गणेश उत्सव की आहट, प्रतिमाओं को आकार देने में जुटे मूर्तिकार
धमतरी, 09 सितंबर (हि.स.)। धमतरी गणेश उत्सव नजदीक आते ही अंचल में मूर्तिकारों की व्यस्तता बढ़ गई है। नगर और आसपास के क्षेत्रों में भगवान गणेश की प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने का काम दिन-रात चल रहा है। कहीं मिट्टी को आकार दिया जा रहा है तो कहीं प्रतिमाओं पर रंग-रोगन और साज-सज्जा का काम जारी है।
कुरूद के समीप ग्राम चरण निवासी 45 वर्षीय मूर्तिकार भुनेश्वर कुंभकार इन दिनों कुरूद नगर में कृष्णा साहू एवं जगदीश साहू के लकड़ी टाल की खाली जगह पर गणेश प्रतिमाओं के निर्माण में जुटे हैं। भुनेश्वर ने बताया कि वे बचपन से ही पुश्तैनी मूर्ति निर्माण कला से जुड़े हैं। गणेश प्रतिमाओं के अलावा वे दुर्गा प्रतिमाएं भी तैयार करते हैं। वर्षभर सीमेंट की मूर्तियों के साथ धार्मिक एवं सांस्कृतिक झांकियों के निर्माण का काम भी करते हैं। उन्होंने बताया कि गणेश उत्सव का मौसम उनके परिवार के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान करीब एक लाख रुपये तक की कमाई हो जाती है। गणेश उत्सव के बाद दुर्गा प्रतिमाओं का निर्माण शुरू हो जाता है और त्योहारों के अनुसार वर्षभर काम चलता रहता है। मूर्ति निर्माण में उनका पूरा परिवार भी सहयोग करता है। पत्नी और बेटी प्रतिमाओं को आकार देने, सजाने और अन्य कार्यों में हाथ बंटाती हैं। काम का दबाव बढ़ने पर समय पर प्रतिमाएं तैयार करने के लिए दो-तीन अतिरिक्त कारीगरों को भी बुलाना पड़ता है।
भुनेश्वर का कहना है कि वर्षों से पुश्तैनी कला को आगे बढ़ाने के बावजूद उन्हें शासन की ओर से अब तक चाक अथवा विशेष सहायता नहीं मिली है। उनका कहना है कि पारंपरिक मूर्तिकारों को आधुनिक उपकरण, आर्थिक सहायता और प्रशिक्षण जैसी सुविधाएं मिलें तो इस कला को नई दिशा मिल सकती है। गणेश उत्सव की तैयारियों के बीच ऐसे कलाकार अपनी मेहनत और हुनर से मिट्टी को भगवान गणेश के मनमोहक स्वरूप में ढाल रहे हैं। श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बनने वाली इन प्रतिमाओं के पीछे कलाकारों की कई दिनों की मेहनत, लगन और पारंपरिक हुनर छिपा है।
हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा