासी दिवस
धमतरी, 09 अगस्त (हि.स.)। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर नगरी के कृषि उपज मंडी परिसर में जिला स्तरीय कार्यक्रम बड़े उत्साह, उमंग और आदिवासी संस्कृति के रंग में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जिलेभर से हजारों की संख्या में आदिवासी समाज के लोग जुटे। पारंपरिक वेशभूषा, लोकनृत्य, सामाजिक मुद्दों और आदिवासी अधिकारों से जुड़े विषयों ने पूरे आयोजन को विशेष बना दिया। सुबह से ही नगरी में आदिवासी समाज के लोगों की भीड़ नजर आई और देर शाम तक कृषि उपज मंडी परिसर में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का दौर चलता रहा।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जितेंद्र मीणा ने अपने संबोधन में कहा कि विश्व आदिवासी दिवस सिर्फ आदिवासियों का एजेंडा है, मिशनरियों का नहीं। उन्होंने कहा कि जो लोग इस दिवस को किसी अन्य एजेंडे से जोड़कर देखते है, वे आदिवासियों को आपस में लड़ाने की कोशिश कर रहे है। आदिवासी हर धर्म में हो सकता है, लेकिन धर्म के नाम पर आदिवासियों के बीच बंटवारे को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
जितेंद्र मीणा ने कहा कि आदिवासी इस देश के मूल निवासी है। उन्होंने कहा कि यह समझने की आवश्यकता है कि कौन मूल निवासी है और कौन बाहरी। उन्होंने कहा कि संविधान के जरिए ही आदिवासी अपनी जमीन और अधिकारों को सुरक्षित रख सकते है। ग्रामसभा की अनुमति के बिना आदिवासियों की जमीन छीनी नहीं जा सकती। उन्होंने कहा कि हमारी जमीन ही हमारे जीवन का मूल अधिकार है। जमीन रहेगी तो हमारी संस्कृति रहेगी और संस्कृति रहेगी तो हमारी पहचान सुरक्षित रहेगी। संरक्षण के नाम पर आदिवासी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के सामने विस्थापन की समस्या खड़ी हो रही है। आदिवासियों के अधिकारों और उनकी जमीन की रक्षा के लिए समाज को संवैधानिक और कानूनी तरीके से अपनी आवाज बुलंद करनी होगी। जनगणना में आदिवासी भाषाओं को लेकर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। यदि हमारी भाषाओं की गणना नहीं होगी तो आने वाली पीढ़ियों के सामने अपने पूर्वजों के ज्ञान, संस्कृति और परंपराओं को सुरक्षित रखने की चुनौती होगी।
कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 11 बजे मां दंतेश्वरी मंदिर में सेवा-अर्जी के साथ हुई। इसके बाद जग जंवारा जात्रा का शुभारंभ किया गया। आंगापेन की अगुवाई में निकली जात्रा में बड़ी संख्या में महिला, पुरुष और युवाओं ने हिस्सा लिया। जात्रा में महिलाएं सिर पर जंवारा लेकर पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुईं। युवाओं ने आदिवासी धुनों पर नृत्य करते हुए अपनी संस्कृति और परंपरा का प्रदर्शन किया।
सर्व आदिवासी समाज के जिलाध्यक्ष जीवराखन मरई ने कहा कि आदिवासी समाज सदियों से प्रकृति को पूजता आया है। हमारे पूर्वजों ने अन्याय के खिलाफ हमेशा संघर्ष किया। आज आवश्यकता है कि हम अपने पूर्वजों के संघर्ष को याद करें और उनके बताए रास्ते पर चले। जिले के सीतानदी क्षेत्र में टाइगर रिजर्व के नाम पर कई गांवों को विस्थापित करने की तैयारी की जा रही है। इसके खिलाफ समाज को कानूनी लड़ाई लड़नी होगी। जिला पंचायत अध्यक्ष अरुण सार्वा ने कहा कि जल, जंगल और जमीन को सहेजकर रखने वाला आदिवासी समाज है। समाज को अब रचनात्मक कार्यों की दिशा में आगे बढ़ने की आवश्यकता है। कार्यक्रम में सिहावा विधायक अम्बिका मरकाम ने कहा कि समाज को अपनी संस्कृति, परंपरा और संवैधानिक अधिकारों को मजबूत करने के लिए संगठित होकर आगे बढ़ना होगा। विशिष्ट अतिथि के रूप में जिला पंचायत अध्यक्ष अरुण सार्वा, नगर पंचायत अध्यक्ष बलजीत छाबड़ा, पूर्व विधायक डॉ. लक्ष्मी ध्रुव, श्रवण मरकाम, पिंकी शिवराज शाह एवं प्रेमलता नागवंशी मौजूद रहे।
कार्यक्रम में सर्व आदिवासी समाज के तहसील अध्यक्ष उमेश देव, रामप्रसाद मरकाम, सुरेंद्र ध्रुव, माधव सिंह ठाकुर, मनोज साक्षी, जयपाल ठाकुर, शिवप्रसाद कोर्राम, डॉ. ए.आर. ठाकुर, नारायण नेताम, चुम्मन लाल ध्रुव, टिकेश्वर ध्रुव, रैनलाल देव, प्रमोद कुंजाम, डोमार सिंह ध्रुव, गेवा राम नेताम, हरख मंडावी, साधु राम नेताम, स्कंध ध्रुव, उदय नेताम, एच.आर. ध्रुव, सुरेश ध्रुव, नेमीचंद देव, वेदप्रकाश ध्रुव, खिलेन्द्र पडोटी, रामेश्वर मरकाम, हेमंत ध्रुव, बंटी मरकाम, भैयालाल ध्रुव, सुरेंद्र राज ध्रुव, हृदयलाल नाग, संत नेताम, शशिकला ध्रुव, दलगंजन मरकाम, हलधर शार्दूल, पूरन नेताम, शत्रुपा तमोवंशी, शत्रुघन साक्षी, नरेश छेदैया, शैल नेताम, अरविंद नेताम, संतोष गंगेश, नरसिंग मरकाम, सत्यवती नेताम, हेमलाल मरकाम, उत्तम नेताम, खिंजन कश्यप, अमृत बारला, बंशी श्रीमाली, श्रवण सोरी, मनराखन मरकाम, दयाराम वेदकार, पीला राम नेताम, छेदप्रकाश कौशिल, राम सिंह समरथ, सुनाराम कमार, नरेश छेदैया सहित जिलेभर से बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा