इंद्रावती नदी में विगत 50 वर्षों में सर्वाधिक 12.39 मीटर जलस्तर पहुंचा
जगदलपुर, 28 सितंबर (हि.स.)। बंगाल की खाड़ी में उठे चक्रवाती तूफान के प्रभाव से बस्तर अंचल में हुई मूसलाधार बारिश के कारण इंद्रावती नदी में भीषण बाढ़ की स्थिति निर्मित हो गई। इंद्रावती नदी का खतरे का स्तर 8.3 मीटर निर्धारित है।
इससे पूर्व खतरे का स्तर नदी में सर्वाधिक जलस्तर 9 जुलाई 1973 को 12.18 मीटर दर्ज किया गया था, जबकि कल इंद्रावती नदी का जलस्तर बढ़कर 12.39 मीटर के अपने सर्वाधिक स्तर पर पहुंच गया। इससे इंद्रावती नदीके पास शहरी इशाकाें में जहां कभी भी इंद्रावती नदी के बाढ़ का पानी नही पंहुचा वहां के घराें में पानी प्रवेश कर गया, इससे बाढ़ प्रभााविताें काे सबसे अधिक नुकसान उठाना पड़ है, आज साेमवार काे इंद्रावती नदी के बाढ़ का पानी काफी हद तक कम हाे गया है, लेकिन इसके बाद इस बाढ़ आपदा से हुए नुकसान की तस्वीर सामने आने लगेगी।
अत्यधिक जलस्तर के कारण इंद्रावती नदी के तटवर्ती क्षेत्रों, विशेषकर नदी बोड़ना और भेजापदर जैसे गांवों के चारों ओर पानी भर गया और ये क्षेत्र सड़क मार्ग से पूरी तरह कट गए। आपदा की इस घड़ी में जिला प्रशासन, एसडीआरएफ एवं अन्य बचाव दलों द्वारा युद्ध स्तर पर राहत एवं बचाव कार्य संचालित किए गए। अब तक 833 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। इनमें से 821 नागरिकों को नावों की सहायता से सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया। वहीं डोंगाघाट में फंसे 12 लोगों को विषम परिस्थितियों के बीच हेलीकॉप्टर से एयरलिफ्ट कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया।
बाढ़ प्रभावित परिवारों को तत्काल आश्रय एवं आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के लिए जिला प्रशासन द्वारा व्यापक स्तर पर राहत अभियान संचालित किया जा रहा है। वर्तमान में कुल 65 राहत शिविर संचालित किए जा रहे हैं, जिनमें 8,894 प्रभावित नागरिकों को ठहराया गया है। इनमें शहरी क्षेत्र के 8 राहत शिविरों में 2,620 तथा ग्रामीण क्षेत्र के 57 राहत शिविरों में 6,274 नागरिक शामिल हैं। सभी राहत शिविरों में प्रभावित नागरिकों के लिए भोजन, स्वच्छ पेयजल, आवश्यक दवाइयों एवं स्वास्थ्य परीक्षण सहित अन्य जरूरी सुविधाओं की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।
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हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे