मुरासु चक्रवात का असर, सुबह से आसमान में छाए काले बादल, धान की फसल को लेकर किसान चिंतित

 






धमतरी, 03 नवंबर (हि.स.)। अर्णब चक्रवात की भारी बारिश से धान की तैयार फसल को हुए नुकसान से किसान अभी उबर भी नहीं पाए हैं कि अब बंगाल की खाड़ी से उठे मुरासु चक्रवात का असर धमतरी जिले में दिखाई देने लगा है। मंगलवार सुबह से ही आसमान में काले बादल छाए है। बीती शाम को हल्की बारिश भी हुई। जिले के चारों ब्लॉक में तैयार हो रही और कटाई के लिए तैयार हो चुकी धान फसल के संभावित नुकसान का आकलन किया जा रहा है।

अर्णब चक्रवात के बाद से मौसम पिछले कुछ दिनों से खराब चल रहा है। कभी धूप तो कभी बादल वाला मौसम बन रहा है, इससे लोग परेशान है। किसान चिंतित है। अर्णब चक्रवात से हुई भारी बारिश से जिले में अधिकांश किसानों की तैयार धान फसल बर्बाद हो गई है। जगह-जगह खेतों में तैयार धान फसल जमीन पर गिरने के बाद पानी में डूबी हुई है और सड़ रही है। चाहकर भी किसान अपनी फसल नहीं बचा पा रहे है, इससे किसानों की दिक्कतें बढ़ गई है। मौसम खुलने का बेसब्री से इंतजार है, ताकि फसल को सुरक्षित कर सके, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है।

अर्णब चक्रवात के बाद से मौसम ठीक से खुला नहीं है और अब मुरासु चक्रवात का असर धमतरी तक पहुंच चुका है। सोमवार के बाद आज भी सुबह से मुरासु चक्रवात का असर जिले में दिखाई दे रहा है। शाम को हल्की बारिश के बाद आज की बदली ने किसानों की चिंता फिर बढ़ा दी है। किसानों का कहना है कि अब बारिश हुई, तो धान फसल बचा पाना मुश्किल है।

जिले में खरीफ फसल की कटाई शुरू हो चुकी है वहीं जिन किसानों ने धान की बुवाई लेट से की है उनकी फसल लगभग खेतों में कटाई के लिए तैयार है। बे मौसम बारिश होने के चलते फसल के नुकसान होने का अंदेशा बना हुआ है। उत्पादन भी घटने के आसार हैं।

किसान भागीराम साहू, प्रकाश जांगड़े, मदन लाल साहू ने बताया कि ऐन फसल कटाई के समय यदि बारिश हो जाती है तो तैयार हुई फसल प्रभावित होती है। धान की बालियों में कालापन आ जाता है जिसका असर इसकी कीमत पर पड़ता है। इसी तरह मौसम जनित बीमारी होने का भी अंदेशा बना रहता है।

उल्लेखनीय है कि धमतरी जिले के चारों ब्लॉक धमतरी कुरूद मगरलोड नगरी में किसानों ने बड़े पैमाने पर खरीफ फसल के रूप में धान की फसल लगाई है, कटाई शुरू हो चुकी है वहीं अभी भी कई खेतों में धान की फसल कटाई के लिए तैयार है।

पहले चक्रवात की बारिश से नुकसान झेल चुके किसान अब मौसम खुलने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। किसानों का कहना है कि यदि इस समय फिर बारिश होती है तो खेतों में खड़ी और कटी हुई धान की फसल को बचाना मुश्किल हो जाएगा।

हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा