प्राकृतिक सौंदर्य और सुकून की नई राह, देश के पर्यटन मानचित्र पर तेजी से उभरता छत्तीसगढ़ का जशपुर
जशपुर, 29 जून (हि.स.)। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने और स्थानीय आजीविका को सशक्त बनाने की दिशा में छत्तीसगढ़ का जशपुर जिला तेजी से एक उभरते पर्यटन स्थल के रूप में अपनी अलग पहचान बना रहा है। अपनी अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता, हरी-भरी वादियों, कलकल बहती नदियों, पहाड़ों, झरनों और समृद्ध आदिवासी लोक-संस्कृति से परिपूर्ण यह क्षेत्र पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर रहा है।
शहरों की भागदौड़ भरी जिंदगी और कोलाहल से दूर शांति व सुकून के पल बिताने के लिए जशपुर देश भर के प्रकृति प्रेमियों को अपनी ओर सहज ही आकर्षित कर रहा है। यहां कई ऐसे मनोरम स्थल हैं, जहां आकर सैलानियों को एक असीम शांति और आत्मिक सुकून की अनुभूति होती है।
जिले के प्रमुख आकर्षणों में देश देखा, रानीदाह जलप्रपात, हरे-भरे चाय बागान, दमेरा और दनगरी जलप्रपात शामिल हैं। इसके साथ ही बगीचा विकासखंड में स्थित कैलाश गुफा आध्यात्मिक और प्राकृतिक शांति का एक अनूठा केंद्र है। घने जंगलों के बीच बनी इस अद्भुत प्राकृतिक गुफा में भगवान शिव का प्राचीन मंदिर और संत गहिरा गुरु का आश्रम स्थित है। वहीं, जशपुर शहर से महज 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित रानीदाह जलप्रपात हरी-भरी पहाड़ियों और घने जंगलों से घिरा हुआ है, जो सप्ताहांत में पिकनिक मनाने के लिए एक बेहतरीन विकल्प बन चुका है। इसी तरह राजपुरी जलप्रपात भी सैलानियों को अपनी अनुपम छटा से लुभाता है।
साहसिक पर्यटन और प्रकृति प्रेमियों के लिए कुनकुरी विकासखंड का मयाली नेचर कैंप एक शानदार गंतव्य है, जहां लोग बोटिंग और खूबसूरत नजारों का आनंद ले सकते हैं। मयाली की सबसे बड़ी विशेषता यहां स्थित मधेश्वर पहाड़ है, जिसे विश्व के सबसे बड़े प्राकृतिक शिवलिंग के रूप में जाना जाता है। इस विशालकाय पर्वत को 'लार्जेस्ट नेचुरल शिवलिंग' के रूप में प्रतिष्ठित 'गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' में भी दर्ज किया गया है। हूबहू शिवलिंग के आकार का यह पहाड़ न केवल पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है, बल्कि स्थानीय लोगों की गहरी आस्था से भी जुड़ा हुआ है। इसके अतिरिक्त, फरसाबहार विकासखंड में ईब नदी के किनारे स्थित कोतेबिरा अपनी मनोरम चट्टानों और शांत पहाड़ी श्रृंखलाओं के लिए प्रसिद्ध है, जबकि ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व रखने वाली खुडिया रानी गुफा भी जिज्ञासाओं से भरी हुई है।
जशपुर की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यहां सड़क मार्ग द्वारा बेहद आसानी से पहुंचा जा सकता है। हवाई और रेल यात्रा के शौकीन पर्यटकों के लिए निकटतम रेलवे स्टेशन और हवाई अड्डा पड़ोसी राज्यों में उपलब्ध हैं। पर्यटक झारखंड की राजधानी रांची स्थित बिरसा मुंडा एयरपोर्ट या उड़ीसा के झारसुगुड़ा तक हवाई मार्ग और ट्रेन से पहुंच सकते हैं। इसके बाद रांची और झारसुगुड़ा दोनों ही स्थानों से मात्र 3 घंटे का सफर तय कर सड़क मार्ग से जशपुर पहुंचा जा सकता है। इसके अलावा छत्तीसगढ़ के प्रमुख शहरों जैसे रायगढ़, सरगुजा और बिलासपुर से भी जशपुर के लिए सीधी और सुगम सड़क कनेक्टिविटी उपलब्ध है।
पर्यटन की इन असीम संभावनाओं को रोजगार में बदलने के लिए जिला प्रशासन ने केरे गांव को एक भरोसेमंद और आकर्षक पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। स्थानीय स्तर पर पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिले में वर्तमान में 5 होमस्टे स्थापित किए जा चुके हैं। प्रशासन द्वारा स्थानीय ग्रामीणों को होमस्टे प्रबंधन और अतिथि सेवा (हॉस्पिटैलिटी) का समुचित प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया है, जिससे न केवल पर्यटकों को स्थानीय संस्कृति को करीब से जानने का मौका मिल रहा है, बल्कि ग्रामीणों के लिए स्वरोजगार के नए मार्ग भी खुले हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / पारस नाथ सिंह