सर्पदंश से महिला की मौत, परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लगाया लापरवाही का आरोप

 


गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, 22 जून (हि.स.)। जिला अस्पताल गौरेला-पेंड्रा-मरवाही से इलाज में लापरवाही का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां सर्पदंश की शिकार एक 45 वर्षीय महिला की उपचार के दौरान मौत हो गई। मृतिका की पहचान लालपुर गांव निवासी उर्मिला बाई के रूप में हुई है।

परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन की घोर लापरवाही और समय पर सही इंजेक्शन न मिलने के कारण महिला को अपनी जान गंवानी पड़ी। वहीं अस्पताल प्रशासन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है।

जानकारी के अनुसार, लालपुर निवासी उर्मिला बाई को बीती देर रात उनके घर में ही किसी जहरीले सांप ने काट लिया था। सांप के काटने के बाद परिजन बिना वक्त गंवाए महिला को तत्काल उपचार के लिए जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। लेकिन साेमवार सुबह इलाज के दौरान महिला ने दम तोड़ दिया। महिला की मौत के बाद अस्पताल परिसर में परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने डॉक्टरों पर इलाज में ढिलाई बरतने का आरोप लगाते हुए हंगामा किया।

महिला की मौत पर उनके पति ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा हम मरीज को सांप काटने के आधे घंटे के भीतर अस्पताल ले आए थे, जहां शुरुआती जांच के बाद डॉक्टरों ने स्थिति को सामान्य बताया था। अस्पताल में पर्ची बनवाने और अन्य कागजी कार्रवाई के नाम पर काफी समय बर्बाद किया गया, जिससे इलाज में देरी हुई। डॉक्टरों ने मरीज को जरूरी एंटी-स्नेक वेनम इंजेक्शन नहीं लगाया। जब हमने इस बारे में पूछा, तो उन्होंने दावा किया कि इंजेक्शन लगा दिया गया है और खाली रैपर डस्टबिन में फेंक दिए हैं, लेकिन वे हमें वह डस्टबिन दिखाने से कतरा रहे हैं।

मृतक के रिश्तेदार बृजलाल राठौर ने इस कथित लापरवाही के खिलाफ कलेक्टर और एसडीएम को लिखित आवेदन सौंपकर डॉक्टरों की टीम द्वारा पोस्टमार्टम और बिसरा जांच कराने की मांग की है ताकि मौत का सच सामने आ सके।

इस संबंध में जिला अस्पताल के सीनियर डॉ. मार्को ने बताया कि मरीज को कुल 20 वायल एंटी-स्नेक वेनम दिए गए थे। परिजनों के आरोपों पर अस्पताल का पक्ष रखते हुए उन्होंने इलाज में किसी भी प्रकार की लापरवाही से इनकार किया है।

उन्होंने बताया कि महिला को देर रात करीब 1:15 बजे अस्पताल लाया गया था। उस समय वह होश में थीं और उनके पैर में पट्टी (टूर्निकेट) बंधी हुई थी। ड्यूटी डॉक्टर ने तत्काल उनका प्राथमिक उपचार शुरू कर दिया था। सीनियर डॉक्टरों की सलाह पर मरीज को एंटी-स्नेक वेनम दिया गया। पहले चरण में 10 वायल एंटी-स्नेक वेनम लगाए गए और स्थिति को देखते हुए दोबारा 10 वायल दिए गए। इस प्रकार मरीज को कुल 20 वायल एंटी-स्नेक वेनम दिए जा चुके थे।

सुबह के वक्त अचानक मरीज की हालत बिगड़ी। प्राथमिक दृष्टि से ऐसा लगता है कि सांप का जहर शरीर में बहुत अधिक मात्रा में फैल चुका था, जिसके कारण वह इतनी जल्दी कोलैप्स कर गईं। डॉ. मार्को ने स्पष्ट किया कि मौत के सटीक और वास्तविक कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो पाएगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / चन्द्र नारायण शुक्ल