माँ दंतेश्वरी के आशीर्वाद के साथ बस्तर तिरंगा यात्रा के दूसरे दिन बीजापुर के हुई लिए रवाना
दंतेवाड़ा, 13 अगस्त (हि.स.)। बस्तर तिरंगा यात्रा के दूसरे दिन की शुरुआत दंतेवाड़ा में रात्रि विश्राम के बाद आज गुरुवार सुबह आराध्य देवी माँ दंतेश्वरी के आशीर्वाद के साथ हुई। यात्रा प्रारंभ करने से पहले वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने माँ दंतेश्वरी मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना एवं दर्शन कर माता का आशीर्वाद प्राप्त किया।
मंत्री केदार कश्यप ने माँ दंतेश्वरी से छत्तीसगढ़ के समस्त प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि, शांति और खुशहाली की मंगलकामना की। इसके पश्चात राष्ट्रभक्ति और तिरंगे के सम्मान के संकल्प के साथ बस्तर तिरंगा यात्रा 13 अगस्त यानी आज दंतेवाड़ा से बीजापुर के लिए रवाना हो गई है। इस दौरान उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा भी उनके साथ उपस्थित रहे।
केदार कश्यप ने कहा कि माँ दंतेश्वरी की पावन धरती से तिरंगा यात्रा का आगे बढ़ना गौरव का क्षण है। यह यात्रा बस्तर में शांति, विश्वास, एकता और विकास के नए अध्याय का संदेश लेकर जन-जन तक पहुंच रही है। यात्रा के दौरान विभिन्न स्थानों पर वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ राष्ट्रभक्ति, एकता और विकसित एवं शांत बस्तर का संदेश जन-जन तक पहुंचाया जाएगा।
आज गुरूवार काे बस्तर तिरंगा यात्रा के दूसरे दिन बस्तर तिरंगा यात्रा सुकमा और दंतेवाड़ा जिले के उन इलाकों से होकर गुजरेगी, जिन्हें कभी नक्सल हिंसा के सबसे बड़े गढ़ों के तौर पर जाना जाता था। यात्रा के दौरान बड़े नक्सली हमलों में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि दी जाएगी और शहीद स्थलों से मिट्टी भी संग्रहित की जाएगी। अब इन्हीं इलाकों से तिरंगा यात्रा का गुजरना बस्तर में बदलते माहौल की एक अलग तस्वीर पेश करेगा।
दंतेवाड़ा से प्रारंभ होकर बस्तर तिरंगा यात्रा कुआकोंडा, भूसारास (घाटी), चिंगावरम, सुकमा, एर्राबोर, मनीकोंटा, दोरनापाल, पोलमपल्ली, बकुलपाल, मिनपा-ताड़मेटला, चिंतलनार, जगरगुंडा, सिलगेर, टेकलगुड़ेम और आवापल्ली होते हुए बीजापुर पहुंचेगी, जहां रात्रि विश्राम निर्धारित है। यात्रा के दौरान शहीद जवानों के बलिदान को याद किया जाएगा। जिन स्थानों पर नक्सली हमलों में जवानों ने अपना बलिदान दिया, वहां श्रद्धांजलि देने के साथ मिट्टी भी संग्रहित की जाएगी। इस तरह यात्रा सिर्फ तिरंगा लेकर आगे बढ़ने का कार्यक्रम नहीं, बल्कि शहीदों की स्मृतियों को संजोने और नई पीढ़ी तक उनके बलिदान की कहानी पहुंचाने का संदेश भी देगी।
14 अगस्त को यात्रा का तीसरा और अंतिम दिन होगा। बीजापुर से यात्रा आवापल्ली, उसूर, गलगाम, नंबी और ताड़पाला होते हुए कुरेंगुट्टा पहाड़ी पहुंचेगी। कभी माओवादियों का गढ़ मानी जाने वाली इस पहाड़ी पर तिरंगा फहराकर यात्रा का समापन किया जाएगा। कुरेंगुट्टा इस यात्रा का सबसे अहम पड़ाव माना जा रहा है। जिस इलाके की पहचान कभी नक्सल प्रभाव वाले क्षेत्र के रूप में होती थी, उसी पहाड़ी पर तिरंगे का फहराया जाना यात्रा के संदेश को और मजबूत करेगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे