जनगणना कार्य में लापरवाही पर दीपका की तीन व्याख्याता निलंबित

 

कोरबा, 18 अगस्त (हि. स.)। जनगणना-2027 के प्रथम चरण के कार्य में लापरवाही बरतना कोरबा जिले के पीएमश्री स्वामी आत्मानंद शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, दीपका की तीन व्याख्याताओं को भारी पड़ा। जनगणना कार्य के लिए प्रगणक के रूप में नियुक्त तीनों व्याख्याताओं को दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही, अनुशासनहीनता और आदेशों की अवहेलना के आरोप में लोक शिक्षण संचालनालय , रायपुर ने आज तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

निलंबित व्याख्याताओं में श्रीमती नर्मदा बंजारे, श्रीमती ऊषा राज और श्रीमती नीलू चन्द्रा शामिल हैं। तीनों की कार्रवाई के लिए कोरबा कलेक्टर कुणाल दुदावत ने लोक शिक्षण संचालनालय को अनुशंसा भेजी थी। कलेक्टर की अनुशंसा के आधार पर लोक शिक्षण संचालनालय रायपुर ने निलंबन आदेश जारी किया है।

जानकारी के अनुसार, जनगणना-2027 के प्रथम चरण के अंतर्गत गणना ब्लॉक क्रमांक 0026 में तीनों व्याख्याताओं को प्रगणक नियुक्त किया गया था। मुख्य नगरपालिका अधिकारी एवं जनगणना चार्ज अधिकारी, दीपका द्वारा उन्हें जनगणना कार्य की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। आरोप है कि तीनों ने प्रारंभिक प्रशिक्षण में शामिल होने से इंकार कर दिया। इसके बाद कई बार निर्देश दिए जाने के बावजूद उन्होंने नियुक्ति आदेश और जनगणना किट प्राप्त नहीं की। निर्धारित समय सीमा में सौंपे गए जनगणना कार्य का भी निष्पादन नहीं किया गया। मामले में तीनों व्याख्याताओं को कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया गया था, लेकिन उनके द्वारा प्रस्तुत स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया गया। इसके बाद जिला प्रशासन ने कार्रवाई की अनुशंसा लोक शिक्षण संचालनालय को भेजी।

प्रशासन ने जनगणना जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य में लापरवाही को गंभीरता से लिया है। जनगणना अधिनियम, 1948 की धारा 5 के तहत जनगणना कार्य में नियुक्त अधिकारी-कर्मचारी लोक सेवक की श्रेणी में आते हैं। ऐसे में जनगणना दायित्वों के निर्वहन में उदासीनता और आदेशों की अवहेलना को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम 3 के विपरीत गंभीर कदाचार माना गया है।

छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 9 के उपनियम (1)(क) के तहत तीनों व्याख्याताओं को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय कार्यालय जिला शिक्षा अधिकारी, जिला कोरबा निर्धारित किया गया है। इस अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी।

जनगणना-2027 के कार्य में अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय होने के बीच कोरबा जिले में हुई यह कार्रवाई प्रशासन की सख्ती को दर्शाती है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय महत्व के जनगणना कार्य में निर्धारित दायित्वों के निर्वहन में किसी भी प्रकार की लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा।

हिन्दुस्थान समाचार / हरीश तिवारी