सुकमा के जंगलों में मिले बाघ के पगमार्क एक मवेशी का किया शिकार
सुकमा, 23 सितंबर (हि.स.)। जिले के वनमंडल सुकमा वन परिक्षेत्र में बाघ की संभावित मौजूदगी के संकेत मिलने के बाद वन विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है। मंगलवार रात्री में एक मवेशी के मारे जाने की सूचना मिलने पर वन विभाग और पुलिस की टीम आज बुधवार काे मौके पर पहुंची। पशु चिकित्सकों की टीम ने भी घटनास्थल का परीक्षण किया।
मौके पर बाघ के संभावित पगमार्क मिलने के बाद वन विभाग क्षेत्र में बाघ की संभावित आवाजाही की निगरानी कर रहा है। बाघ की संभावित आवाजाही वाले क्षेत्रों में से कोयाबेकुर, नीलावरम, फूलबगड़ी, केरलपाल पंचायत सहित आस-पास के वन क्षेत्र शामिल हैं। वन विभाग ने इन क्षेत्रों के ग्रामीणों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की गई है।
वन विभाग के डीएफओ अक्षय दिनकर के अनुसार संभावित बाघ की गतिविधियों पर राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की निर्धारित एसओपी के अनुरूप निगरानी एवं आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। संभावित आवागमन वाले क्षेत्रों में वन विभाग की टीमों को तैनात किया गया है। ग्रामीणों को सतर्क करने के लिए मुनादी कराई जा रही है, वहीं बाघ की गतिविधियों की पुष्टि और निगरानी के लिए विभिन्न स्थानों पर कैमरा ट्रैप लगाए जा रहे हैं। वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे शाम 4 बजे के बाद जंगल में जाने से बचें। आवश्यक होने पर अकेले जंगल न जाएं और समूह में ही जाएं। यदि जंगल या आसपास बाघ दिखाई देता है तो उसके पास जाने, उसका पीछा करने या भीड़ लगाने की कोशिश न करें। ग्रामीणों से यह भी कहा गया है कि बाघ की संभावित गतिविधि अथवा किसी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तत्काल वन विभाग को दें। बाघ की मौजूदगी की सूचना मिलने पर स्वयं उसका पीछा करने या उसे भगाने का प्रयास न करें।
वन विभाग ने बाघ से संबंधित किसी भी अपुष्ट सूचना, फोटो या वीडियो को सोशल मीडिया पर प्रसारित नहीं करने की अपील की है। ग्रामीणों से कहा गया है कि वे केवल वन विभाग अथवा जिला प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें और अफवाहों से बचें। वन विभाग पुलिस और जिला प्रशासन के सहयोग से प्रभावित संभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी कर रहा है। वन अमले को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। वन विभाग ने बताया कि यदि मवेशी की मौत बाघ के हमले से होने की पुष्टि होती है, तो शासन के प्रचलित नियमों के अनुसार पात्र पशुपालक को नियमानुसार मुआवजा प्रदान किया जाएगा।
बाघ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I के अंतर्गत संरक्षित वन्यजीव है। इसके शिकार, हत्या अथवा शिकार के प्रयास पर कानून के तहत कठोर दंड का प्रावधान है। वन विभाग ने ग्रामीणों से स्पष्ट रूप से कहा है कि वे स्वयं बाघ को पकड़ने, भगाने या किसी भी प्रकार का नुकसान पहुंचाने का प्रयास न करें।वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि घबराएं नहीं, सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल वन विभाग को दें।
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हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे