कांकेर के साईमुंडा गांव में पक्का पुल नहीं बना तो ग्रामीणों ने बनाया बांस का ब्रिज
कांकेर, 07 अगस्त (हि.स.)। जिले के भानुप्रतापपुर के ग्राम पंचायत बांसकुंड में नदी पर वर्षों से पक्का पुल नहीं बनने के कारण ग्रामीणों ने आखिरकार स्वयं ही लकड़ियों का अस्थायी पुल तैयार कर लिया। अब यही लकड़ी का पुल गांव के लोगों के लिए स्कूल, खेत, अस्पताल और बाजार तक पहुंचने का एकमात्र सहारा बना हुआ है। नदी पर बना यह अस्थायी पुल देखने में जितना साधारण है, उस पर चलने वाले ग्रामीणों के लिए उतना ही जोखिम भरा भी है।
स्कूली बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग और किसान रोज इसी पुल की मदद से नदी पार करते हैं। बरसात में जब नदी का जलस्तर बढ़ जाता है, तब यह रास्ता और भी खतरनाक हो जाता है। ग्रामीणों के अनुसार नदी और नाले पर स्थायी पुल नहीं होने के कारण हर साल आपस में सहयोग कर लकड़ियों का पुल तैयार करना पड़ता है। पहले एनीकट के पिल्लरों से छलांग लगाकर या पानी के बीच से नदी पार करने की मजबूरी थी। बच्चों और ग्रामीणों की परेशानी को देखते हुए लोगों ने लकड़ी का अस्थायी पुल बनाना शुरू किया, लेकिन इस पुल से किसी भी वाहन की आवाजाही संभव नहीं है। ऐसे में आपात स्थिति सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है।
ग्राम पंचायत बांसकुंड के उपसरपंच मनोज कुमार यादव का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति बीमार पड़ जाए तो उसे खाट पर उठाकर नदी पार कराना पड़ता है। स्कूली बच्चे इसी लकड़ी के पुल से होकर स्कूल जाते हैं, जबकि किसान खाद-बीज तक पीठ पर लादकर नदी पार ले जाने को मजबूर हैं। उन्हाेने बताया कि पुल निर्माण के लिए जिला पंचायत, कलेक्टर कार्यालय और जनप्रतिनिधियों के पास कई बार आवेदन दिए गए। आवेदन की पावती और प्रतियां भी हैं, लेकिन अब तक उन्हें आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला।
जनपद पंचायत भानुप्रतापपुर की जनपद सदस्य एवं महिला बाल विकास सभापति सरोज मरकाम ने बताया कि सरपंच रहते हुए उन्होंने 2 बार पुल निर्माण के लिए आवेदन दिया। अधिकारियों ने कई बार मौके पर पहुंचकर नाप-जोख भी की, लेकिन निर्माण की दिशा में आगे कार्रवाई नहीं हुई। उन्हाेने बताया कि जनपद सदस्य बनने के बाद भी उन्होंने इस मुद्दे को लगातार उठाया। मंत्रालय तक वीडियो भेजकर ग्रामीणों की समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। अब ग्रामीणों के साथ कलेक्टर से मिलने और जरूरत पड़ने पर मंत्रालय जाने की तैयारी है।
भानुप्रतापपुर विधायक सावित्री मंडावी ने कहा कि गांव के बच्चों और महिलाओं को नदी-नाला पार करने के लिए जोखिम भरे अस्थायी बांस के पुल का इस्तेमाल करना पड़ता है। इस समस्या को देखते हुए पिछले दो वर्षों से संबंधित अधिकारियों, सचिवों, मंत्रालय और विधानसभा में याचिका के माध्यम से पक्के पुल के निर्माण के लिए प्रयास किया जा रहा था। विधायक के अनुसार पुल निर्माण की स्वीकृति हो चुकी है, बारिश का मौसम खत्म होते ही पुल का निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे